Anmol Sandesh News Desk, नई दिल्ली/लखनऊ
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच कांग्रेस ने अपने संगठन में बड़ा फेरबदल किया है। पार्टी ने लंबे समय से जिम्मेदारी संभाल रहे छह सह-प्रभारियों को हटाकर नई टीम की नियुक्ति की है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस बदलाव को कांग्रेस की चुनावी रणनीति में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
नई टीम को मिली जिम्मेदारी
कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश के लिए जिन नए सह-प्रभारियों की नियुक्ति की है, उनमें शामिल हैं:
- अभिषेक दत्त
- कुणाल चौधरी
- जगदीश चंद्र जांगिड़
- संजीव आर्य
- वरुण चौधरी
- अब्दुल हन्नान
ये सभी नेता अब प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम के साथ मिलकर संगठन को मजबूत करने और 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति तैयार करेंगे।
इन नेताओं की हुई विदाई
पार्टी ने पूर्व सह-प्रभारियों धीरज गुर्जर, नीलांशु चतुर्वेदी, प्रदीप नरवाल, राजेश तिवारी, सत्यनारायण पटेल और तौकीर आलम को उनकी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया है।
क्या है इस बदलाव का राजनीतिक संदेश?
साल 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले प्रियंका गांधी वाड्रा को उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया था। उस समय उनके साथ राष्ट्रीय सचिवों और सह-प्रभारियों की एक टीम बनाई गई थी, जिसने संगठन और चुनावी रणनीति पर काम किया।हालांकि प्रियंका गांधी ने 2023 में उत्तर प्रदेश का प्रभार छोड़ दिया था, लेकिन उनकी बनाई टीम संगठन में सक्रिय बनी हुई थी। अब कांग्रेस ने नए चेहरों को जिम्मेदारी देकर संगठन को नई दिशा देने की कोशिश की है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव पार्टी के संगठनात्मक पुनर्गठन का हिस्सा है। हालांकि, यह कहना कि यह किसी विशेष गुट की “छुट्टी” है, राजनीतिक व्याख्या है, आधिकारिक तौर पर कांग्रेस ने ऐसा कोई कारण नहीं बताया है।
बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने पर फोकस
नई टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करना, कार्यकर्ताओं को जोड़ना और 2027 विधानसभा चुनाव के लिए मजबूत चुनावी ढांचा तैयार करना होगी।पार्टी ने अलग-अलग राज्यों और सामाजिक समूहों से नेताओं को शामिल कर क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन साधने की भी कोशिश की है। यही टीम आने वाले समय में प्रदेश कांग्रेस की नई कार्यकारिणी और चुनावी तैयारियों में अहम भूमिका निभाएगी।
2024 की सफलता को 2027 तक ले जाने की तैयारी
2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन के बाद कांग्रेस का प्रदर्शन उत्तर प्रदेश में पहले की तुलना में बेहतर रहा था। अब पार्टी उसी राजनीतिक माहौल को विधानसभा चुनाव तक बनाए रखना चाहती है।उत्तर प्रदेश में भाजपा की मजबूत चुनावी मशीनरी के सामने कांग्रेस के लिए संगठन का विस्तार, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और प्रभावी गठबंधन रणनीति सबसे बड़ी चुनौती मानी जा रही है।
