Anmol Sandesh News Desk | बिलासपुर, छत्तीसगढ़
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत दो दिवसीय प्रवास पर बिलासपुर पहुंचे हैं। उनके इस दौरे को संगठनात्मक गतिविधियों, कार्य विस्तार और आगामी रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रवास के दौरान वे संघ के प्रबुद्ध कार्यकर्ताओं के बौद्धिक वर्ग को संबोधित करेंगे। वहीं, 23 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ प्रांत के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर संगठन के कामकाज, सामाजिक गतिविधियों और भविष्य की कार्ययोजना पर चर्चा करेंगे। इस दौरे के बीच छत्तीसगढ़ में संघ की संगठनात्मक संरचना में संभावित बदलाव को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। चर्चा है कि संगठन के कामकाज को अधिक प्रभावी बनाने के लिए छत्तीसगढ़ प्रांत को रायपुर और बिलासपुर केंद्रित दो अलग-अलग इकाइयों में विभाजित किया जा सकता है। हालांकि, इस संभावित पुनर्गठन को लेकर अभी किसी अंतिम निर्णय की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
सरस्वती शिशु मंदिर परिसर में होंगे कार्यक्रम
डॉ. मोहन भागवत बिलासपुर के कोनी-बिरकोना मार्ग स्थित सरस्वती शिशु मंदिर परिसर में आयोजित कार्यक्रमों में शामिल होंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, बुधवार शाम को वे संघ के प्रबुद्ध कार्यकर्ताओं के बौद्धिक वर्ग को संबोधित करेंगे। इसके बाद वे इसी परिसर में रात्रि विश्राम करेंगे। उनके प्रवास को लेकर संघ के पदाधिकारी तैयारियों में जुटे हैं। कार्यक्रम स्थल और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सतर्कता बरती जा रही है। इस दौरान संघ प्रमुख का संबोधन संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसमें संगठन के विचार, सामाजिक सहभागिता और कार्यकर्ताओं की भूमिका जैसे विषयों पर मार्गदर्शन मिलने की उम्मीद है।
23 अक्टूबर को होगी प्रांतीय पदाधिकारियों की बैठक
प्रवास के दूसरे दिन, गुरुवार 23 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ प्रांत के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक में संगठनात्मक गतिविधियों की समीक्षा के साथ आगामी कार्यक्रमों और कार्य विस्तार की रणनीति पर विचार-विमर्श किया जाएगा। बैठक में अखिल भारतीय, क्षेत्रीय और प्रांतीय स्तर के पदाधिकारियों की भागीदारी रहने की जानकारी है। छत्तीसगढ़ प्रांत के संघचालक टोपलाल, प्रांत प्रचारक अभय, सह प्रांत प्रचारक नारायण नामदेव और प्रांत कार्यवाह चंद्रशेखर देवांगन सहित अन्य पदाधिकारी इसमें शामिल हो सकते हैं। बैठक के दौरान संगठन की मौजूदा व्यवस्था, विभिन्न क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारियों और सामाजिक गतिविधियों को अधिक प्रभावी बनाने जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
छत्तीसगढ़ में RSS के संगठनात्मक पुनर्गठन की चर्चा
मोहन भागवत के बिलासपुर प्रवास के दौरान सबसे अधिक चर्चा छत्तीसगढ़ में संघ की संगठनात्मक संरचना में संभावित बदलाव को लेकर हो रही है। संघ से जुड़े सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ प्रांत को दो अलग-अलग संगठनात्मक इकाइयों में विभाजित करने की संभावना पर विचार किया जा सकता है। इसके तहत रायपुर और बिलासपुर को अलग-अलग केंद्र बनाकर संगठनात्मक गतिविधियों का संचालन किए जाने की चर्चा है। हालांकि, यह प्रस्तावित व्यवस्था है। इसके लागू होने, इसकी समयसीमा और पदाधिकारियों की जिम्मेदारियों को लेकर आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।
संभावित व्यवस्था में कौन-कौन से क्षेत्र होंगे शामिल?
