Anmol Sandesh News Desk, मुंबई
तहलका मैगज़ीन के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को बॉम्बे हाईकोर्ट ने वर्ष 2013 के चर्चित यौन उत्पीड़न मामले में बड़ा झटका देते हुए दोषी करार दिया है। अदालत ने उन्हें 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। हाईकोर्ट ने इस मामले में गोवा सेशंस कोर्ट के बरी करने वाले फैसले को पलट दिया।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला 2013 का है, जब एक महिला पत्रकार ने आरोप लगाया था कि गोवा के ग्रैंड हयात होटल की लिफ्ट में तरुण तेजपाल ने उसके साथ यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म किया।
मामला सामने आने के बाद:
- तरुण तेजपाल ने तहलका के संपादक पद से इस्तीफा दिया।
- उन्हें पुलिस ने गिरफ्तार किया।
- करीब एक साल बाद उन्हें जमानत मिल गई।
- 2017 में ट्रायल शुरू हुआ।
- बाद में गोवा सेशंस कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया।
हाईकोर्ट ने पलटा निचली अदालत का फैसला
गोवा सेशंस कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए पीड़िता ने हाईकोर्ट का रुख किया। जस्टिस डॉ. नीला गोखले और जस्टिस अमित जामदार की खंडपीठ ने मामले की अंतिम सुनवाई 30 जुलाई 2026 को पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था।अब 6 अगस्त 2026 को हाईकोर्ट ने निचली अदालत का फैसला पलटते हुए तरुण तेजपाल को दोषी ठहराया और 10 साल की सजा सुनाई।
क्यों अहम है यह फैसला?
यह फैसला लंबे समय से चल रहे हाई-प्रोफाइल यौन उत्पीड़न मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी मोड़ माना जा रहा है। साथ ही यह भी दर्शाता है कि अपीलीय अदालतें निचली अदालत के फैसलों की समीक्षा कर उन्हें बदल सकती हैं, यदि उन्हें ऐसा करने के पर्याप्त कानूनी आधार मिलते हैं।
