Anmol Sandesh News Desk,श्रीनगर
जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी होने के बावजूद आतंकी हमले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। पिछले 10 दिनों में तीन लोगों की हत्या ने एक बार फिर घाटी की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ताजा हमला कुलगाम जिले में हुआ, जहां ईंट-भट्ठे पर काम कर रहे छत्तीसगढ़ के दो प्रवासी मजदूरों को आतंकियों ने गोली मार दी। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।

10 दिनों में तीसरी जान गई
इससे पहले अनंतनाग में आतंकियों ने जम्मू-कश्मीर पुलिस के एक जवान को निशाना बनाया था, जिसमें उनकी जान चली गई। लगातार हो रही इन घटनाओं से सुरक्षा एजेंसियों की चुनौती और बढ़ गई है।
21 महीनों बाद प्रवासी मजदूरों पर बड़ा हमला
कुलगाम की घटना को करीब 21 महीनों में प्रवासी मजदूरों पर पहला बड़ा आतंकी हमला माना जा रहा है। इससे पहले अक्टूबर 2024 में भी एक प्रवासी श्रमिक पर हमला हुआ था। ताजा हमले के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और हमलावरों की तलाश में व्यापक तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।
सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर
जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि हमले के पीछे कौन-सा आतंकी नेटवर्क सक्रिय है और क्या उन्हें स्थानीय स्तर पर किसी तरह की मदद मिली। शुरुआती संकेत बताते हैं कि आतंकी संगठन आम नागरिकों और प्रवासी कामगारों को निशाना बनाकर भय का माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
सुरक्षा पर उठे सवाल
घाटी में हाई अलर्ट, भारी सुरक्षा बलों की तैनाती और लगातार ऑपरेशन के बावजूद आतंकी घटनाओं का होना चिंता का विषय बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि संवेदनशील इलाकों में निगरानी, खुफिया तंत्र और स्थानीय समन्वय को और मजबूत करने की जरूरत है।गौरतलब है कि इससे पहले अप्रैल में भी जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकी हमले में पर्यटकों को निशाना बनाया गया था। लगातार हो रहे हमलों ने सुरक्षा एजेंसियों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।
