Anmol Sandesh News Desk, फ्रांस
अमेरिका और ईरान के बीच पिछले चार महीनों से जारी तनाव और संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में बड़ी सफलता मिली है। दोनों देशों ने बुधवार को एक शांति समझौता (MoU) पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर कर दिए, जिसके साथ ही संघर्षविराम तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इस समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद दोनों देशों के बीच जारी सैन्य और राजनीतिक टकराव को समाप्त मान लिया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस के वर्साय पैलेस में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान समझौते की हार्ड कॉपी पर भी आधिकारिक हस्ताक्षर किए।
स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित था समारोह
जानकारी के मुताबिक, समझौते पर हस्ताक्षर के लिए स्विट्जरलैंड में एक विशेष समारोह आयोजित किया जाना था, लेकिन निर्धारित कार्यक्रम से पहले ही दोनों पक्षों ने एमओयू पर हस्ताक्षर कर दिए। ऐसे में अब यह स्पष्ट नहीं है कि प्रस्तावित समारोह आयोजित होगा या नहीं।
60 दिनों तक संयम बरतने पर सहमति
ईरान की ओर से कहा गया है कि समझौते के तहत अगले 60 दिनों तक दोनों देश संयम बरतेंगे। इस अवधि में कोई भी ऐसा राजनीतिक, आर्थिक या सैन्य कदम नहीं उठाया जाएगा, जिससे समझौते या आपसी विश्वास पर नकारात्मक असर पड़े।
28 फरवरी से शुरू हुआ था संघर्ष
गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमले के बाद दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया था। इसके जवाब में ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया था।होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से वैश्विक स्तर पर तेल और गैस आपूर्ति प्रभावित हुई तथा कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला। हालांकि, नए समझौते के तहत अगले 30 दिनों के भीतर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने की बात कही गई है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था को मिल सकती है राहत
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका-ईरान समझौते से न केवल मध्य-पूर्व में तनाव कम होगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार को भी राहत मिलेगी। इससे तेल की कीमतों में स्थिरता आने और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़े दबाव में कमी की उम्मीद जताई जा रही है।
