Anmol Sandesh News Desk, ओंकारेश्वर
मध्यप्रदेश की पवित्र तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में स्थानीय नागरिक परिषद के आह्वान पर हुए दो दिवसीय बंद का व्यापक असर देखने को मिला। स्थानीय दुकानदारों, होटल और गेस्ट हाउस संचालकों, व्यापारियों तथा ऑटो चालकों ने अपनी मांगों के समर्थन में प्रतिष्ठान और सेवाएं बंद रखीं। इसका सीधा असर दूर-दराज से भगवान ओंकारेश्वर के दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालुओं पर पड़ा। हालात ऐसे रहे कि भक्तों को भगवान को अर्पित करने के लिए फूल और प्रसाद तक नहीं मिल सके। ऑटो सेवाएं बंद रहने के कारण कई श्रद्धालुओं को बस स्टैंड से मंदिर तक पैदल जाना पड़ा, वहीं खाने-पीने और जरूरत की अन्य वस्तुओं के लिए भी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
इस बंद के पीछे आगामी सिंहस्थ की तैयारियों, प्रस्तावित विकास कार्यों और स्थानीय लोगों के विस्थापन को लेकर बनी चिंताएं प्रमुख वजह बताई जा रही हैं। स्थानीय कारोबारियों और नागरिकों को आशंका है कि विकास एवं चौड़ीकरण की योजनाओं से उनके वर्षों पुराने व्यवसाय और आजीविका पर असर पड़ सकता है। दूसरी ओर, प्रशासन का कहना है कि सिंहस्थ के दौरान श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को व्यवस्थित करने के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित करना आवश्यक है।
बाजार बंद होने से श्रद्धालुओं को हुई परेशानी
आमतौर पर श्रद्धालुओं की भीड़, मंदिरों के आसपास की चहल-पहल और धार्मिक गतिविधियों से गुलजार रहने वाली ओंकारेश्वर नगरी बंद के दौरान काफी हद तक शांत नजर आई। दुकानों के बंद रहने से स्थानीय व्यापार प्रभावित हुआ, जबकि बाहर से आए दर्शनार्थियों को भी आवश्यक सुविधाएं जुटाने में मुश्किल हुई।
दिल्ली से पहली बार ओंकारेश्वर दर्शन करने पहुंचीं श्रद्धालु साईं दीपा ने बंद के कारण हुई परेशानी पर निराशा जताई। उन्होंने कहा कि यहां पहुंचने के बाद उन्हें पता चला कि स्थानीय लोगों का विरोध चल रहा है। उनका मानना था कि सरकार को स्थानीय नागरिकों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और उनके व्यवसाय को सुरक्षित रखने के लिए उचित व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि भविष्य में श्रद्धालुओं को इस तरह की दिक्कतों का सामना न करना पड़े।
दिल्ली से आए एक अन्य श्रद्धालु आकाश गर्ग ने बताया कि उनकी भगवान को प्रसाद चढ़ाने की इच्छा थी, लेकिन प्रसाद की दुकानें बंद होने के कारण वह प्रसाद नहीं खरीद सके। उन्होंने स्थानीय लोगों और प्रशासन के बीच बातचीत के जरिए समाधान निकालने की जरूरत बताई। उनका कहना था कि ऐसा रास्ता निकाला जाना चाहिए, जिससे स्थानीय परिवारों की आजीविका भी सुरक्षित रहे और श्रद्धालुओं की धार्मिक सुविधाएं भी बाधित न हों।
सिंहस्थ की तैयारियों को लेकर क्यों है विवाद?
