Anmol Sandesh News Desk, भोपाल।
Hardeep Singh Puri Rajya Sabha By Election: मध्य प्रदेश में राज्यसभा उपचुनाव को लेकर सियासी तस्वीर पूरी तरह साफ हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार और केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी निर्विरोध राज्यसभा सदस्य निर्वाचित हो गए हैं। नामांकन पत्रों की जांच यानी स्क्रूटनी के बाद निर्वाचन अधिकारी ने उनके नामांकन को वैध घोषित किया। वहीं, चुनाव मैदान में उतरे दो अन्य प्रत्याशियों के नामांकन पत्र अलग-अलग कारणों से निरस्त कर दिए गए।
हरदीप सिंह पुरी की निर्विरोध जीत के साथ ही मध्य प्रदेश से राज्यसभा की इस सीट पर चुनावी मुकाबला समाप्त हो गया। खास बात यह है कि कांग्रेस समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार राजकुमार लोहानी का नामांकन आवश्यक दस्तावेज नहीं होने के कारण खारिज हुआ। इसके अलावा तेलंगाना के हैदराबाद से भोपाल पहुंचे निर्दलीय उम्मीदवार कांते सायन्ना का पर्चा भी प्रस्तावकों की अनिवार्य शर्त पूरी नहीं करने के चलते निरस्त कर दिया गया।
इससे पहले कांग्रेस ने बीजेपी उम्मीदवार हरदीप सिंह पुरी के नामांकन पत्र और चुनावी हलफनामे को लेकर कई गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई थीं। हालांकि, निर्वाचन अधिकारी ने सभी आपत्तियों की जांच के बाद उन्हें खारिज कर दिया और पुरी का नामांकन वैध पाया।
हरदीप सिंह पुरी निर्विरोध निर्वाचित, चुनावी मुकाबला खत्म
मध्य प्रदेश की राज्यसभा सीट के उपचुनाव में बीजेपी ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को अपना उम्मीदवार बनाया था। उनके मुकाबले दो निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी नामांकन दाखिल किया था।
नामांकन पत्रों की जांच के दौरान निर्वाचन अधिकारी ने हरदीप सिंह पुरी के दस्तावेजों को सही पाया। इसके बाद अन्य दोनों उम्मीदवारों के नामांकन निरस्त होने से उनके सामने कोई वैध प्रतिद्वंद्वी नहीं बचा।
इस तरह हरदीप सिंह पुरी की निर्विरोध जीत तय हो गई। राज्यसभा उपचुनाव में बीजेपी के लिए इसे महत्वपूर्ण राजनीतिक सफलता माना जा रहा है। निर्विरोध निर्वाचन के साथ मध्य प्रदेश से राज्यसभा में बीजेपी का प्रतिनिधित्व भी बरकरार रहेगा।
कांग्रेस समर्थित राजकुमार लोहानी का नामांकन क्यों हुआ खारिज?
