Saturday, October 10, 2026
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अमेरिका में डीजल महंगा, ट्रम्प ने रूस से खरीद की छूट दी: जेलेंस्की ने जताई नाराजगी, भारत पर 100% टैरिफ की धमकी भी चर्चा में

Anmol Sandesh News Desk,वॉशिंगटन डीसी |

अमेरिका में ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस से डीजल खरीदने पर लगी रोक में अस्थायी छूट देने का फैसला किया है। यह छूट 7 अप्रैल 2027 तक लागू रहेगी। ईरान युद्ध के बाद बढ़ी ऊर्जा कीमतों को नियंत्रित करने और बाजार में आपूर्ति बढ़ाने के प्रयासों के बीच उठाए गए इस कदम ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने इस फैसले की आलोचना करते हुए आशंका जताई है कि रूस को मिलने वाले राजस्व का इस्तेमाल यूक्रेन के खिलाफ जारी युद्ध में किया जा सकता है।

इस फैसले की चर्चा इसलिए भी अहम है, क्योंकि ट्रम्प प्रशासन ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने की संभावना जताई है। भारत और चीन जैसे देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का कानूनी विकल्प भी चर्चा में है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ अपने आप लागू हो गया है।

अमेरिका में डीजल की कीमतों ने बढ़ाई ट्रम्प की चिंता

ईरान युद्ध के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ी है। अमेरिका में डीजल की कीमत करीब 6.28 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंचने की बात सामने आई है, जबकि युद्ध से पहले यह लगभग 3.70 डॉलर प्रति गैलन थी। डीजल की महंगाई का असर ट्रक परिवहन, कृषि, माल ढुलाई और अन्य कारोबारों पर पड़ सकता है, जिसका असर आम उपभोक्ताओं तक भी पहुंच सकता है।

अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले ईंधन की कीमतें ट्रम्प प्रशासन के लिए राजनीतिक चुनौती भी हैं। ऐसे में प्रशासन आपूर्ति बढ़ाने और ऊर्जा लागत कम करने के उपायों पर जोर दे रहा है। ट्रम्प ने कहा है कि कम कीमतें, खासकर किसानों, पशुपालकों और ट्रक चालकों के लिए, उनकी प्राथमिकताओं में शामिल हैं।

ट्रम्प का दावा—रूस से चरणबद्ध तरीके से आएगा डीजल

ट्रम्प के मुताबिक, रूस तत्काल 3 लाख टन से अधिक डीजल की आपूर्ति करेगा। इसके बाद नवंबर में 5 लाख टन और आगे 10 लाख टन डीजल भेजे जाने की बात कही गई है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि परिस्थितियां अनुकूल रहने और रिफाइनरियों की क्षमता के अनुसार भविष्य में आपूर्ति 30 लाख टन तक पहुंच सकती है।

व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रम्प ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का धन्यवाद किया। उनका तर्क है कि ऊर्जा आपूर्ति बढ़ने से कीमतों पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इन घोषणाओं का अमेरिकी बाजार में डीजल की कीमतों पर कितना और कब तक असर पड़ेगा, यह वास्तविक आपूर्ति तथा वैश्विक मांग पर निर्भर करेगा।

जेलेंस्की का विरोध—रूस को मिलेगा युद्ध जारी रखने का पैसा

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रूस से डीजल खरीदने के फैसले पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि रूस को ऊर्जा कारोबार से मिलने वाला पैसा उसकी युद्ध लड़ने की क्षमता बढ़ा सकता है। जेलेंस्की ने आशंका जताई कि इस तरह के फैसले से रूस को युद्ध लंबा खींचने और यूक्रेन पर हमले जारी रखने में मदद मिल सकती है।

यह बयान ऐसे समय आया, जब यूक्रेन के वार्ताकार युद्ध समाप्त करने के प्रयासों के तहत अमेरिका के फ्लोरिडा में अधिकारियों से बातचीत कर रहे थे। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि ऊर्जा कीमतों को कम करने की जरूरत और रूस पर आर्थिक दबाव बनाए रखने की नीति के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।

भारत पर 100% टैरिफ की चर्चा क्यों?