आगामी सिंहस्थ को देखते हुए ओंकारेश्वर और ममलेश्वर क्षेत्र में श्रद्धालुओं की आवाजाही, भीड़ नियंत्रण और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने की तैयारी की जा रही है। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन को व्यवस्थित करने के लिए होल्डिंग एरिया, क्राउड कंट्रोल के लिए स्थान और यूटिलिटी ब्लॉक विकसित करने की आवश्यकता बताई गई है। इन सुविधाओं के निर्माण के लिए कुछ क्षेत्रों में चौड़ीकरण की संभावनाएं भी सामने आई हैं।
इन्हीं प्रस्तावित बदलावों को लेकर स्थानीय नागरिकों के बीच विस्थापन और पुनर्वास को लेकर चिंता है। स्थानीय लोगों की मांग है कि विकास कार्यों के दौरान उनके रोजगार, दुकानों और लंबे समय से बसे परिवारों के हितों का ध्यान रखा जाए। लोगों की प्रमुख चिंता यह भी है कि पुनर्वास के लिए ऐसी जगह उपलब्ध हो, जहां से उनका व्यवसाय और रोजमर्रा का जीवन प्रभावित न हो।
कलेक्टर ऋषव गुप्ता का बयान, 18 बिंदुओं पर हुई चर्चा
बंद और स्थानीय लोगों की चिंताओं के बीच खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता का बयान सामने आया है। उन्होंने बताया कि ओंकारेश्वर के नागरिकों ने प्रशासन के सामने कुल 18 बिंदुओं पर अपनी मांगें और चिंताएं रखी थीं। कलेक्टर के अनुसार, प्रशासन ने सभी 18 बिंदुओं पर गंभीरता से विचार किया है और लगभग सभी मुद्दों पर सहमति बन गई है।
पुनर्वास के लिए प्रस्तावित डुइकिया क्षेत्र को लेकर भी चर्चा हुई। स्थानीय लोगों को यह जगह कुछ दूर लग रही थी। इस पर कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि डुइकिया पुनर्वास के लिए अंतिम विकल्प नहीं है। जरूरत पड़ने पर सभी संबंधित लोगों के साथ चर्चा करके दूसरी जगह का चयन किया जा सकता है।
यह आश्वासन स्थानीय नागरिकों की उस चिंता के बीच महत्वपूर्ण है, जिसमें वे अपने मौजूदा स्थान से दूर बसाए जाने और उससे आजीविका प्रभावित होने की आशंका जता रहे हैं।
सड़क निर्माण पूरा होने तक विस्थापन नहीं करने का आश्वासन
कलेक्टर ऋषव गुप्ता के मुताबिक, क्षेत्र में फिलहाल टू-लेन सड़क का निर्माण प्रस्तावित है, जो आगे चलकर फोर-लेन सड़क से जुड़ेगी। उन्होंने स्थानीय लोगों को आश्वस्त किया कि जब तक सड़क निर्माण का काम पूरा नहीं हो जाता, तब तक विस्थापन की कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
प्रशासन की ओर से दिया गया यह आश्वासन स्थानीय नागरिकों की चिंताओं को दूर करने की दिशा में अहम बताया जा रहा है। हालांकि, पुनर्वास के लिए अंतिम स्थान, विकास कार्यों की विस्तृत समयसीमा और स्थानीय कारोबारियों के हितों को लेकर आगे की स्थिति संबंधित निर्णयों पर निर्भर करेगी।
विकास भी जरूरी, स्थानीय लोगों का रोजगार भी
ओंकारेश्वर में सामने आया यह मामला धार्मिक पर्यटन के विकास और स्थानीय लोगों की आजीविका के बीच संतुलन बनाने की चुनौती को उजागर करता है। सिंहस्थ जैसे बड़े धार्मिक आयोजन के लिए बेहतर सड़कें, भीड़ प्रबंधन और जरूरी सुविधाएं महत्वपूर्ण हैं। वहीं, पीढ़ियों से तीर्थनगरी में कारोबार कर रहे परिवारों के रोजगार और पुनर्वास संबंधी चिंताओं का समाधान भी उतना ही जरूरी है।
दो दिवसीय बंद के दौरान श्रद्धालुओं को हुई परेशानियों ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि भविष्य में धार्मिक आयोजनों और सामान्य दिनों में दर्शनार्थियों की सुविधाएं बाधित न हों, इसके लिए प्रशासन और स्थानीय नागरिकों के बीच समन्वय कैसे बेहतर बनाया जाए।
अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि प्रशासन और स्थानीय नागरिकों के बीच बनी सहमति को किस तरह आगे बढ़ाया जाता है और सिंहस्थ की तैयारियों के साथ स्थानीय लोगों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
