Anmol Sandesh News Desk, भोपाल
मध्य प्रदेश में मानसून अब अपने अंतिम दौर में पहुंच गया है। मौसम में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। दिन में कई जगह तेज धूप और उमस के बाद शाम या रात को अचानक बादल छाने और गरज-चमक के साथ बारिश होने का सिलसिला जारी है। बुधवार को भोपाल और सीहोर समेत कई इलाकों में बारिश हुई। मौसम विभाग के मुताबिक 17 से 20 सितंबर के बीच गरज-चमक और स्थानीय स्तर पर बारिश की गतिविधियां बनी रह सकती हैं, लेकिन फिलहाल प्रदेश में भारी या अति भारी बारिश का बड़ा अलर्ट नहीं है।
20 सितंबर तक बड़े अलर्ट से राहत
मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार 20 सितंबर तक मध्य प्रदेश में भारी बारिश का कोई बड़ा अलर्ट नहीं है। हालांकि, स्थानीय मौसम प्रणालियों के प्रभाव से कुछ स्थानों पर बौछारें या गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। आईएमडी के पश्चिमी और पूर्वी मध्य प्रदेश के उपखंडीय पूर्वानुमान में 17 से 20 सितंबर तक गरज-चमक और आकाशीय गतिविधियों की संभावना दर्ज की गई है। इसलिए बारिश भले ही व्यापक रूप से न हो, लेकिन कुछ इलाकों में अचानक मौसम बदल सकता है।
भोपाल समेत इन इलाकों में बदल सकता है मौसम
राजधानी भोपाल में बुधवार को दिनभर धूप और उमस के बाद शाम को मौसम बदला और बारिश हुई। इसी तरह सीहोर सहित आसपास के इलाकों में भी बारिश दर्ज की गई। आने वाले दिनों में भोपाल, सीहोर, राजगढ़, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, धार, झाबुआ, अलीराजपुर, इंदौर, रतलाम, उज्जैन, देवास, शाजापुर, आगर-मालवा, मंदसौर और नीमच समेत कई जिलों में स्थानीय स्तर पर बौछारें पड़ने की संभावना बनी रह सकती है। हालांकि, किसी भी जिले के लिए स्थानीय अलर्ट और वास्तविक बारिश की स्थिति समय के साथ बदल सकती है, इसलिए जिला-स्तरीय आईएमडी चेतावनी को प्राथमिकता देना जरूरी है।
पिछले 24 घंटे में यहां हुई तेज बारिश
पिछले 24 घंटे के दौरान प्रदेश के कुछ हिस्सों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार दतिया के सेंवढ़ा में करीब 4 इंच और झाबुआ के शाहपुरा में करीब 3 इंच बारिश दर्ज हुई। वहीं भोपाल और सीहोर में भी बुधवार शाम बारिश का दौर देखने को मिला।
मानसून का कोटा अभी पूरा नहीं
मध्य प्रदेश में इस मानसून सीजन में अब तक औसतन 33.1 इंच बारिश दर्ज की गई है। सामान्य बारिश का आंकड़ा करीब 37.3 इंच है। यानी प्रदेश में सामान्य बारिश के मुकाबले लगभग 4.2 इंच की कमी बनी हुई है और अब तक सामान्य कोटे का करीब 88.7 प्रतिशत पानी ही गिरा है।प्रदेश के 23 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है, जबकि 32 जिले अभी भी सामान्य बारिश से पीछे हैं। इससे साफ है कि पूरे प्रदेश में बारिश का वितरण एक जैसा नहीं रहा है।
21 सितंबर के बाद फिर बढ़ सकती है बारिश
मौसम विभाग के अनुसार 21 सितंबर के बाद मौसम में एक बार फिर बदलाव देखने को मिल सकता है। चक्रवाती परिसंचरण और कम दबाव के क्षेत्र जैसी प्रणालियों की गतिविधि बढ़ने पर प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश तेज हो सकती है। सितंबर के आखिरी सप्ताह में बारिश का एक और दौर बनने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, इसकी तीव्रता और प्रभावित क्षेत्र मौसम प्रणाली के विकसित होने के बाद ही ज्यादा स्पष्ट होंगे।
जून की कम बारिश का असर अब भी
इस मानसून में जून की कम बारिश का असर पूरे सीजन के आंकड़ों पर दिखाई दे रहा है। जून में प्रदेश में सामान्य से करीब 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। इसके बाद जुलाई और अगस्त में बारिश की स्थिति में सुधार हुआ, लेकिन जून की कमी पूरी तरह भर नहीं सकी। सितंबर में हुई बारिश से कुल आंकड़े में सुधार आया है, लेकिन मानसून समाप्ति के करीब पहुंचने के बावजूद प्रदेश अभी सामान्य बारिश के आंकड़े से नीचे है।
30 सितंबर तक माना जाता है मानसूनी सीजन
मध्य प्रदेश में मानसूनी सीजन का आधिकारिक आंकड़ा 1 जून से 30 सितंबर तक की बारिश के आधार पर देखा जाता है। इसलिए सितंबर के आखिरी दिनों में होने वाली बारिश प्रदेश के मानसून आंकड़े के लिए महत्वपूर्ण रहेगी। आईएमडी के अनुसार मानसून की वापसी केवल तारीख के आधार पर तय नहीं होती, बल्कि बारिश की गतिविधि में लगातार कमी, नमी में कमी और वातावरण में बदलाव जैसे वैज्ञानिक संकेतों को भी देखा जाता है।
किसानों और आम लोगों के लिए क्या मतलब?
फिलहाल प्रदेश में बड़े स्तर पर भारी बारिश का अलर्ट नहीं होने से व्यापक राहत की स्थिति है, लेकिन गरज-चमक वाले स्थानीय मौसम को देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। खासकर खुले मैदान, पेड़ या बिजली के खंभों के पास खराब मौसम के दौरान खड़े होने से बचना चाहिए।
