Tuesday, October 20, 2026
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उज्जैन में 2100 साल पुरानी नगर पूजा की परंपरा, कलेक्टर ने चौबीस खंभा मंदिर में महामाया-महालया को चढ़ाया शराब का भोग

Anmol Sandesh News Desk, उज्जैन

धार्मिक नगरी उज्जैन में शारदीय नवरात्र की अष्टमी पर सदियों पुरानी नगर पूजा की परंपरा निभाई गई। कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने सोमवार सुबह चौबीस खंभा मंदिर पहुंचकर माता महामाया और महालया की पूजा-अर्चना की और परंपरा के अनुसार देवी को शराब का भोग अर्पित किया। इस धार्मिक अनुष्ठान में पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा सहित प्रशासन के अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे। उज्जैन की यह परंपरा अपनी विशिष्ट धार्मिक मान्यताओं और ऐतिहासिक पहचान के लिए जानी जाती है।

चौबीस खंभा मंदिर में हुई विशेष पूजा

नवरात्र के दौरान उज्जैन में होने वाली नगर पूजा का प्रमुख केंद्र चौबीस खंभा मंदिर है। निर्धारित परंपरा के अनुसार कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने सुबह करीब 8 बजे मंदिर में विधि-विधान से पूजा की। इसके बाद माता महामाया और महालया को शराब का भोग लगाया गया। यह अनुष्ठान उज्जैन की पारंपरिक नगर पूजा का हिस्सा माना जाता है।

पूजा के बाद प्रशासन की ओर से शासकीय अधिकारियों और कोटवारों को शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में स्थित मंदिरों में पूजा-अर्चना के लिए भेजा गया। इस प्रक्रिया के जरिए नगर पूजा की परंपरा को व्यापक स्तर पर निभाया जाता है।

40 से अधिक मंदिरों में होती है नगर पूजा

स्थानीय परंपरा के अनुसार उज्जैन में नगर पूजा केवल चौबीस खंभा मंदिर तक सीमित नहीं रहती, बल्कि शहर के विभिन्न हिस्सों में स्थित 40 से अधिक मंदिरों में भी धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, करीब 27 किलोमीटर के क्षेत्र में फैली इस परंपरा के दौरान 25 लीटर से अधिक शराब का उपयोग किया जाता है।

उज्जैन की धार्मिक मान्यताओं में सात्विक और तामसिक, दोनों प्रकार की पूजा-पद्धतियों का उल्लेख मिलता है। नगर पूजा इसी विशिष्ट परंपरा का उदाहरण है, जिसमें देवी को शराब का भोग अर्पित किया जाता है। यह अनुष्ठान स्थानीय धार्मिक आस्था और परंपरागत रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न होता है।

सम्राट विक्रमादित्य के काल से जुड़ी मान्यता

उज्जैन की नगर पूजा का इतिहास करीब 2,000 से 2,100 साल पुराना बताया जाता है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, इसकी शुरुआत सम्राट विक्रमादित्य के शासनकाल में हुई थी। बाद में सिंधिया काल में भी यह परंपरा जारी रही और समय के साथ शासन-प्रशासन की व्यवस्था का हिस्सा बन गई।

इस पूजा का खर्च संबंधित विभागों और अधिकारियों द्वारा वहन किए जाने की जानकारी दी जाती है। नगर पूजा को उज्जैन की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का अहम हिस्सा माना जाता है। हालांकि, इसकी प्राचीनता और शुरुआत से जुड़े विवरणों की ऐतिहासिक पुष्टि के लिए आधिकारिक या प्रामाणिक ऐतिहासिक स्रोतों का संदर्भ आवश्यक है।

क्या है नगर पूजा के पीछे की मान्यता?

स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नगर पूजा का उद्देश्य नगर की रक्षा, शांति और समृद्धि की कामना करना है। मान्यता है कि इस अनुष्ठान से नगर में मौजूद अतृप्त आत्माओं को तृप्ति मिलती है और वे प्रसन्न होकर नगरवासियों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। इसी विश्वास के साथ हर साल नवरात्र के दौरान यह परंपरा निभाई जाती है।

इस प्रकार उज्जैन की नगर पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि शहर की ऐतिहासिक पहचान, लोकविश्वास और परंपराओं से जुड़ा आयोजन भी है। चौबीस खंभा मंदिर में होने वाली पूजा के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी इस परंपरा के संस्थागत स्वरूप को भी दर्शाती है।

 

Kanchan Sharma
Kanchan Sharma
कंचन शर्मा वर्तमान में दैनिक समाचार पत्र "अनमोल संदेश" में कार्यरत। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया,प्रिंट, न्यूज एजेंसी और डिजिटल पत्रकारिता में उनका लंबा अनुभव है, जिसमें उन्होंने रिपोर्टर और डेस्क पर विभिन्न भूमिकाओं में काम किया है।
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