Anmol Sandesh News Desk, मुंबई
Tiger Shroff Firing Case: बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई फायरिंग के मामले में जांच के दौरान कई अहम पहलू सामने आए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वारदात के बाद फरार हुए शूटर्स को बाहर से मदद मिल रही थी। बताया जा रहा है कि एक हैंडलर टीवी पर न्यूज देखकर पुलिस की जांच से जुड़ी जानकारी आरोपियों तक पहुंचा रहा था। जब टीवी रिपोर्ट में शूटर्स के चेहरे दिखाई दिए, तो रेहान नाम के आरोपी को कथित तौर पर मैसेज मिला कि उनके चेहरे सामने आ गए हैं और उन्हें वहां से निकल जाना चाहिए।
रिपोर्ट्स के अनुसार, शूटर्स को यह भी बताया गया कि पुलिस को उनकी बाइक मिल गई है और ट्रेन से भागने की उनकी योजना का पता चल चुका है। इसके बाद आरोपियों ने भागने का तरीका बदल दिया। पुलिस की जांच में कैब, बस और ट्रेन के जरिए उनके सफर की जानकारी सामने आई। वहीं, इस मामले में एक आरोपी ने दावा किया कि टाइगर श्रॉफ द्वारा अभिनेता सलमान खान की तारीफ किए जाने से लॉरेंस बिश्नोई गैंग नाराज था। हालांकि, इस कथित वजह की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
टीवी पर चेहरे दिखते ही शूटर्स को किया गया अलर्ट
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, फायरिंग की घटना के बाद भी आरोपियों के संपर्क में मौजूद एक व्यक्ति उन्हें पुलिस की कार्रवाई से जुड़ी जानकारी दे रहा था। बताया गया है कि यह व्यक्ति टीवी न्यूज देख रहा था और खबरों में सामने आ रहे घटनाक्रम के आधार पर शूटर्स को अलर्ट कर रहा था।
जब न्यूज चैनलों पर आरोपियों के चेहरे दिखाई दिए, तो रेहान को कथित तौर पर संदेश मिला कि उनके चेहरे पहचान में आ गए हैं और उन्हें वहां से निकल जाना चाहिए। इसके अलावा बाइक बरामद होने और ट्रेन से फरार होने की योजना की जानकारी भी आरोपियों तक पहुंचने का दावा किया गया है।
इस घटनाक्रम से जांचकर्ताओं के सामने यह सवाल खड़ा हुआ कि शूटर्स को लगातार जानकारी कौन दे रहा था और वारदात के बाद उन्हें निर्देश कहां से मिल रहे थे। पुलिस इस कथित हैंडलर की पहचान और आरोपियों के साथ उसके संपर्कों की जांच कर रही है।
बाइक छोड़कर कैब से सूरत पहुंचे आरोपी, फिर बदला भागने का प्लान
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, फायरिंग के बाद आरोपियों की शुरुआती योजना बाइक से मुंबई से बाहर निकलने की थी। हालांकि, बाद में उन्होंने अंधेरी इलाके में बाइक छोड़ दी और बोरीवली से एक कैब लेकर सूरत की ओर रवाना हो गए।
आरोपियों ने आगे बस से यात्रा करने की योजना बनाई थी, लेकिन बस में देरी होने के कारण उन्होंने जयपुर जाने वाली ट्रेन पकड़ ली। मुंबई पुलिस से मिली सूचना के आधार पर कोटा पुलिस ने 19 अक्टूबर को ट्रेन में तीन शूटर्स को गिरफ्तार किया।
जांच के अनुसार, आरोपियों ने लगातार अपने सफर का तरीका बदला, ताकि पुलिस की पकड़ से बच सकें। बाइक से निकलने की योजना छोड़ने, कैब से दूसरे शहर पहुंचने और फिर ट्रेन से आगे जाने के घटनाक्रम ने पुलिस को उनकी यात्रा की कड़ियां जोड़ने में मदद की।
कैब ड्राइवर को किए गए फोन कॉल से मिला अहम सुराग
इस मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी तक पहुंचने में एक सामान्य मोबाइल कॉल अहम साबित हुई। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, शूटर्स अपने कथित हैंडलर्स से इंटरनेट के माध्यम से वॉयस कॉल पर बात कर रहे थे। ऐसी कॉल की जानकारी सामान्य मोबाइल कॉल रिकॉर्ड से सीधे नहीं मिलती, जिससे उनकी बातचीत की जांच चुनौतीपूर्ण हो सकती थी।
हालांकि, बोरीवली से सूरत ले जाने वाले कैब ड्राइवर को आरोपियों ने सामान्य मोबाइल कॉल की थी। पुलिस को इसी कॉल से उनके सफर और सूरत पहुंचने के संबंध में महत्वपूर्ण सुराग मिला।
