Anmol Sandesh News Desk, नई दिल्ली
मध्यप्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सामने आया है। यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में मध्यप्रदेश के चार नए ऐतिहासिक स्थलों को शामिल किया गया है। इनमें धार की बाघ गुफाएं, सीहोर का गिन्नौरगढ़ किला, मुरैना के बटेश्वर-पदावली-ककनमठ मंदिर समूह और विदिशा की उदयगिरि गुफाएं शामिल हैं। चारों स्थलों के प्रस्ताव 8 जुलाई 2026 को यूनेस्को को सौंपे गए थे। यूनेस्को की 3 सितंबर 2026 को अपडेट की गई सूची के अनुसार भारत की टेंटेटिव लिस्ट में अब 78 स्थल शामिल हैं। हालांकि, टेंटेटिव लिस्ट में शामिल होना अंतिम रूप से यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित होना नहीं है। यह आगे की नामांकन प्रक्रिया की दिशा में एक महत्वपूर्ण चरण है।
1. बाघ गुफाएं: चट्टानों पर उकेरी गई बौद्ध विरासत
धार जिले में बाघनी नदी के किनारे विंध्य क्षेत्र में स्थित बाघ गुफाएं अपनी प्राचीन वास्तुकला और भित्ति चित्रों के लिए प्रसिद्ध हैं। यूनेस्को के अनुसार यहां 9 रॉक-कट बौद्ध गुफाओं का समूह है, जिनका विकास लगभग चौथी से छठी शताब्दी ईस्वी के बीच हुआ। इन गुफाओं में चैत्यगृह, विहार, स्तंभयुक्त बरामदे और धार्मिक संरचनाओं के अवशेष मिलते हैं। इनमें गुफा संख्या 4 को ‘रंग महल’ के नाम से जाना जाता है और यह गुफा अपने स्थापत्य और कलात्मक विशेषताओं के कारण खास महत्व रखती है। बाघ की गुफाओं के भित्तिचित्रों में राजदरबार, जुलूस, नर्तक, संगीतकार और तत्कालीन सामाजिक जीवन से जुड़े दृश्य दिखाई देते हैं। यूनेस्को ने इन्हें भारत की प्राचीन बौद्ध भित्तिचित्र परंपरा के महत्वपूर्ण जीवित उदाहरणों में शामिल किया है।
2. गिन्नौरगढ़ किला: गोंड शासकों की ऐतिहासिक राजधानी
सीहोर जिले में रातापानी वन्यजीव अभयारण्य के क्षेत्र में स्थित गिन्नौरगढ़ किला गोंड इतिहास और स्थापत्य का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। यूनेस्को के अनुसार यह राज गोंड शासकों की एक प्रमुख किलेबंद राजधानी थी। किले की संरचना में प्राकृतिक पहाड़ी भू-भाग, खड़ी ढलानों, घाटियों और घने जंगलों को सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा बनाया गया था। किले में किलेबंदी की दीवारें, बुर्ज, प्रवेश द्वार, महल, बावड़ियां और जलाशय जैसी संरचनाएं मिलती हैं। यूनेस्को के दस्तावेज के मुताबिक यहां ऐतिहासिक रूप से 65 बावड़ियों और 4 झीलों वाली जल प्रबंधन व्यवस्था का उल्लेख मिलता है। यह व्यवस्था लंबे समय तक किले में रहने वाले लोगों के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण थी।
3. बटेश्वर-पदावली-ककनमठ: चंबल की अद्भुत मंदिर विरासत
मुरैना जिले की ऐतिहासिक धरोहरों में बटेश्वर, पदावली और ककनमठ का विशेष स्थान है। यूनेस्को ने इन तीनों को ‘ग्रुप ऑफ टेंपल्स ऑफ द चंबल वैली’ के रूप में टेंटेटिव लिस्ट में शामिल किया है। बटेश्वर मंदिर समूह में बड़ी संख्या में प्राचीन मंदिर हैं। यहां की स्थापत्य शैली और मंदिरों की संरचना मध्य भारत की प्राचीन मंदिर परंपरा को दर्शाती है। वहीं पदावली अपने प्राचीन मंदिर और किले जैसी संरचना के लिए जानी जाती है। यहां मंदिर की दीवारों और वास्तुशिल्प में दिखाई देने वाली बारीक नक्काशी इसे खास बनाती है। ककनमठ मंदिर भी अपनी विशाल पत्थर की संरचना और स्थापत्य तकनीक के कारण आकर्षण का केंद्र है। तीनों स्थलों को एक साथ शामिल किया जाना चंबल क्षेत्र की धार्मिक, स्थापत्य और ऐतिहासिक विरासत को एक व्यापक रूप में सामने लाता है।
4. उदयगिरि गुफाएं: गुप्तकालीन कला और धार्मिक विरासत
विदिशा जिले में स्थित उदयगिरि गुफाएं भारतीय कला और स्थापत्य इतिहास के बेहद महत्वपूर्ण स्थलों में शामिल हैं। यूनेस्को के अनुसार यहां लगभग 20 उत्खनित गुफाएं, मूर्तिकला पैनल, शिलालेख और प्राचीन धार्मिक गतिविधियों से जुड़े अवशेष मौजूद हैं। इस स्थल का विकास मुख्य रूप से गुप्तकाल में चौथी और पांचवीं शताब्दी ईस्वी के दौरान हुआ। यहां की गुफाओं और मूर्तियों में प्राचीन हिंदू धार्मिक परंपराओं से जुड़े महत्वपूर्ण प्रमाण मिलते हैं। उदयगिरि की सबसे चर्चित कलाकृतियों में विशाल वराह प्रतिमा शामिल है। यह गुप्तकालीन मूर्तिकला की उत्कृष्ट परंपरा को समझने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। यूनेस्को के अनुसार उदयगिरि उस दौर को समझने में मदद करता है जब भारतीय धार्मिक वास्तुकला और पवित्र स्थलों की औपचारिक संरचना विकसित हो रही थी।
टेंटेटिव लिस्ट में शामिल होने का क्या मतलब?
यूनेस्को की Tentative List उन स्थलों की सूची होती है, जिन्हें संबंधित देश भविष्य में विश्व धरोहर सूची के लिए नामांकित करने पर विचार करता है। इसलिए टेंटेटिव लिस्ट में शामिल होना World Heritage Site का अंतिम दर्जा नहीं, बल्कि उस दिशा में आगे बढ़ने का एक महत्वपूर्ण चरण है। भारत की टेंटेटिव लिस्ट में मध्यप्रदेश के कई अन्य स्थल भी पहले से शामिल हैं, जिनमें मांडू, ग्वालियर किला, भोजपुर का भोजेश्वर महादेव मंदिर, ओरछा और धामनार जैसे स्थल शामिल हैं।
MP की विरासत को मिली नई अंतरराष्ट्रीय पहचान
बाघ की गुफाओं की भित्तिचित्र कला, गिन्नौरगढ़ की गोंड स्थापत्य परंपरा, चंबल के मंदिर समूह और उदयगिरि की गुप्तकालीन मूर्तिकला—ये चारों स्थल मध्यप्रदेश की विरासत के अलग-अलग पहलुओं को सामने लाते हैं।
