Anmol Sandesh News Desk, नई दिल्ली
कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को चुनौती देने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हो सकी। सोमवार, 12 अक्टूबर को राहुल गांधी और विपक्षी गठबंधन के अन्य नेताओं की ओर से दाखिल इस याचिका में सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने 14 खामियां दर्ज की हैं। इनमें कोर्ट फीस के 220 रुपये कम होना, नौ याचिकाकर्ताओं के वकालतनामे से जुड़े दस्तावेजों की कमी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पहचान पत्र की अस्पष्ट प्रति जैसे मुद्दे शामिल हैं। यह याचिका चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर दाखिल की गई थी। विपक्षी नेताओं ने SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने, मतदाता सूची में किए गए बदलावों की स्वतंत्र जांच कराने और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की है। फिलहाल, रजिस्ट्री की आपत्तियों के कारण याचिका सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हो पाई है।
क्या हैं याचिका में मिलीं 14 खामियां?
सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने याचिका की प्रारंभिक जांच के दौरान कुल 14 प्रक्रियागत खामियां दर्ज की हैं। इनमें कुछ दस्तावेजों का अधूरा या अस्पष्ट होना, वकालतनामे से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी नहीं होना और कोर्ट फीस में कमी शामिल है।
प्रमुख आपत्तियां इस प्रकार हैं:
- कोर्ट फीस में कमी: याचिका के साथ निर्धारित कोर्ट फीस में 220 रुपये कम पाए गए।
- वकालतनामे से जुड़ी कमी: नौ याचिकाकर्ताओं के आवश्यक प्राधिकरण दस्तावेजों में हस्ताक्षर या संबंधित औपचारिकताएं पूरी नहीं थीं।
- मल्लिकार्जुन खड़गे के पहचान पत्र की प्रति: रजिस्ट्री ने स्पष्ट और पढ़ने योग्य पहचान पत्र की प्रति मांगी।
- दस्तावेजों के पन्नों में कमी: याचिका के साथ लगाए गए कुछ दस्तावेजों में पन्नों के गायब होने या अस्पष्ट होने की आपत्ति सामने आई।
- चुनाव आयुक्तों को प्रतिवादी बनाने पर सवाल: रजिस्ट्री ने व्यक्तिगत रूप से चुनाव आयुक्तों को प्रतिवादी बनाने के आधार पर स्पष्टीकरण मांगा।
ये रजिस्ट्री की प्रक्रियागत आपत्तियां हैं। इनका अर्थ यह नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट ने याचिका में लगाए गए आरोपों को गलत ठहरा दिया है या मामले के गुण-दोष पर कोई फैसला सुना दिया है।
किन नेताओं के वकालतनामे में मिली कमी?
याचिका में राहुल गांधी के साथ विपक्ष के कई प्रमुख नेताओं के नाम शामिल हैं। रजिस्ट्री की आपत्तियों के अनुसार, नौ नेताओं के वकालतनामे से संबंधित आवश्यक हस्ताक्षर या प्राधिकरण दस्तावेजों की कमी सामने आई। इन नेताओं में सौगत रॉय, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, संजय राउत, एम. ए. बेबी, डी. राजा, महुआ माझी, सुप्रिया सुले और ई. टी. मोहम्मद बशीर के नाम शामिल हैं। वकालतनामा एक कानूनी दस्तावेज होता है, जिसके माध्यम से याचिकाकर्ता अपने मामले में वकील को अदालत में पैरवी करने का अधिकार देता है। यदि यह दस्तावेज आवश्यक हस्ताक्षरों या अन्य औपचारिकताओं के बिना दाखिल होता है, तो रजिस्ट्री उसे दुरुस्त करने के लिए कह सकती है। इस मामले में भी वकालतनामे से जुड़ी आपत्तियों को दूर करना याचिका की आगे की प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण है।
मल्लिकार्जुन खड़गे के पहचान पत्र पर भी आपत्ति
रजिस्ट्री ने कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पहचान पत्र की स्पष्ट प्रति उपलब्ध कराने को कहा है। पहचान पत्र की प्रति पढ़ने योग्य नहीं होने के कारण इस संबंध में आपत्ति दर्ज की गई। इसके अतिरिक्त, याचिका के समर्थन में प्रस्तुत दस्तावेजों को लेकर भी कुछ कमियां बताई गई हैं। इनमें 24 जून 2025 के फैसले से संबंधित दस्तावेज और SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के आरोपों के समर्थन में मांगी गई सामग्री शामिल है। रजिस्ट्री ने संबंधित दस्तावेजों की सॉफ्ट कॉपी उपलब्ध कराने की आवश्यकता भी बताई है, ताकि दाखिल सामग्री की जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा सके।
अनुच्छेद 32 के तहत दाखिल की गई याचिका
राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं की ओर से यह याचिका संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दाखिल की गई है। यह अनुच्छेद मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए सीधे सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार देता है। याचिका में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान कथित अनियमितताओं और मतदाताओं के नाम हटाए जाने से जुड़े मुद्दे उठाए गए हैं। विपक्षी नेताओं ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगों में मतदाता सूची में किए गए बदलावों का स्वतंत्र ऑडिट, संबंधित रिकॉर्ड की जांच और मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया में उचित सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करना शामिल है। हालांकि, याचिका में लगाए गए आरोपों और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाए गए सवालों की न्यायिक जांच अभी बाकी है।
आखिर सुनवाई के लिए क्यों नहीं सूचीबद्ध हुई याचिका?
सुप्रीम कोर्ट में किसी याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने से पहले रजिस्ट्री उसके दस्तावेजों और निर्धारित प्रक्रियाओं की जांच करती है। यदि आवश्यक दस्तावेज अधूरे हों, हस्ताक्षर या प्राधिकरण संबंधी औपचारिकताएं पूरी न हों अथवा कोर्ट फीस में कमी हो, तो रजिस्ट्री आपत्तियां दर्ज कर सकती है। ऐसी स्थिति में याचिकाकर्ता के वकील को बताई गई खामियां दूर करनी होती हैं। इसके बाद याचिका की आगे की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। राहुल गांधी की याचिका के मामले में भी रजिस्ट्री की आपत्तियां दूर किए जाने के बाद ही सुनवाई के लिए सूचीबद्ध होने का रास्ता साफ हो सकता है। याचिका का सूचीबद्ध न होना उसे खारिज किए जाने के समान नहीं है।
अब आगे क्या होगा?
राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं की कानूनी टीम के सामने अब रजिस्ट्री की आपत्तियों को दूर करने की प्रक्रिया पूरी करना महत्वपूर्ण है। इसके लिए आवश्यक हस्ताक्षर और प्राधिकरण दस्तावेज उपलब्ध कराने, पहचान पत्र की स्पष्ट प्रति जमा करने, दस्तावेजों की कमियां सुधारने और कोर्ट फीस की कमी पूरी करने जैसे कदम उठाने होंगे। इसके बाद याचिका की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध होने की संभावना आगे बढ़ सकती है। हालांकि, सुनवाई की तारीख और मामले में आगे होने वाली कार्रवाई अदालत की प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