इस उपचुनाव में कांग्रेस समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार राजकुमार लोहानी ने भी अपना नामांकन दाखिल किया था। कांग्रेस की ओर से उन्हें समर्थन दिया गया था, लेकिन नामांकन पत्रों की जांच के दौरान उनका पर्चा निरस्त कर दिया गया।
निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, राजकुमार लोहानी के नामांकन के साथ अनिवार्य चुनावी शपथ पत्र यानी फॉर्म-26 संलग्न नहीं था। चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के लिए यह दस्तावेज आवश्यक होता है। इसमें उम्मीदवार की संपत्ति, देनदारियों और अन्य निर्धारित जानकारियों का विवरण देना होता है।
अनिवार्य दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के कारण रिटर्निंग ऑफिसर ने उनका नामांकन निरस्त कर दिया। इसके बाद कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार चुनावी मुकाबले से बाहर हो गए।
50 से ज्यादा चुनाव लड़ चुके कांते सायन्ना का पर्चा भी निरस्त
राज्यसभा उपचुनाव में एक अन्य निर्दलीय उम्मीदवार कांते सायन्ना ने भी नामांकन दाखिल किया था। वह तेलंगाना के हैदराबाद से भोपाल पहुंचे थे। बताया जाता है कि वह अब तक 50 से अधिक चुनाव लड़ चुके हैं।
हालांकि, इस बार उनका नामांकन भी वैध नहीं पाया गया। निर्वाचन अधिकारी ने प्रस्तावकों से संबंधित आवश्यक शर्त पूरी नहीं होने के कारण उनका पर्चा खारिज कर दिया।
इस तरह कुल तीन नामांकनों में से केवल हरदीप सिंह पुरी का नामांकन ही वैध पाया गया, जबकि राजकुमार लोहानी और कांते सायन्ना चुनावी दौड़ से बाहर हो गए।
हरदीप सिंह पुरी के नामांकन पर कांग्रेस ने उठाए थे सवाल
नामांकन प्रक्रिया के दौरान कांग्रेस ने बीजेपी उम्मीदवार हरदीप सिंह पुरी के दस्तावेजों पर कई सवाल उठाए थे। कांग्रेस ने उनके चुनावी हलफनामे में कथित खामियों को आधार बनाकर आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
कांग्रेस की प्रमुख आपत्तियां इस प्रकार थीं:
- पत्नी के नाम का उल्लेख: कांग्रेस ने चुनावी हलफनामे में पत्नी का नाम नहीं होने को लेकर सवाल उठाया था।
- विदेशी मुद्रा में संपत्ति का विवरण: कांग्रेस ने संपत्ति का ब्यौरा भारतीय रुपये के बजाय अमेरिकी डॉलर और स्विस फ्रैंक में दिए जाने पर आपत्ति जताई थी।
- नोटरी प्रक्रिया पर सवाल: नामांकन से जुड़े दस्तावेजों की नोटरी प्रक्रिया की वैधानिकता को लेकर भी सवाल उठाए गए थे।
कांग्रेस का तर्क था कि उम्मीदवार के हलफनामे में सभी आवश्यक जानकारियां निर्धारित नियमों के अनुसार होनी चाहिए। इन आपत्तियों के जरिए पार्टी ने हरदीप सिंह पुरी के नामांकन की वैधता पर सवाल खड़े किए थे।
निर्वाचन अधिकारी ने कांग्रेस की सभी आपत्तियां खारिज कीं
कांग्रेस की ओर से उठाई गई आपत्तियों की जांच के बाद निर्वाचन अधिकारी ने सभी दावों को स्वीकार नहीं किया। जांच में हरदीप सिंह पुरी का नामांकन वैध पाया गया।
निर्वाचन अधिकारी ने उनके दस्तावेजों को नियमों के अनुरूप मानते हुए नामांकन स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही उनकी निर्विरोध जीत का रास्ता साफ हो गया।
इस फैसले के बाद कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार का नामांकन रद्द होने और बीजेपी प्रत्याशी का पर्चा वैध पाए जाने से चुनावी प्रक्रिया का परिणाम लगभग स्पष्ट हो गया था।
मध्य प्रदेश की राजनीति में बीजेपी को मिली बड़ी कामयाबी
राज्यसभा उपचुनाव में हरदीप सिंह पुरी का निर्विरोध निर्वाचन मध्य प्रदेश की राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बीजेपी ने इस सीट पर बिना मतदान के ही जीत हासिल कर ली है।
दूसरी ओर, कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी का नामांकन खारिज होने से विपक्ष को चुनावी मुकाबले में उतरने का अवसर नहीं मिल सका। अब इस उपचुनाव में राजनीतिक बहस का केंद्र कांग्रेस की आपत्तियों और निर्वाचन अधिकारी के फैसले पर रहेगा।
कुल मिलाकर, मध्य प्रदेश की इस राज्यसभा सीट पर बीजेपी ने निर्विरोध जीत दर्ज कर ली है। हरदीप सिंह पुरी के निर्वाचन के साथ ही उपचुनाव की तस्वीर साफ हो गई है।
