Anmol Sandesh News Desk, नई दिल्ली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिपरिषद का दो दिवसीय ‘चिंतन शिविर’ बुधवार से शुरू हो गया है। नई दिल्ली स्थित सेवा तीर्थ में 23 और 24 सितंबर को होने वाले इस मंथन में सरकार के कामकाज, योजनाओं की प्रगति, शासन व्यवस्था और आने वाले समय की प्राथमिकताओं पर चर्चा होगी। बैठक का प्रमुख फोकस ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य के अनुरूप आगे की रणनीति तैयार करना बताया गया है।
मंत्रालयों के कामकाज और योजनाओं की होगी समीक्षा
चिंतन शिविर में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, मंत्रालयों के बीच बेहतर तालमेल, समय प्रबंधन, नीति निर्माण और जनसेवाओं से जुड़े विषयों पर मंथन किया जाएगा। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मंत्रियों के सामने उनके मंत्रालयों के कामकाज और अब तक की प्रगति का आकलन रखने की तैयारी है। इसके बाद भविष्य के लिए प्राथमिकताएं और सुधारों की दिशा तय की जा सकती है।
युवा, रोजगार और जेन-जी से जुड़ाव पर भी नजर
मंथन के संभावित विषयों में युवा और रोजगार जैसे मुद्दे अहम बताए जा रहे हैं। जेन-जी के साथ संवाद, युवाओं की प्राथमिकताएं और सरकार की नीतियों को लेकर उनकी अपेक्षाओं को समझने पर भी चर्चा होने की बात सामने आई है। इसके साथ ही शिक्षा और युवाओं से जुड़े मौजूदा मुद्दों पर सरकार की आगे की रणनीति पर विचार किया जा सकता है।

महिला आरक्षण और परिसीमन भी अहम मुद्दा
महिला आरक्षण को लागू करने से जुड़े विधायी कदम और परिसीमन का मुद्दा भी सरकार के एजेंडे में महत्वपूर्ण है। अप्रैल 2026 में केंद्र ने महिला आरक्षण और लोकसभा- विधानसभा सीटों के पुनर्समायोजन से जुड़े संवैधानिक संशोधन प्रस्तावों को आगे बढ़ाया था। प्रस्तावित व्यवस्था में 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन और लोकसभा की संख्या बढ़ाने का प्रावधान चर्चा में रहा है।
‘विकसित भारत 2047’ पर आगे का रोडमैप
चिंतन शिविर का व्यापक उद्देश्य 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य के लिए सरकार की योजनाओं और प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाना है। मंत्रालयों, विभागों और नीति-निर्माण से जुड़े इनपुट को एक साथ रखकर दीर्घकालिक रणनीति पर चर्चा की जा रही है। सरकारी कामकाज में सुधार और योजनाओं की बेहतर निगरानी पर भी जोर रहेगा।

2021 में भी हुए थे चिंतन शिविर
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में 2021 में भी केंद्रीय मंत्रियों के साथ कई चिंतन सत्र आयोजित किए गए थे। इन बैठकों में कामकाज की कार्यकुशलता, समय और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल, योजनाओं की निगरानी तथा शासन सुधार जैसे विषयों पर चर्चा हुई थी। मौजूदा शिविर को भी सरकार के कामकाज की समीक्षा और अगले चरण की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
क्या बनेगा मंत्रियों का ‘रिपोर्ट कार्ड’?
मीडिया रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा के आधार पर प्रदर्शन का आकलन किया जा सकता है। हालांकि, ग्रेडिंग को लेकर उपलब्ध सार्वजनिक आधिकारिक जानकारी में ‘एक्सीलेंट, गुड, एवरेज और पुअर’ जैसी श्रेणियों या इसे सीधे कैबिनेट विस्तार का आधार बनाए जाने की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इस हिस्से को फिलहाल सूत्रों/मीडिया रिपोर्टों के दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
