Anmol Sandesh News Desk, भोपाल
राजधानी भोपाल के नए मास्टर प्लान का लंबे समय से चला आ रहा इंतजार अब खत्म हो गया है। भोपाल विकास योजना-2047 के प्रारूप का प्रकाशन कर दिया गया है। करीब दो दशक बाद सामने आए इस ड्राफ्ट में भोपाल के भविष्य के विकास को प्राकृतिक संरक्षण, आधुनिक सुविधाओं, बेहतर कनेक्टिविटी, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने का खाका तैयार किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए योजना की जानकारी देते हुए कहा कि इसका उद्देश्य भोजताल, वन क्षेत्रों और बाघ भ्रमण क्षेत्र जैसी प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण के साथ नागरिकों को बेहतर सुविधाएं, सुगम मोबिलिटी और आर्थिक विकास के अवसर उपलब्ध कराना है।
1,016.90 वर्ग किमी में होगा भोपाल का विस्तार
नए विकास प्रारूप में करीब 1,016.90 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को शामिल किया गया है। इसमें 254 गांव भी आएंगे। योजना को वर्ष 2047 की संभावित जरूरतों और करीब 45 लाख आबादी को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इससे भोपाल का नियोजित विकास मौजूदा शहरी सीमा से आगे बढ़कर आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों तक विस्तारित होगा। आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक, परिवहन और हरित क्षेत्रों के लिए अलग-अलग प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं।
ग्रीन एरिया 16% से बढ़ाकर 27%
मास्टर प्लान की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक हरित क्षेत्र का विस्तार है। प्रस्तावित योजना में ग्रीन एरिया को मौजूदा करीब 16 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का प्रावधान बताया गया है। भोपाल की झीलों, वन क्षेत्रों, कैचमेंट और अन्य प्राकृतिक संवेदनशील क्षेत्रों को विकास के साथ संरक्षित रखने पर जोर दिया गया है। योजना का उद्देश्य शहर के विस्तार के साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना है।
51 किलोमीटर का ग्रोथ कॉरिडोर
प्रस्तावित मास्टर प्लान में करीब 51 किलोमीटर लंबे ग्रोथ कॉरिडोर का प्रावधान है। इसके जरिए आर्थिक गतिविधियों, रोजगार और नए विकास क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी देने की योजना है। ग्रोथ कॉरिडोर के आसपास भविष्य में व्यावसायिक और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की संभावना है। इससे भोपाल को महानगरीय विकास की दिशा में आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया है।
मिक्स्ड लैंड यूज और आधुनिक मोबिलिटी पर जोर
मास्टर प्लान में राज्य की टीओडी (ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट) नीति के अनुरूप मिश्रित भूमि उपयोग के प्रस्ताव शामिल किए गए हैं। इसका उद्देश्य परिवहन नेटवर्क और आसपास के विकास को आपस में जोड़ना है। मेट्रो सहित सार्वजनिक परिवहन के आसपास सुनियोजित विकास, बेहतर सड़क नेटवर्क और पार्किंग सुविधाओं पर भी जोर दिया गया है।
असीमित एफएआर और भवन ऊंचाई का प्रस्ताव
ड्राफ्ट में कुछ निर्धारित क्षेत्रों के लिए असीमित एफएआर और भवन ऊंचाई जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं। इसका उद्देश्य उन क्षेत्रों में भूमि का बेहतर और अधिक प्रभावी उपयोग करना है, जहां ऊंचे और सघन विकास की अनुमति नियोजन मानकों के अनुरूप दी जा सकती है। हालांकि, इन प्रावधानों का वास्तविक प्रभाव अंतिम स्वीकृत योजना और लागू होने वाले विकास नियमों के बाद ही स्पष्ट होगा।

अफोर्डेबल हाउसिंग को बढ़ावा
भोपाल के बढ़ते शहरी विस्तार को देखते हुए मास्टर प्लान में अफोर्डेबल हाउसिंग को प्रोत्साहित करने का प्रस्ताव भी रखा गया है। इसका मकसद विभिन्न आय वर्गों के लिए आवासीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नियोजित आवास विकास को बढ़ावा देना है।
