Anmol Sandesh News Desk,भोपाल
मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में सरकार तेजी से आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने संकेत दिए हैं कि आगामी मानसून सत्र में राज्य सरकार यूसीसी विधेयक को विधानसभा में पेश कर पारित करा सकती है। इसके लिए सरकार आम जनता से भी राय ले रही है और मोबाइल संदेशों के माध्यम से ‘हां’ या ‘ना’ में सुझाव मांगे जा रहे हैं।राज्य सरकार द्वारा तैयार किए जा रहे यूसीसी का मसौदा विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, संपत्ति अधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक विषयों पर आधारित है। सरकार का दावा है कि इससे नागरिकों को कानूनी जटिलताओं और लंबी अदालती प्रक्रियाओं से राहत मिलेगी।
7 सदस्यीय समिति ने तैयार किया मसौदा
यूसीसी का प्रारूप Ranjana Prakash Desai की अध्यक्षता में गठित सात सदस्यीय समिति ने तैयार किया है। समिति ने विभिन्न सामाजिक, कानूनी और संवैधानिक पहलुओं का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है।
लिव-इन रिलेशनशिप को मिलेगा कानूनी संरक्षण
प्रस्तावित यूसीसी में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर विशेष प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत लिव-इन संबंधों से जन्म लेने वाले बच्चों को पूर्ण कानूनी मान्यता और संरक्षण मिलेगा। ऐसे बच्चों को माता-पिता की संपत्ति में जैविक उत्तराधिकार का अधिकार भी प्राप्त होगा।
साथ ही, यदि लिव-इन संबंध समाप्त होता है तो महिला को वित्तीय सहायता और कानूनी सुरक्षा उपलब्ध कराने का प्रावधान भी प्रस्तावित किया गया है।
महिला-पुरुष को संपत्ति में समान अधिकार
प्रस्तावित कानून के तहत धर्म और लिंग के आधार पर भेदभाव समाप्त करने पर जोर दिया गया है। महिला और पुरुष दोनों को संपत्ति में समान अधिकार दिए जाने की तैयारी है। इसके अलावा एकतरफा या भेदभावपूर्ण तलाक संबंधी प्रावधानों को खत्म कर समान प्रक्रिया लागू की जा सकती है।
सभी धर्मों के लिए एक समान तलाक और भरण-पोषण नियम
ड्राफ्ट के अनुसार तलाक को वैध मानने के लिए उसका न्यायालय में पंजीकरण आवश्यक होगा। तलाक के बाद गुजारा भत्ता और भरण-पोषण के नियम भी सभी धर्मों के लिए समान बनाए जाने का प्रस्ताव है, ताकि सभी नागरिकों को एक समान कानूनी अधिकार मिल सकें।
मानसून सत्र में आ सकता है विधेयक
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि सरकार यूसीसी को लेकर गंभीर है और राजनीतिक विरोध के बावजूद पीछे हटने वाली नहीं है। माना जा रहा है कि आगामी मानसून सत्र में इस ऐतिहासिक विधेयक को विधानसभा में पेश किया जा सकता है।यदि यह कानून लागू होता है, तो मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता लागू करने वाले राज्यों की सूची में शामिल हो जाएगा और विवाह, तलाक, उत्तराधिकार तथा लिव-इन संबंधों से जुड़े नियमों में व्यापक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
