Anmol Sandesh News Desk,नई दिल्ली
भारतीय वायुसेना की एयरलिफ्ट और लॉजिस्टिक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्रालय ने करीब ₹1 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट के तहत 60 Medium Transport Aircraft (MTA) खरीदने के लिए टेंडर जारी किया है। इस पूरी प्रक्रिया में भारतीय कंपनियों को अहम भूमिका देने पर जोर है।इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य वायुसेना के पुराने हो चुके ट्रांसपोर्ट बेड़े को आधुनिक विमानों से बदलना और सैनिकों, हथियारों, उपकरणों तथा जरूरी सैन्य सामान को तेजी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने की क्षमता बढ़ाना है।
60 नए विमान क्यों जरूरी ?
भारतीय वायुसेना लंबे समय से अपने पुराने An-32 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट को बदलने की जरूरत महसूस कर रही है। नए Medium Transport Aircraft आने के बाद वायुसेना की रणनीतिक और सामरिक एयरलिफ्ट क्षमता को बड़ा बढ़ावा मिल सकता है।इन विमानों का इस्तेमाल सिर्फ सैनिकों और सामान की ढुलाई तक सीमित नहीं रहेगा। जरूरत के मुताबिक इन्हें सैन्य उपकरणों की तेज आवाजाही, आपातकालीन अभियानों और संभावित रूप से हवा में ईंधन भरने वाले टैंकर मिशन के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
सबसे खास बात—भारत में बनेगा बड़ा हिस्सा
इस डील की सबसे बड़ी खासियत इसका Make in India फोकस है। रिपोर्टों के अनुसार करीब 20% विमान सीधे तैयार स्थिति में हासिल किए जा सकते हैं, जबकि बाकी विमान भारत में निर्माण की दिशा में जाएंगे। घरेलू उत्पादन वाले विमानों में 60% से अधिक स्वदेशी सामग्री का लक्ष्य बताया गया है।यानी यह सिर्फ विमान खरीदने की डील नहीं होगी, बल्कि भारत में एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग और डिफेंस सप्लाई चेन को बढ़ावा देने वाला बड़ा प्रोजेक्ट भी बन सकता है।
Tata, Mahindra और HAL की अहम भूमिका
इस कार्यक्रम के लिए कई भारतीय कंपनियों को प्रक्रिया में शामिल किया गया है। इनमें Hindustan Aeronautics Limited (HAL), Tata और Mahindra प्रमुख नाम हैं। रिपोर्टों के मुताबिक भारतीय कंपनियां इस कार्यक्रम में लीड भूमिका निभाएंगी।अलग-अलग भारतीय कंपनियां विदेशी विमान निर्माताओं के साथ साझेदारी के जरिए इस प्रोजेक्ट में उतर सकती हैं। रिपोर्टों में Tata–Lockheed Martin और Mahindra–Embraer जैसी संभावित साझेदारियों का उल्लेख किया गया है।
पहाड़ों से लेकर द्वीपों तक बढ़ेगी ऑपरेशनल क्षमता
भारत की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए आधुनिक ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट बेहद महत्वपूर्ण हैं। हिमालयी सीमाओं, दूरदराज के इलाकों, द्वीप क्षेत्रों और आपातकालीन परिस्थितियों में सड़क या समुद्री रास्ते की तुलना में एयरलिफ्ट के जरिए सैनिकों और जरूरी सामान को कहीं तेजी से पहुंचाया जा सकता है।युद्ध जैसी स्थिति में भी ये विमान सैनिकों और सैन्य उपकरणों की तेजी से तैनाती में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
फाइटर जेट्स के लिए भी हो सकते हैं उपयोगी
MTA कार्यक्रम की एक अहम विशेषता यह भी है कि इन विमानों को भविष्य में एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग टैंकर की भूमिका के लिए इस्तेमाल करने की क्षमता पर भी विचार किया जा रहा है। ऐसा होने पर लंबी दूरी के अभियानों में लड़ाकू विमानों की ऑपरेशनल क्षमता बढ़ सकती है।
वायुसेना के बड़े आधुनिकीकरण अभियान का हिस्सा
60 MTA का यह प्रोजेक्ट अकेला बड़ा विमान सौदा नहीं है। भारतीय वायुसेना अपने पुराने बेड़े को आधुनिक बनाने के लिए कई बड़े कार्यक्रमों पर आगे बढ़ रही है।वायुसेना ने 114 नए मल्टीरोल फाइटर एयरक्राफ्ट की खरीद की प्रक्रिया भी शुरू की है। इसके अलावा 100 से ज्यादा ट्रेनर एयरक्राफ्ट शामिल करने की योजना पर भी काम चल रहा है।इस तरह फाइटर जेट्स, ट्रेनर विमानों और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट—तीनों क्षेत्रों में आधुनिकीकरण पर जोर दिया जा रहा है।
बड़ी तस्वीर क्या है?
₹1 लाख करोड़ का यह MTA प्रोजेक्ट भारतीय वायुसेना की लॉजिस्टिक रीढ़ को मजबूत करने के साथ-साथ देश में सैन्य विमान निर्माण की क्षमता बढ़ाने का मौका भी है।अगर इस प्रोजेक्ट का बड़ा हिस्सा भारत में सफलतापूर्वक निर्मित होता है, तो इससे नौकरी, निजी रक्षा उद्योग, एयरोस्पेस सप्लाई चेन और स्वदेशी तकनीकी क्षमता को भी बढ़ावा मिल सकता है।