इसके बाद जांचकर्ताओं ने आरोपियों की यात्रा से जुड़ी अन्य जानकारियां जुटाईं और उस रेलवे स्टेशन का पता लगाने की कोशिश की, जहां से वे जयपुर जाने वाली ट्रेन में सवार हुए थे। इस तरह कैब ड्राइवर से जुड़े कॉल रिकॉर्ड और अन्य जांच संबंधी जानकारियों ने पुलिस को आरोपियों तक पहुंचने में मदद की।
अनिल पंडित, अंकित खटक और समीर खत्री की भूमिका की जांच
जांच में कथित हैंडलर की पहचान भी महत्वपूर्ण सवाल बनी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, सीसीटीवी फुटेज में शूटर रेहान को फोन पर बात करते देखा गया था। पुलिस को संदेह था कि आरोपी इंटरनेट आधारित वॉयस कॉल का इस्तेमाल कर रहे थे। गिरफ्तारी के बाद बातचीत से संबंधित कुछ साक्ष्य मिलने की बात सामने आई, लेकिन इस्तेमाल किए गए कम्युनिकेशन ऐप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई।
जांचकर्ताओं को संदेह है कि शूटर्स को निर्देश देने वाले व्यक्ति की भूमिका अनिल पंडित, अंकित खटक या समीर खत्री में से किसी की हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, अंकित और समीर पर शूटर्स तथा अनिल पंडित के बीच संपर्क स्थापित कराने की भूमिका होने का संदेह है।
हालांकि, इन व्यक्तियों की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा। केवल संदेह या मीडिया रिपोर्ट के आधार पर किसी व्यक्ति की संलिप्तता को प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।
सलमान खान की तारीफ से नाराजगी? आरोपी ने किया यह दावा
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी फूल सिंह ने पुलिस को बताया कि मुख्य आरोपी अनिल पंडित ने उसे टाइगर श्रॉफ को निशाना बनाने की कथित वजह बताई थी।
फूल सिंह के दावे के अनुसार, वर्ष 2022 में फिल्म ‘हीरोपंती 2’ के प्रचार के दौरान टाइगर श्रॉफ ने सलमान खान की तारीफ करते हुए उन्हें इंडस्ट्री का असली ‘टाइगर’ बताया था। आरोपी के मुताबिक, टाइगर ने खुद की तुलना बिल्ली से की थी और सलमान खान के प्रति सम्मान जताया था।
आरोपी ने दावा किया कि इसी टिप्पणी के कारण लॉरेंस बिश्नोई गैंग टाइगर श्रॉफ से नाराज था और उनसे बदला लेना चाहता था। हालांकि, यह आरोपी की ओर से बताई गई कथित वजह है। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि और फायरिंग के पीछे वास्तविक मकसद का निर्धारण जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही किया जा सकेगा।
18 अक्टूबर को जुहू में हुई थी फायरिंग
रिपोर्ट में दी गई जानकारी के मुताबिक, 18 अक्टूबर की शाम मुंबई के जुहू इलाके में टाइगर श्रॉफ की कार पर पांच से छह राउंड फायरिंग की गई थी। घटना के दौरान अभिनेता सुरक्षित रहे, जबकि उनके ड्राइवर और एक व्लॉगर के घायल होने की जानकारी दी गई।
वारदात के बाद पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू की। जांच के दौरान उनके कथित भागने के रास्ते, संपर्कों और घटना के पीछे की वजह की पड़ताल की गई। मामले में अनिल पंडित ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए लॉरेंस बिश्नोई गैंग से संबंध होने का दावा करते हुए फायरिंग की जिम्मेदारी लेने की बात भी सामने आई।
अब पुलिस के सामने क्या हैं बड़े सवाल?
इस मामले में जांचकर्ताओं के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल हैं। पहला, शूटर्स को टीवी न्यूज से पुलिस की कार्रवाई की जानकारी देने वाला व्यक्ति कौन था? दूसरा, आरोपियों और कथित हैंडलर्स के बीच संपर्क किस माध्यम से हो रहा था? तीसरा, क्या फायरिंग के पीछे सलमान खान की तारीफ से जुड़ा दावा सही है या इसके पीछे कोई दूसरी वजह थी?
पुलिस को इन सवालों के जवाब साक्ष्यों, डिजिटल संपर्कों और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर तलाशने होंगे। फिलहाल, मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आए दावों और जांच में प्रमाणित तथ्यों के बीच अंतर करना जरूरी है।
