Saturday, May 30, 2026
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मॉनसून को कितना नुकसान पहुंचाएगा अल-नीनो? IMD ने जारी किया बारिश का नया अनुमान, किसानों की बढ़ी चिंता

नई दिल्ली (अनमोल संदेश डिजिटल).:

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने वर्ष 2026 के दक्षिण-पश्चिम मॉनसून को लेकर दूसरा चरण पूर्वानुमान जारी कर दिया है। ताजा अनुमान के मुताबिक इस साल देशभर में मॉनसून की बारिश लंबी अवधि के औसत (LPA) का केवल 90% रहने की संभावना है। यह स्थिति “Below Normal” यानी सामान्य से कम बारिश की श्रेणी में आती है। इससे पहले जारी पहले चरण के अनुमान में बारिश 92% रहने की बात कही गई थी, लेकिन अब इसे घटाकर 90% कर दिया गया है।मौसम विभाग के इस अनुमान ने किसानों, जल प्रबंधन एजेंसियों और सरकार की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि इस बार अल-नीनो का असर मॉनसून को कमजोर कर सकता है।

किन क्षेत्रों में कैसी रहेगी बारिश?

IMD के अनुसार देशभर में बारिश एक समान नहीं होगी। कुछ इलाकों में सामान्य वर्षा हो सकती है, जबकि कई महत्वपूर्ण कृषि क्षेत्रों में कम बारिश की आशंका जताई गई है।

पूर्वोत्तर भारत-

पूर्वोत्तर राज्यों में बारिश सामान्य रहने की संभावना है। यहां वर्षा 94% से 106% LPA के बीच रह सकती है।

मध्य और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत-

मध्य भारत और दक्षिणी प्रायद्वीपीय हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने के संकेत मिले हैं।

उत्तर-पश्चिम भारत-

उत्तर-पश्चिम भारत में इस बार सबसे कम बारिश होने की संभावना जताई गई है। इससे राजस्थान, हरियाणा और पंजाब जैसे राज्यों पर असर पड़ सकता है।

मॉनसून कोर जोन (MCZ)-

देश के प्रमुख वर्षा आधारित कृषि क्षेत्रों वाले मॉनसून कोर जोन में भी औसत से कम बारिश की संभावना है। इसका असर खरीफ फसलों की बुवाई और उत्पादन पर पड़ सकता है।

अल-नीनो बनेगा बड़ी चुनौती-

मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक प्रशांत महासागर में अल-नीनो की स्थिति तेजी से विकसित हो रही है। आमतौर पर अल-नीनो भारत में मॉनसून को कमजोर करता है और बारिश में कमी लाता है।IMD का कहना है कि इस साल अल-नीनो का असर मॉनसून पर साफ दिखाई दे सकता है। दूसरी ओर, हिंद महासागर में इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) की स्थिति फिलहाल न्यूट्रल बनी हुई है, जिससे मॉनसून को अतिरिक्त मजबूती मिलने की संभावना कम है।

जून में ज्यादा चिंता-

मौसम विभाग ने संकेत दिए हैं कि जून 2026 में बारिश सबसे कमजोर रह सकती है। यही वह समय होता है जब खरीफ फसलों की बुवाई शुरू होती है। ऐसे में शुरुआती कमजोर मॉनसून किसानों की मुश्किलें बढ़ा सकता है।

तापमान और लू का भी अलर्ट-

IMD के मुताबिक जून महीने में देश के ज्यादातर हिस्सों में अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य से ज्यादा रह सकता है।

इन राज्यों में बढ़ सकती है लू-

  • उत्तर प्रदेश
  • हरियाणा
  • पंजाब
  • बिहार
  • ओडिशा
  • छत्तीसगढ़
  • गुजरात
  • आंध्र प्रदेश
  • इन राज्यों में सामान्य से ज्यादा लू के दिन देखने को मिल सकते हैं।

यहां लू कम रहने की संभावना-

  • राजस्थान
  • झारखंड

किसानों और आम लोगों पर क्या होगा असर?

कम बारिश का सबसे बड़ा असर खरीफ फसलों पर पड़ सकता है। धान, मक्का, सोयाबीन और दालों जैसी फसलों की बुवाई और उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा जल संकट, पेयजल की कमी और बिजली उत्पादन पर भी असर पड़ने की आशंका है।मौसम विभाग ने राज्यों को पहले से तैयारी करने की सलाह दी है। IMD ने जल संरक्षण, सूखा प्रबंधन और फसल बीमा जैसी योजनाओं को मजबूत करने पर जोर दिया है।

सरकार और किसानों के लिए चेतावनी-

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अल-नीनो का प्रभाव बढ़ता है तो कई राज्यों में सूखे जैसी स्थिति बन सकती है। ऐसे में सरकार को समय रहते जल प्रबंधन और किसानों के लिए राहत योजनाओं पर काम करना होगा।IMD जुलाई के अंतिम सप्ताह में मॉनसून का अगला अपडेट जारी करेगा, जिसमें बारिश की स्थिति को लेकर और स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।

निष्कर्ष-

2026 का मॉनसून देश के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। पूर्वोत्तर भारत को छोड़कर अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश की आशंका है। अल-नीनो के सक्रिय होने से मॉनसून कमजोर पड़ सकता है, जिसका सीधा असर खेती, जल संकट और आम जनजीवन पर दिखाई देगा। ऐसे में किसानों और सरकार दोनों को सतर्क रहने की जरूरत है।

 

 

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