Anmol Sandesh News Desk, भोपाल
Bhopal News: दिवाली के त्योहार से पहले मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में पुलिस कमिश्नरेट ने कार्बाइड गन, कार्बाइड तोप और कार्बाइड लैंप को लेकर प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया है। त्योहार के दौरान लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और संभावित हादसों को रोकने के उद्देश्य से इन उपकरणों के निर्माण, उपयोग, संग्रहण और बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
दिवाली से पहले पुलिस कमिश्नरेट का आदेश, दो महीने तक लागू रहेगा प्रतिबंध
भोपाल पुलिस कमिश्नरेट की ओर से जारी आदेश के अनुसार, कार्बाइड गन, कार्बाइड तोप और कार्बाइड लैंप से जुड़े खतरों को देखते हुए इनके इस्तेमाल और कारोबार पर रोक लगाई गई है। यह आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत जारी किया गया है।
आदेश 26 अक्टूबर 2026 से प्रभावी हुआ है और अगले दो महीने तक लागू रहेगा। दिवाली के दौरान पटाखों और अन्य आतिशबाजी के बीच ऐसे उपकरणों के इस्तेमाल से दुर्घटनाओं की आशंका को देखते हुए पुलिस ने यह कदम उठाया है।
क्या होती है कार्बाइड गन और क्यों है खतरनाक?
कार्बाइड गन एक ऐसा उपकरण है, जिसमें कैल्शियम कार्बाइड और पानी की रासायनिक प्रतिक्रिया से ज्वलनशील गैस बन सकती है। इस गैस को आग के संपर्क में लाने पर तेज आवाज के साथ विस्फोट जैसा प्रभाव पैदा होता है। कुछ उपकरणों में गैस के दबाव से धमाके जैसी आवाज निकालने की व्यवस्था होती है।
इस प्रक्रिया के दौरान गैस का दबाव अनियंत्रित होने, आग लगने या उपकरण के फटने का खतरा रहता है। इससे हाथ, आंख और चेहरे पर गंभीर चोट लग सकती है। बच्चों और किशोरों द्वारा ऐसे उपकरणों का इस्तेमाल करना विशेष रूप से जोखिम भरा हो सकता है।
कार्बाइड लैंप में भी कैल्शियम कार्बाइड और पानी की प्रतिक्रिया से बनने वाली ज्वलनशील गैस का उपयोग किया जाता है। गैस के रिसाव या आग के अनुचित इस्तेमाल से दुर्घटना हो सकती है। इसलिए ऐसे उपकरणों का असुरक्षित इस्तेमाल लोगों की जान और संपत्ति के लिए खतरा बन सकता है।
निर्माण से लेकर बिक्री तक पर रोक
पुलिस कमिश्नरेट के आदेश के मुताबिक प्रतिबंध केवल कार्बाइड गन चलाने तक सीमित नहीं है। इसके दायरे में इन उपकरणों का निर्माण, उपयोग, संग्रहण और बिक्री भी शामिल है। आदेश में मरम्मत करने पर भी कार्रवाई का उल्लेख किया गया है।
इसका मतलब है कि प्रतिबंध लागू रहने की अवधि में संबंधित उपकरणों का निर्माण या कारोबार करने और उनका इस्तेमाल करने वाले लोगों को कानूनी प्रावधानों का पालन करना होगा। पुलिस का उद्देश्य ऐसे उपकरणों की उपलब्धता और उनके इस्तेमाल से होने वाले संभावित हादसों को रोकना है।
आदेश तोड़ा तो किस धारा में होगी कार्रवाई?
भोपाल पुलिस के जारी आदेश के अनुसार, प्रतिबंध का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है। यह धारा लोक सेवक द्वारा विधिवत जारी आदेश की अवज्ञा से संबंधित है। मामले में कार्रवाई संबंधित तथ्यों और लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार होगी।
त्योहार के दौरान नागरिकों से अपील है कि वे प्रतिबंधित उपकरणों का इस्तेमाल न करें और बच्चों को भी ऐसे खतरनाक साधनों से दूर रखें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि या असुरक्षित इस्तेमाल की जानकारी मिलने पर पुलिस को सूचित किया जा सकता है।
सुरक्षा को लेकर पुलिस की सख्ती
दिवाली के दौरान बाजारों, रिहायशी इलाकों और सार्वजनिक स्थानों पर लोगों की आवाजाही बढ़ जाती है। ऐसे समय में विस्फोटक प्रभाव पैदा करने वाले उपकरणों का इस्तेमाल दुर्घटना का कारण बन सकता है। भोपाल पुलिस कमिश्नरेट का यह आदेश इसी जोखिम को कम करने की दिशा में उठाया गया कदम है।
भोपाल में 26 अक्टूबर 2026 से लागू इस प्रतिबंध का पालन करना जरूरी है। नागरिकों को त्योहार के दौरान सुरक्षित तरीके से उत्सव मनाने, बच्चों की निगरानी रखने और किसी भी प्रकार के खतरनाक उपकरण का इस्तेमाल करने से बचने की जरूरत है।
