Anmol Sandesh News Desk, इंदौर
Indore Water Crisis 2026: मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में इस साल सामान्य से काफी कम बारिश होने के कारण आने वाले महीनों में जलसंकट की आशंका बढ़ गई है। मानसून के दौरान करीब 14 इंच कम बारिश दर्ज होने का असर शहर के प्रमुख जलस्रोतों यशवंत सागर और बिलावली तालाब पर दिखाई दे रहा है। दोनों जलस्रोत पूरी क्षमता तक नहीं भर पाए हैं। ऐसे में गर्मियों में पेयजल आपूर्ति प्रभावित न हो, इसके लिए नगर निगम ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं।
नगर निगम की योजना के तहत नवंबर से अप्रैल के बीच यशवंत सागर और बिलावली तालाब को नर्मदा के पानी से दो बार भरने की तैयारी है। इसके अलावा नए बोरिंग पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव, पानी के टैंकरों की संख्या बढ़ाने, पाइपलाइन लीकेज रोकने और जल संरक्षण पर जोर देने की योजना भी बनाई जा रही है।
सामान्य से 14 इंच कम बारिश, जलस्रोतों पर असर
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इंदौर में इस मानसून सीजन में करीब 23 इंच बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य बारिश से लगभग 14 इंच कम है। कम बारिश के कारण शहर के जलस्रोतों में पर्याप्त पानी जमा नहीं हो पाया। इसका असर आगामी गर्मियों में पेयजल व्यवस्था पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
यशवंत सागर शहर की जलापूर्ति व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसकी अधिकतम जलस्तर क्षमता करीब 19 फीट बताई गई है, लेकिन इस बार तालाब पूरी क्षमता तक नहीं भर सका। इससे दिसंबर और जनवरी से ही कुछ क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ सकती है। हालांकि, वास्तविक स्थिति जलस्रोतों के मौजूदा जलस्तर और आगे होने वाली बारिश पर निर्भर करेगी।
नर्मदा के पानी से दो बार भरे जाएंगे यशवंत सागर और बिलावली
संभावित जलसंकट से निपटने के लिए नगर निगम ने यशवंत सागर और बिलावली तालाब को नर्मदा के पानी से दो बार भरने की योजना तैयार की है। इसके लिए नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण से चर्चा किए जाने और सैद्धांतिक सहमति मिलने की जानकारी सामने आई है।
योजना के अनुसार, नवंबर से अप्रैल के बीच दोनों जलस्रोतों में नर्मदा का पानी पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। इसका उद्देश्य गर्मियों में जलस्रोतों में पर्याप्त पानी बनाए रखना और शहर की पेयजल आपूर्ति को सुचारु रखना है।
हालांकि, योजना के क्रियान्वयन के लिए पानी की उपलब्धता, समय-सारणी और संबंधित विभागों के समन्वय की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
नए बोरिंग पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी
इंदौर में भूजल स्तर पर बढ़ते दबाव को देखते हुए नगर निगम नए बोरिंग पर रोक लगाने का प्रस्ताव तैयार कर रहा है। इसके लिए जिला प्रशासन को प्रस्ताव भेजे जाने की योजना है।
नगर निगम के अनुसार, शहर में सड़क निर्माण और अन्य विकास कार्यों के दौरान भी कई स्थानों पर बोरिंग किए जाते हैं। इससे भूजल के अत्यधिक दोहन की आशंका बढ़ती है। प्रस्ताव के जरिए नए बोरिंग को नियंत्रित करने या उन पर प्रतिबंध लगाने की मांग की जाएगी।
यदि इस संबंध में प्रशासनिक निर्णय लिया जाता है, तो उसके दायरे और लागू होने की शर्तें स्पष्ट होने के बाद ही प्रतिबंध की वास्तविक स्थिति सामने आएगी।
इस बार 800 से ज्यादा पानी के टैंकर चलाने की तैयारी
पेयजल संकट की स्थिति में प्रभावित इलाकों तक पानी पहुंचाने के लिए नगर निगम टैंकर व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी कर रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पिछले वर्ष शहर में 700 से अधिक टैंकर चलाए गए थे, जबकि इस बार 800 से ज्यादा टैंकरों के संचालन की योजना है।
खासतौर पर उन इलाकों में टैंकरों की संख्या बढ़ाई जा सकती है, जहां पाइपलाइन का विस्तार नहीं हुआ है या नियमित जलापूर्ति में परेशानी आती है। टैंकरों की उपलब्धता बढ़ने से जरूरतमंद क्षेत्रों तक पानी पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
पाइपलाइन लीकेज रोकने और पानी की बर्बादी पर नियंत्रण
जलसंकट से निपटने के लिए केवल अतिरिक्त पानी की व्यवस्था करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि मौजूदा पानी की बचत भी जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए नगर निगम जलापूर्ति व्यवस्था की साप्ताहिक समीक्षा करने और पाइपलाइनों में लीकेज को प्राथमिकता के आधार पर ठीक करने पर जोर दे रहा है।
इसके अलावा निर्माण कार्यों और अन्य गैर-पेयजल उपयोगों में ट्रीटेड वाटर यानी उपचारित अपशिष्ट जल के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की योजना है। इससे पीने योग्य पानी की अनावश्यक खपत कम करने में मदद मिल सकती है।
गर्मियों से पहले तैयारियों की होगी अहम परीक्षा
इंदौर में कम बारिश और प्रमुख जलस्रोतों के पूरी क्षमता तक नहीं भर पाने के कारण आने वाले महीनों में पेयजल प्रबंधन महत्वपूर्ण रहेगा। नर्मदा के पानी से तालाब भरने की योजना, टैंकरों की संख्या बढ़ाने, नए बोरिंग को नियंत्रित करने और लीकेज रोकने जैसे कदमों की सफलता उनके समय पर क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी।
फिलहाल नगर निगम की तैयारियों का उद्देश्य गर्मियों में जलापूर्ति को प्रभावित होने से बचाना और शहरवासियों को पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना है। आने वाले समय में जलस्रोतों का जलस्तर, पानी की मांग और योजनाओं की प्रगति यह तय करेगी कि इंदौर में जलसंकट की आशंका को किस हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा।