हरित टीडीआर से जमीन मालिकों को राहत
योजना में ग्रीन टीडीआर (ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स) का प्रावधान खास तौर पर महत्वपूर्ण है। प्राकृतिक या हरित क्षेत्र के संरक्षण के कारण विकास से वंचित होने वाली भूमि के मालिकों को टीडीआर के माध्यम से क्षतिपूर्ति देने की व्यवस्था प्रस्तावित है। इसके साथ विकासकर्ताओं को टीडीआर के जरिए अतिरिक्त विकास अधिकार हासिल करने की सुविधा मिल सकती है। मुख्यमंत्री ने भी अपने संदेश में इस प्रावधान को योजना की प्रमुख विशेषताओं में शामिल किया है।
EKAI City भी प्रस्तावित
भोपाल विकास योजना-2047 में एजुकेशन, नॉलेज और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (EKAI) सिटी का प्रस्ताव भी शामिल है। इसका उद्देश्य शिक्षा, ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था, तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी गतिविधियों के लिए आधुनिक विकास क्षेत्र तैयार करना है। इससे भविष्य में नए रोजगार और निवेश के अवसर विकसित करने की योजना है।
क्रिएटिव री-डेवलपमेंट और पार्किंग पर फोकस
पुराने और विकसित शहरी क्षेत्रों के बेहतर उपयोग के लिए क्रिएटिव री-डेवलपमेंट का प्रावधान प्रस्तावित है। वहीं बढ़ती वाहनों की संख्या को देखते हुए पार्किंग को लेकर भी विशेष प्रावधान किए गए हैं। योजना में विकास मापदंडों को सरल और तर्कसंगत बनाने, निजी विकासकर्ताओं की भागीदारी बढ़ाने और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी को प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया गया है।
सेफ सिटी के प्रावधान
भोपाल को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप सुरक्षित शहर बनाने के लिए सेफ सिटी से जुड़े प्रावधान भी प्रस्तावित हैं। इसके तहत शहरी बुनियादी ढांचे, नागरिक सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था को विकास योजना के साथ जोड़ने की दिशा में प्रावधान किए गए हैं।
नागरिक दे सकेंगे आपत्ति और सुझाव
भोपाल विकास योजना-2047 फिलहाल प्रारूप है। प्रकाशित ड्राफ्ट पर नागरिकों और संबंधित पक्षों को आपत्ति एवं सुझाव प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाएगा। यानी अभी इसमें अंतिम रूप से बदलाव की गुंजाइश बनी हुई है। ड्राफ्ट पर प्राप्त सुझावों और आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही योजना का अंतिम स्वरूप सामने आएगा। सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बाद ड्राफ्ट प्रकाशित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी है और अंतिम प्रकाशन से पहले निर्धारित न्यायिक प्रक्रिया का भी पालन किया जाना है।
एक नजर में भोपाल मास्टर प्लान-2047
- प्लानिंग क्षेत्र: करीब 1,016.90 वर्ग किमी
- शामिल गांव: 254
- अनुमानित आबादी: करीब 45 लाख
- ग्रीन एरिया: करीब 27%
- ग्रोथ कॉरिडोर: करीब 51 किमी
- प्रमुख फोकस: प्राकृतिक संरक्षण, मोबिलिटी और आर्थिक विकास
- विशेष प्रावधान: ग्रीन टीडीआर, अफोर्डेबल हाउसिंग, टीओडी और री-डेवलपमेंट
- नई अवधारणा: EKAI सिटी
- नागरिकों के लिए: ड्राफ्ट पर आपत्ति और सुझाव का अवसर
भोपाल के लिए क्यों अहम है यह प्लान?
भोपाल का पिछला व्यापक विकास खाका काफी पुराना है और नए मास्टर प्लान की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। अब 2047 को लक्ष्य बनाकर तैयार किए गए इस प्रारूप में शहर के विस्तार के साथ पर्यावरण, ट्रांसपोर्ट, आवास, रोजगार और आर्थिक विकास को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया गया है। अंतिम योजना लागू होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि प्रस्तावित प्रावधान जमीन पर किस तरह लागू होते हैं।
