Tuesday, September 29, 2026
Homeअन्य राज्यShare Market में हाहाकार: सेंसेक्स 1,000 अंक से ज्यादा टूटा, निफ्टी 23...

Share Market में हाहाकार: सेंसेक्स 1,000 अंक से ज्यादा टूटा, निफ्टी 23 हजार के नीचे; निवेशकों के करीब ₹6 लाख करोड़ स्वाहा

Anmol Sandesh News Desk, नई दिल्ली

Stock Market Fall Today: भारतीय शेयर बाजार में सोमवार, 28 सितंबर को जोरदार गिरावट देखने को मिली। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन बाजार खुलते ही बिकवाली का दबाव बढ़ गया और BSE सेंसेक्स 1,000 से ज्यादा अंक फिसल गया, जबकि निफ्टी 23,000 के स्तर के नीचे पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में लगभग सभी प्रमुख सेक्टरों में दबाव देखने को मिला। इस गिरावट का सीधा असर निवेशकों की संपत्ति पर पड़ा। सुबह करीब 10:40 बजे तक BSE में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप लगभग ₹6 लाख करोड़ घटकर करीब ₹476 लाख करोड़ रह गया था। बाजार में दबाव की प्रमुख वजहों में पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली शामिल रही।

सेंसेक्स-निफ्टी में तेज गिरावट

कारोबार के शुरुआती दौर में सेंसेक्स करीब 1,000 अंक टूटकर 72,900 के आसपास आ गया था। वहीं निफ्टी 50 करीब 305 अंक नीचे 22,835 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बाजार के 30 सेंसेक्स शेयरों में शुरुआती समय में कोई भी शेयर बढ़त में नहीं था। बाद में दिन के कारोबार में गिरावट और बढ़ी। सोमवार को सेंसेक्स 72,771.72 अंक पर बंद हुआ, जो 1,124 अंक यानी 1.52% की गिरावट है। निफ्टी 50 भी 1.56% गिरकर 22,780.25 पर बंद हुआ।

US-Iran तनाव का बाजार पर असर

बाजार में इस गिरावट की बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और शांति वार्ता में गतिरोध को माना जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की ओर से लड़ाई खत्म करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के प्रस्ताव को खारिज किया। इसके बाद बाजार में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने की चिंता दिखाई दी। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इसके आसपास तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई। सोमवार को ब्रेंट क्रूड करीब 2-3% बढ़कर 106 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया।

महंगा क्रूड भारत के लिए क्यों चिंता?

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमत बढ़ने से देश का इंपोर्ट बिल और महंगाई का दबाव बढ़ सकता है, जबकि कंपनियों की लागत और मुनाफे पर भी असर पड़ सकता है। यही वजह है कि कच्चे तेल में तेजी का असर भारतीय शेयर बाजार के सेंटीमेंट पर भी दिखाई देता है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव

बाजार में पहले से ही विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव बना हुआ है। इसके साथ ही भारतीय शेयर बाजार लगातार कई सप्ताह से कमजोरी का सामना कर रहा था। Reuters के मुताबिक, 28 सितंबर तक भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स लगातार सातवें सप्ताह गिरावट की ओर बढ़ रहे थे और बाजार करीब छह महीने के निचले स्तरों के आसपास पहुंच गया था। इसके अलावा अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और रुपये से जुड़ी चिंता ने भी निवेशकों की धारणा पर दबाव डाला। बाजार में अनिश्चितता बढ़ने पर निवेशकों ने जोखिम वाले शेयरों में बिकवाली बढ़ाई।

आगे बाजार की नजर किन संकेतों पर?

अब निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिका-ईरान तनाव, वैश्विक बाजारों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और रुपये की चाल पर रहेगी। इन संकेतकों में आगे होने वाला बदलाव भारतीय बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकता है।

 

Kanchan Sharma
Kanchan Sharma
कंचन शर्मा वर्तमान में दैनिक समाचार पत्र "अनमोल संदेश" में कार्यरत। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया,प्रिंट, न्यूज एजेंसी और डिजिटल पत्रकारिता में उनका लंबा अनुभव है, जिसमें उन्होंने रिपोर्टर और डेस्क पर विभिन्न भूमिकाओं में काम किया है।
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular