Anmol Sandesh News Desk,नई दिल्ली
पाकिस्तान में होने वाले आगामी शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। सम्मेलन की मेजबानी इस बार पाकिस्तान करने जा रहा है और इसी के साथ सबसे बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बैठक में शामिल होने के लिए पाकिस्तान जाएंगे? हालांकि, अभी तक भारत सरकार की ओर से प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। माना जा रहा है कि अंतिम फैसला सुरक्षा, कूटनीतिक परिस्थितियों और क्षेत्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए लिया जाएगा।

SCO Summit को लेकर बढ़ी चर्चाएं
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंच है, जिसमें भारत, पाकिस्तान, चीन, रूस समेत कई सदस्य देश शामिल हैं। इस बार सम्मेलन की मेजबानी पाकिस्तान करेगा, जिसके चलते प्रधानमंत्री मोदी की संभावित यात्रा को लेकर राजनीतिक और कूटनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
भारत सरकार का क्या कहना है?
भारत सरकार ने फिलहाल प्रधानमंत्री की भागीदारी को लेकर कोई अंतिम निर्णय सार्वजनिक नहीं किया है। विदेश मंत्रालय की ओर से भी संकेत दिया गया है कि किसी भी उच्च स्तरीय प्रतिनिधित्व को लेकर जानकारी उचित समय पर साझा की जाएगी।सरकार का फैसला भारत की विदेश नीति, सुरक्षा स्थिति और क्षेत्रीय समीकरणों को ध्यान में रखकर लिया जाएगा।
पाकिस्तान ने भेजा सभी नेताओं को निमंत्रण
पाकिस्तान की ओर से SCO के सभी सदस्य देशों के नेताओं को सम्मेलन में शामिल होने के लिए आमंत्रण भेजा गया है। इसी के बाद प्रधानमंत्री मोदी के संभावित पाकिस्तान दौरे को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।हालांकि भारत और पाकिस्तान के बीच पिछले कुछ वर्षों से संबंधों में तनाव रहा है। सीमा सुरक्षा, आतंकवाद और अन्य मुद्दों के कारण दोनों देशों के रिश्ते चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं।
अगर मोदी जाते हैं तो क्यों होगा बड़ा घटनाक्रम?
यदि प्रधानमंत्री मोदी SCO Summit में हिस्सा लेने पाकिस्तान जाते हैं, तो इसे भारत-पाकिस्तान संबंधों के लिहाज से एक बड़ा कूटनीतिक कदम माना जाएगा।वहीं, अगर प्रधानमंत्री खुद शामिल नहीं होते हैं तो भारत की ओर से किसी वरिष्ठ मंत्री या अधिकारी को प्रतिनिधि के रूप में भेजे जाने की संभावना भी बनी रह सकती है।
अब किस बात का इंतजार?
फिलहाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पाकिस्तान यात्रा को लेकर स्थिति साफ नहीं है। अब सभी की नजर भारत सरकार के अंतिम फैसले और विदेश मंत्रालय की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हुई है।SCO Summit के जरिए क्षेत्रीय सुरक्षा, व्यापार और रणनीतिक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
