Anmol Sandesh News Desk, रायपुर
Bastar Dussehra 2026: छत्तीसगढ़ के विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा में इस बार एक भव्य रंगोली आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनी। जगदलपुर के लालबाग मैदान में 20,700 वर्ग फुट क्षेत्र में बनाई गई विशाल रंगोली ने विश्व रिकॉर्ड बनाने की उपलब्धि हासिल की। रंगों और कलात्मकता से सजी इस रंगोली को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी अपने छत्तीसगढ़ दौरे के दौरान इस रंगोली की सराहना की।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू दो दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरे पर आई थीं। दौरे के दूसरे दिन शुक्रवार को उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सहित अन्य जनप्रतिनिधियों के साथ मां दंतेश्वरी मंदिर पहुंचकर दर्शन किए और आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद राष्ट्रपति जगदलपुर पहुंचीं, जहां उन्होंने बस्तर दशहरा के पारंपरिक आयोजन मुरिया दरबार में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने आदिवासी समाज की परंपराओं, संस्कृति और स्थानीय व्यवस्थाओं को करीब से जाना।
20,700 वर्ग फुट में तैयार हुई भव्य रंगोली
बस्तर दशहरा के अवसर पर जगदलपुर के लालबाग मैदान में 20,700 वर्ग फुट क्षेत्र में विशाल रंगोली तैयार की गई। अपने विशाल आकार और आकर्षक कलात्मक प्रस्तुति के कारण यह रंगोली लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी रही। इसे देखने के लिए स्थानीय नागरिकों के साथ बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचे।
इस रंगोली को विश्व की सबसे बड़ी रंगोलियों में शामिल होने और विश्व रिकॉर्ड बनाने की उपलब्धि से जोड़ा गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी इसे देखकर सराहना की। बस्तर की सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक उत्सव के बीच इस विशाल रंगोली ने आयोजन को एक विशेष आकर्षण दिया।
बस्तर दशहरा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आदिवासी संस्कृति, परंपराओं और सामुदायिक सहभागिता का महत्वपूर्ण प्रतीक भी है। ऐसे आयोजनों में स्थानीय कलाकारों की रचनात्मकता और सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है।
मुरिया दरबार में शामिल हुईं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
अपने दौरे के दौरान राष्ट्रपति जगदलपुर स्थित सिरहासार भवन में आयोजित पारंपरिक मुरिया दरबार में शामिल हुईं। यहां उन्होंने बस्तर के मांझी-चालकियों से बातचीत की और विभिन्न विषयों पर चर्चा की। इस संवाद के दौरान आदिवासी समाज की परंपराओं, स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्थाओं और समुदाय से जुड़े मुद्दों पर भी बात हुई।
मुरिया दरबार बस्तर की ऐतिहासिक और सामाजिक परंपरा का अहम हिस्सा है। इस मंच पर पारंपरिक जनप्रतिनिधि समुदाय की समस्याओं और आवश्यकताओं को सामने रखते हैं। राष्ट्रपति की इस सहभागिता को बस्तर की स्थानीय परंपराओं और आदिवासी समाज से संवाद के महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा गया।
राष्ट्रपति ने की आदिवासी समाज की पारंपरिक न्याय व्यवस्था की सराहना
मुरिया दरबार में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आदिवासी समाज की पारंपरिक विवाद निपटान व्यवस्था की सराहना की। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज का संविधान भले ही लिखित रूप में न हो, लेकिन विवादों को सुलझाने की उनकी पारंपरिक व्यवस्था प्रभावी ढंग से काम करती है।
राष्ट्रपति ने पारंपरिक व्यवस्था में मांझी से लेकर परगना तक की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि कई मामलों में गांव स्तर पर ही आपसी विवादों का समाधान कर लिया जाता है। इसके विपरीत, औपचारिक न्यायिक व्यवस्था में कुछ मामलों के निपटारे में लंबा समय लग सकता है।
उनकी इस टिप्पणी ने आदिवासी समाज की पारंपरिक संस्थाओं, सामुदायिक संवाद और स्थानीय स्तर पर विवाद सुलझाने की परंपरा को फिर से चर्चा में ला दिया। बस्तर जैसे जनजातीय बहुल क्षेत्र में ये परंपराएं सामाजिक जीवन और सामुदायिक संबंधों का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
बस्तर दशहरा ने फिर दिखाई छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान
बस्तर दशहरा अपनी विशिष्ट परंपराओं और लंबे समय तक चलने वाले उत्सव के लिए देशभर में जाना जाता है। इस आयोजन में आदिवासी समाज की भागीदारी, पारंपरिक अनुष्ठान और स्थानीय सांस्कृतिक विरासत विशेष महत्व रखते हैं।
इस बार 20,700 वर्ग फुट की विशाल रंगोली, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मौजूदगी और मुरिया दरबार में हुआ संवाद आयोजन के प्रमुख आकर्षण रहे। इन गतिविधियों ने बस्तर की सांस्कृतिक पहचान, कलात्मक प्रतिभा और पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था को व्यापक स्तर पर सामने लाने का अवसर दिया।
