Anmol Sandesh News Desk, लखनऊ
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के निर्माण से जुड़ी तकनीकी समस्याओं के मामले में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने बड़ा कदम उठाया है। NHAI ने एक्सप्रेसवे की रियायतधारी कंपनी Awadh Expressway Pvt. Ltd. पर लगाए गए तीन साल के डिबारमेंट को उसकी प्रमोटर कंपनी PNC Infratech तक भी बढ़ा दिया है। इसके बाद PNC इंफ्राटेक अगले तीन वर्षों तक NHAI, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) और उनकी कार्यान्वयन एजेंसियों की ओर से जारी नए टेंडरों में हिस्सा नहीं ले सकेगी। कंपनी को यह आदेश 11 सितंबर 2026 को मिला था।
एक्सप्रेसवे खुलने के कुछ ही दिन बाद सामने आईं दिक्कतें
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 13 जुलाई 2026 को हुआ था। इसके कुछ ही समय बाद एक्सप्रेसवे के एक हिस्से में सड़क के खिसकने यानी स्लिपेज की समस्या सामने आई। रिपोर्टों के अनुसार करीब 300 मीटर हिस्से में समस्या आने के बाद वहां यातायात को नियंत्रित/डायवर्ट किया गया और तकनीकी जांच शुरू की गई। इसके बाद एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों में दूसरी संरचनात्मक समस्याओं की भी रिपोर्ट सामने आईं। इन घटनाओं के बाद सड़क की गुणवत्ता और डिजाइन से जुड़े सवालों की तकनीकी जांच शुरू की गई।
IIT खड़गपुर की जांच से खुलेगा असली कारण
एक्सप्रेसवे में आई तकनीकी दिक्कतों के कारणों का पता लगाने के लिए IIT खड़गपुर से भी तकनीकी जांच कराई जा रही है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक विशेषज्ञों की विस्तृत रिपोर्ट अभी आनी बाकी है और इसके अगले सप्ताह आने की उम्मीद जताई गई है। रिपोर्ट में प्रभावित हिस्सों की स्थिति और समस्या के संभावित कारणों पर तकनीकी निष्कर्ष सामने आ सकते हैं। अधिकारियों के लिए यह रिपोर्ट इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे यह तय करने में मदद मिलेगी कि प्रभावित हिस्सों की मरम्मत किस तकनीकी तरीके से की जाए और भविष्य में ऐसी समस्या दोबारा न आए, इसके लिए क्या कदम उठाने होंगे।
तीन साल तक नए सरकारी टेंडरों पर रोक
NHAI के आदेश का सीधा असर PNC इंफ्राटेक के नए हाईवे प्रोजेक्ट्स पर पड़ सकता है। डिबारमेंट की अवधि के दौरान कंपनी NHAI, MoRTH और उनकी संबंधित कार्यान्वयन एजेंसियों के नए टेंडरों में बोली नहीं लगा सकेगी। यह प्रतिबंध तीन साल के लिए लगाया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक यह कार्रवाई संबंधित अनुबंध के तहत उपलब्ध अधिकतम डिबारमेंट अवधि है।
कंपनी बोली-प्रक्रिया से बाहर, लेकिन मौजूदा प्रोजेक्ट जारी
PNC इंफ्राटेक ने अपने नियामकीय खुलासे में कहा है कि इस आदेश से कंपनी के मौजूदा प्रोजेक्ट्स के निष्पादन, संचालन और रखरखाव पर असर नहीं पड़ेगा। कंपनी और उसकी संबंधित रियायतधारी इकाई मामले में उपलब्ध कानूनी विकल्पों का मूल्यांकन कर रही हैं। यानी तीन साल की रोक मुख्य रूप से नए NHAI और MoRTH टेंडरों में भाग लेने से संबंधित है, जबकि पहले से चल रहे प्रोजेक्ट्स पर कंपनी का काम जारी रहने की बात कही गई है।
मरम्मत और जिम्मेदारी का सवाल भी अहम
एक्सप्रेसवे के प्रभावित हिस्सों की मरम्मत को लेकर भी NHAI और संबंधित कंपनी के बीच जिम्मेदारी का मुद्दा महत्वपूर्ण है। तकनीकी जांच पूरी होने के बाद प्रभावित हिस्से के पुनर्निर्माण या मरम्मत के तरीके को लेकर आगे की कार्रवाई स्पष्ट होगी। कुछ रिपोर्टों में शुरुआती मरम्मत लागत को करीब 3 करोड़ रुपये बताया गया है, हालांकि अंतिम लागत और तकनीकी समाधान विशेषज्ञों की रिपोर्ट तथा NHAI के निर्णय के बाद स्पष्ट होंगे।
कंपनी पहले ही दे चुकी थी सफाई
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब अगस्त में कंपनी ने स्पष्ट किया था कि उस समय तक उसे NHAI की ओर से डिबार या ‘नॉन-परफॉर्मर’ घोषित नहीं किया गया था। बाद में अनुशासनात्मक प्रक्रिया आगे बढ़ी और NHAI ने Awadh Expressway पर कार्रवाई के बाद उसका दायरा PNC Infratech तक बढ़ाया।
शेयर बाजार पर भी दिखा असर
NHAI के फैसले की जानकारी सामने आने के बाद PNC Infratech के शेयर में तेज गिरावट दर्ज की गई। 15 सितंबर को शेयर करीब 20 प्रतिशत के लोअर सर्किट पर पहुंच गया था। हालांकि शेयर बाजार की प्रतिक्रिया कंपनी के कारोबार और भविष्य को लेकर निवेशकों की बाजार-आधारित प्रतिक्रिया है; इसे कंपनी की परियोजनाओं के तकनीकी प्रदर्शन पर स्वतंत्र निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।
अब IIT रिपोर्ट पर टिकी नजर
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर सामने आई समस्याओं की तकनीकी वजह स्पष्ट करने में IIT खड़गपुर की रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल NHAI की कार्रवाई और कंपनी की ओर से कानूनी विकल्पों के मूल्यांकन के बीच अगला बड़ा अपडेट विशेषज्ञों की जांच रिपोर्ट और प्रभावित हिस्सों की मरम्मत से जुड़ा होगा।
एक नजर में पूरा मामला
- एक्सप्रेसवे: लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे
- उद्घाटन: 13 जुलाई 2026
- संबंधित कंपनी: PNC Infratech / Awadh Expressway Pvt. Ltd.
- समस्या: स्लिपेज और अन्य संरचनात्मक/तकनीकी दिक्कतें
- NHAI आदेश: 11 सितंबर 2026
- कार्रवाई: तीन साल का डिबारमेंट
- प्रभाव: नए NHAI, MoRTH और संबंधित एजेंसियों के टेंडरों में भागीदारी पर रोक
- तकनीकी जांच: IIT खड़गपुर
- कंपनी का रुख: कानूनी विकल्पों का मूल्यांकन; मौजूदा प्रोजेक्ट्स प्रभावित नहीं होने की बात
