Anmol Sandesh News Desk, लखनऊ
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपने पत्ते खोल दिए हैं। भाजपा ने सोमवार को राज्यसभा की 10 सीटों के लिए अपने 8 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया। खास बात यह है कि पार्टी ने सभी सीटों पर नए चेहरों को मौका दिया है। सूची में दो महिला उम्मीदवार भी शामिल हैं। भाजपा की इस सूची में धर्मपाल सिंह, प्रकाश पाल, श्रुति गंगवार, विद्यासागर सोनकर, प्रियंका रावत, राम प्रताप सिंह चौहान, राधाकांत ओझा और गोपी कृष्ण पांडेय के नाम शामिल हैं। पार्टी के इस फैसले को आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण साधने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
हरदीप पुरी और बीएल वर्मा को नहीं मिला टिकट
भाजपा की नई सूची में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और राज्य मंत्री बीएल वर्मा का नाम नहीं है। दोनों का मौजूदा राज्यसभा कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त होने वाला है। हरदीप सिंह पुरी पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हैं, जबकि बीएल वर्मा केंद्र में राज्य मंत्री हैं। राज्यसभा के लिए इस बार उन्हें यूपी से टिकट नहीं मिलने के बाद उनके भविष्य को लेकर राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि, केवल राज्यसभा टिकट न मिलने के आधार पर केंद्रीय मंत्रिमंडल से उनकी विदाई को तय नहीं माना जा सकता। भाजपा के मौजूदा राज्यसभा सदस्यों नीरज शेखर, सीमा द्विवेदी, बृजलाल, गीता शाक्य और अरुण सिंह को भी इस सूची में जगह नहीं मिली है।
सामाजिक समीकरण पर BJP का फोकस
भाजपा के घोषित 8 उम्मीदवारों में अलग-अलग सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश दिखाई देती है। दिए गए सामाजिक वर्गीकरण के अनुसार पार्टी ने दो ब्राह्मण, एक ठाकुर, तीन पिछड़े और दो दलित उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। पिछड़े वर्ग से लोधी, कुर्मी और पाल समाज को प्रतिनिधित्व दिया गया है। वहीं दलित वर्ग से खटीक और पासी समाज के उम्मीदवार शामिल हैं। सूची में धर्मपाल सिंह को लोधी, प्रकाश पाल को पाल और श्रुति गंगवार को कुर्मी समाज से बताया गया है। विद्यासागर सोनकर खटीक और प्रियंका रावत पासी समाज से हैं। राम प्रताप सिंह चौहान ठाकुर समाज से, जबकि राधाकांत ओझा और गोपी कृष्ण पांडेय ब्राह्मण समाज से बताए गए हैं।
ब्राह्मण और पिछड़ा समीकरण पर नजर
भाजपा की सूची के बाद राजनीतिक हलकों में इसके सामाजिक समीकरण को लेकर चर्चा तेज हो गई है। पार्टी ने पिछड़े वर्ग में अपने पारंपरिक माने जाने वाले लोधी, पाल और कुर्मी समाज से उम्मीदवार उतारे हैं। इसके साथ ही ब्राह्मण समाज से दो उम्मीदवारों को टिकट दिया गया है। वहीं ठाकुर समाज से एक उम्मीदवार को जगह मिली है। मौजूदा राज्यसभा सदस्यों नीरज शेखर और अरुण सिंह को टिकट नहीं दिया गया है। हालांकि, भाजपा ने उम्मीदवार चयन को लेकर कोई ऐसा आधिकारिक कारण नहीं बताया है, इसलिए सामाजिक समीकरण से जुड़े निष्कर्षों को राजनीतिक विश्लेषण के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
यूपी में 10 राज्यसभा सीटों पर चुनाव
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की कुल 31 सीटें हैं। इनमें से 10 सीटों के लिए चुनाव होना है। चुनाव कार्यक्रम के मुताबिक 16 अक्टूबर को मतदान प्रस्तावित है, जबकि 6 अक्टूबर नामांकन की आखिरी तारीख है। समाजवादी पार्टी की ओर से प्रोफेसर रामगोपाल यादव और उद्योगपति धनराज परिमल नथवानी पहले ही नामांकन दाखिल कर चुके हैं। अगर भाजपा अपने 8 और सपा अपने 2 उम्मीदवारों तक ही सीमित रहती है और कोई अन्य प्रत्याशी मैदान में नहीं आता, तो सभी 10 उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने की स्थिति बन सकती है।
चुनाव हुआ तो क्या होगा वोटों का गणित?
उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक फिलहाल 7 सीटें खाली होने के कारण 396 विधायक हैं। राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए आवश्यक प्रथम वरीयता मतों की गणना के आधार पर एक उम्मीदवार के लिए करीब 37 वोटों का कोटा बनता है। ऐसे में भाजपा के पास अपने 8 उम्मीदवारों को जिताने के लिए पर्याप्त संख्या में विधायक हैं। वहीं समाजवादी पार्टी भी अपने दो उम्मीदवारों को निर्वाचित कराने की स्थिति में है। लेकिन यदि कोई अतिरिक्त उम्मीदवार मैदान में आता है, तो चुनाव का गणित बदल सकता है। ऐसी स्थिति में प्रथम वरीयता के साथ-साथ दूसरी और तीसरी वरीयता के वोट भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं। राज्यसभा चुनाव में विधायकों को वरीयता क्रम के अनुसार मतदान करना होता है। इसलिए यदि मुकाबला होता है तो राजनीतिक दल अपने विधायकों को मतदान प्रक्रिया और वरीयता क्रम को लेकर प्रशिक्षण भी देते हैं।
सपा के तीसरे उम्मीदवार की एंट्री से बदल सकता है समीकरण
समाजवादी पार्टी के पास विधानसभा में करीब 100 विधायक होने का दावा किया गया है। यदि पार्टी तीसरा उम्मीदवार उतारती है तो उसे अतिरिक्त वोटों की जरूरत पड़ेगी। ऐसी स्थिति में भाजपा के 8वें उम्मीदवार को भी अतिरिक्त वोट जुटाने की आवश्यकता हो सकती है। इसके साथ ही क्रॉस-वोटिंग की संभावना और दूसरी-तीसरी वरीयता के वोट चुनाव को रोचक बना सकते हैं। हालांकि, अंतिम तस्वीर नामांकन प्रक्रिया पूरी होने और प्रत्याशियों की संख्या स्पष्ट होने के बाद ही सामने आएगी।
कौन हैं सपा के धनराज परिमल नथवानी?
सपा के राज्यसभा उम्मीदवार धनराज परिमल नथवानी उद्योग जगत से जुड़े हैं। उन्हें रिलायंस इंडस्ट्रीज समूह के ग्रुप प्रेसिडेंट के तौर पर जाना जाता है और गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन से भी उनका जुड़ाव रहा है। उनके पिता परिमल नथवानी भी राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। धनराज नथवानी के नामांकन के बाद सपा की रणनीति में उद्योग जगत से जुड़े चेहरे को प्रतिनिधित्व देने की चर्चा भी शुरू हुई है।
रामगोपाल यादव फिर राज्यसभा की दौड़ में
सपा के दूसरे उम्मीदवार प्रोफेसर रामगोपाल यादव पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं। वह समाजवादी पार्टी के प्रमुख महासचिव हैं और पार्टी के संस्थापक परिवार से आते हैं। रामगोपाल यादव लंबे समय से राज्यसभा में सपा का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं। वह एक बार लोकसभा सांसद भी रह चुके हैं। इस बार उन्हें दोबारा राज्यसभा भेजने का फैसला सपा की ओर से वरिष्ठ नेतृत्व पर भरोसे के तौर पर देखा जा रहा है।
अब सबकी नजर 6 अक्टूबर पर
भाजपा के 8 उम्मीदवारों के ऐलान के बाद अब सभी की नजर 6 अक्टूबर की नामांकन की अंतिम तारीख पर है। अगर भाजपा 9वां और सपा तीसरा उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारती हैं, तो राज्यसभा की इन 10 सीटों पर चुनाव के बजाय निर्विरोध निर्वाचन की स्थिति बन सकती है। लेकिन अतिरिक्त उम्मीदवार आने पर मतदान तय होगा और उस स्थिति में यूपी विधानसभा में मौजूद विधायकों का आंकड़ा, प्रथम वरीयता के वोट, दूसरी-तीसरी वरीयता और संभावित क्रॉस-वोटिंग महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