चर्चा के अनुसार, प्रस्तावित पुनर्गठन में क्षेत्रों का संभावित विभाजन इस प्रकार हो सकता है:
- बिलासपुर केंद्रित इकाई
- बिलासपुर
- सरगुजा
- रायगढ़
- जशपुर
- कोरिया
- कोरबा
- रायपुर केंद्रित इकाई
- रायपुर
- दुर्ग
- राजनांदगांव
- राजिम
- बस्तर क्षेत्र
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, वर्तमान व्यवस्था में छत्तीसगढ़ प्रांत के अंतर्गत 11 विभाग हैं। संभावित पुनर्गठन में छह विभाग रायपुर और पांच विभाग बिलासपुर केंद्रित इकाई के अंतर्गत रखे जाने की चर्चा है। यदि इस व्यवस्था को मंजूरी मिलती है, तो अलग-अलग क्षेत्रों में संगठनात्मक गतिविधियों के संचालन, कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय और कार्य विस्तार को गति देने में मदद मिल सकती है। हालांकि, विभागों के अंतिम आवंटन और नई इकाइयों की संरचना की पुष्टि आधिकारिक निर्णय के बाद ही होगी।
बैठक में शामिल होंगे संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी
प्रस्तावित बैठक में संघ के अखिल भारतीय और क्षेत्रीय स्तर के कई वरिष्ठ पदाधिकारियों के शामिल होने की जानकारी दी गई है। इनमें प्रमुख रूप से निम्न नाम शामिल हैं:
- दीपक — अखिल भारतीय सह बौद्धिक प्रमुख
- सुनील कुलकर्णी — अखिल भारतीय सह प्रचारक प्रमुख
- राकेश जैन — अखिल भारतीय पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के सह संयोजक
- स्वप्निल — मध्य क्षेत्र के क्षेत्र प्रचारक
- प्रेमशंकर सिदार — सह क्षेत्र प्रचारक
- अशोक अग्रवाल — क्षेत्र कार्यवाह
- नागेंद्र — क्षेत्र बौद्धिक प्रमुख
- डॉ. पूर्णेंदु सक्सेना — क्षेत्र संघचालक
- अनिल डागा — ग्राम विकास गतिविधि के क्षेत्र संयोजक
इन पदाधिकारियों की मौजूदगी में संगठनात्मक कार्यों की समीक्षा और आगामी गतिविधियों पर विचार-विमर्श होने की संभावना है।
सामाजिक गतिविधियों और कार्य विस्तार पर भी रहेगा फोकस
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की संगठनात्मक गतिविधियों के साथ सामाजिक क्षेत्र में संचालित कार्य भी बैठक के प्रमुख विषयों में शामिल हो सकते हैं। पर्यावरण संरक्षण, ग्राम विकास, सामाजिक सहभागिता और कार्यकर्ताओं की सक्रिय भूमिका जैसे विषयों पर चर्चा होने की संभावना है। छत्तीसगढ़ के अलग-अलग भौगोलिक और सामाजिक क्षेत्रों में संगठनात्मक गतिविधियों के बेहतर संचालन के लिए विकेंद्रीकरण को एक संभावित विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। यदि दो इकाइयों का गठन होता है, तो क्षेत्रीय स्तर पर समन्वय और जिम्मेदारियों के निर्धारण में बदलाव देखने को मिल सकता है।
मोहन भागवत का बिलासपुर दौरा क्यों है अहम?
डॉ. मोहन भागवत का यह दो दिवसीय प्रवास ऐसे समय में हो रहा है, जब छत्तीसगढ़ में संघ की संगठनात्मक व्यवस्था में संभावित बदलाव को लेकर चर्चाएं सामने आ रही हैं। बौद्धिक वर्ग को संबोधन और वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ बैठक के माध्यम से संगठन के वर्तमान कार्यों और भविष्य की दिशा पर विचार-विमर्श किया जाएगा। अब सभी की नजरें 23 अक्टूबर को होने वाली बैठक पर टिकी हैं। क्या छत्तीसगढ़ में संघ की संगठनात्मक संरचना में बदलाव को लेकर कोई ठोस निर्णय सामने आएगा? क्या रायपुर और बिलासपुर को अलग-अलग संगठनात्मक केंद्र बनाने की चर्चा पर मुहर लगेगी? इन सवालों के जवाब आधिकारिक निर्णय के बाद ही स्पष्ट होंगे।