रूस से डीजल खरीदने के अमेरिकी फैसले के बीच भारत और चीन पर टैरिफ की चर्चा ने भी ध्यान खींचा है। रिपोर्टों के अनुसार, ट्रम्प ने ऐसे कानून पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत रूस से तेल या अन्य ऊर्जा उत्पाद खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार इस्तेमाल किया जा सकता है।

यहां महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है: 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने का विकल्प होना और भारत पर वास्तव में ऐसा टैरिफ लागू हो जाना अलग-अलग बातें हैं। किसी देश पर कार्रवाई की स्थिति में संबंधित कानूनी प्रक्रिया और अमेरिकी प्रशासन के फैसले अहम होंगे। इसलिए फिलहाल इसे भारत पर स्वतः लागू हो चुका टैरिफ बताना सही नहीं होगा।

भारत के लिए यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि रूस से कच्चे तेल की खरीद देश की ऊर्जा जरूरतों, आयात लागत और अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधों से जुड़ी है। अमेरिका की भविष्य की नीतियां भारत के निर्यातकों और दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों पर असर डाल सकती हैं।

विशेषज्ञों को कीमतों में बड़ी गिरावट की उम्मीद नहीं

ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, रूस से डीजल खरीदने की अनुमति मिलने भर से अमेरिकी बाजार में कीमतों में बड़ी गिरावट की गारंटी नहीं है। वैश्विक तेल आपूर्ति, रिफाइनिंग क्षमता, परिवहन लागत और ईरान युद्ध से पैदा हुई अनिश्चितता भी कीमतें तय करने में अहम भूमिका निभाती हैं।

विशेषज्ञों का तर्क है कि यदि अमेरिका रूस से अतिरिक्त डीजल खरीदता है, तो रूस के मौजूदा ग्राहक दूसरे आपूर्तिकर्ताओं की ओर रुख कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में वैश्विक बाजार में आपूर्ति का पुनर्वितरण तो होगा, लेकिन कुल उपलब्ध ईंधन में उतनी वृद्धि जरूरी नहीं कि हो। इससे कीमतों पर प्रभाव सीमित रह सकता है।

ईरान युद्ध, होर्मुज जलडमरूमध्य और तेल बाजार पर नजर

ट्रम्प ने कहा है कि ईरान के साथ युद्ध समाप्त होने पर तेल की कीमतों में तेजी से गिरावट आ सकती है। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही को लेकर भी दावा किया कि वहां से युद्ध शुरू होने से पहले की तुलना में अधिक तेल गुजर रहा है। साथ ही, उन्होंने तेल रिफाइनरियों और खुदरा विक्रेताओं से पेट्रोल-डीजल की कीमतें तुरंत कम करने की अपील की।

होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने या जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में कीमतों और आपूर्ति पर असर पड़ सकता है। हालांकि, इस मार्ग पर नियंत्रण और तेल प्रवाह से जुड़े ट्रम्प के बयानों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित तथ्यों से अलग समझना जरूरी है।

आगे क्या होगा?

ट्रम्प प्रशासन का कदम फिलहाल अमेरिकी ईंधन आपूर्ति बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। लेकिन इसके वास्तविक नतीजे इस बात पर निर्भर करेंगे कि रूस से घोषित मात्रा में डीजल कब और कितना पहुंचता है, वैश्विक बाजार की स्थिति कैसी रहती है और ईरान युद्ध का क्या रुख होता है।

दूसरी ओर, जेलेंस्की की आलोचना से साफ है कि ऊर्जा कारोबार और रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच संबंध अंतरराष्ट्रीय राजनीति का संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है। भारत के लिए भी अमेरिका की टैरिफ नीति पर नजर रखना जरूरी होगा, लेकिन किसी संभावित कार्रवाई को लागू हो चुके फैसले के रूप में पेश करने से बचना चाहिए।

 

Kanchan Sharma
Kanchan Sharma
कंचन शर्मा वर्तमान में दैनिक समाचार पत्र "अनमोल संदेश" में कार्यरत। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया,प्रिंट, न्यूज एजेंसी और डिजिटल पत्रकारिता में उनका लंबा अनुभव है, जिसमें उन्होंने रिपोर्टर और डेस्क पर विभिन्न भूमिकाओं में काम किया है।
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