Anmol Sandesh News Desk,दतिया/भोपाल
दतिया विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा टिकट नहीं मिलने के बाद पहली बार पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने मीडिया के सामने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने पार्टी के फैसले को स्वीकार करते हुए अपने समर्थकों से शांति बनाए रखने और किसी भी तरह के उग्र प्रदर्शन से बचने की अपील की।
“टिकट देना पार्टी का निर्णय है”
नरोत्तम मिश्रा ने कहा, “मैंने कल भी विस्तार से कहा था और आज भी कह रहा हूं कि टिकट देना पार्टी का निर्णय है। मैंने सोशल मीडिया पर वीडियो और तस्वीरें देखी हैं, जिनमें लोग विरोध कर रहे हैं, मिट्टी का तेल और पेट्रोल फेंक रहे हैं। यह तरीका बिल्कुल गलत है।”उन्होंने कार्यकर्ताओं से भावुक अपील करते हुए कहा कि पार्टी के भीतर अपनी बात रखने के लिए तय मंच और प्रक्रिया है, इसलिए किसी भी परिस्थिति में कानून हाथ में नहीं लेना चाहिए।
कार्यकर्ताओं से की शांति बनाए रखने की अपील
पूर्व गृहमंत्री ने कहा कि सभी कार्यकर्ता अनुशासन बनाए रखें और ऐसा कोई कदम न उठाएं जिससे पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचे। उन्होंने दोहराया कि लोकतांत्रिक संगठन में अपनी बात रखने का एक उचित तरीका होता है और उसी का पालन किया जाना चाहिए।
आशुतोष तिवारी को टिकट मिलने के बाद भड़का विरोध
भाजपा ने दतिया उपचुनाव के लिए आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार घोषित किया है। इसके बाद नरोत्तम मिश्रा के समर्थक बड़ी संख्या में सड़कों पर उतर आए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।प्रदर्शनकारियों ने ग्वालियर-झांसी हाईवे को जाम कर दिया, जिससे करीब 25 किलोमीटर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया। यह प्रदर्शन पूरी रात चला और पुलिस व प्रशासन की समझाइश के बाद करीब 10 घंटे बाद यातायात सामान्य हो सका।

पुलिस से झड़प, पथराव और आंसू गैस
प्रदर्शन के दौरान हालात तनावपूर्ण हो गए। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई तथा पुलिस पर पथराव किया गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले भी छोड़े।इस घटना में एसडीओपी, थाना प्रभारी समेत कई पुलिस अधिकारी और जवान घायल हुए। इसके बाद पूरे दतिया जिले में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई।
फिलहाल स्थिति सामान्य, प्रशासन सतर्क
प्रशासन के अनुसार फिलहाल दतिया में स्थिति सामान्य है, लेकिन संवेदनशील इलाकों में पुलिस लगातार गश्त कर रही है। पूरे घटनाक्रम पर पार्टी नेतृत्व और प्रशासन दोनों की नजर बनी हुई है।दतिया उपचुनाव अब केवल चुनावी मुकाबला नहीं, बल्कि भाजपा के लिए संगठनात्मक अनुशासन और राजनीतिक संदेश की भी बड़ी परीक्षा बन गया है।
