Anmol Sandesh News Desk, नई दिल्ली
उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद हुए कथित ‘शुद्धिकरण’ को लेकर सियासी विवाद अब कांग्रेस के अंदर भी चर्चा का विषय बन गया है। 19 अगस्त को हुई कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक में खड़गे ने इस मुद्दे पर अपनी ही पार्टी के नेताओं से नाराजगी जताई और कथित तौर पर कहा कि इस मामले में उन्हें पार्टी ने अकेला छोड़ दिया।हालांकि, CWC में खड़गे की इस नाराजगी को लेकर सार्वजनिक रूप से विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इसलिए इस दावे को पार्टी सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के तौर पर देखा जाना चाहिए।
हल्द्वानी में आखिर हुआ क्या था?
दरअसल, 8 अगस्त 2026 को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस की ‘विजय शंखनाद’ रैली आयोजित हुई थी। इसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए थे।रैली के दो दिन बाद, 10 अगस्त को श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास संगठन से जुड़े लोगों ने रामलीला मैदान में हवन किया। संगठन की ओर से इसे मैदान की ‘पवित्रता बहाल’ करने की प्रक्रिया बताया गया। संगठन के लोगों ने रैली के दौरान लगाए गए कुछ नारों और राजनीतिक कार्यक्रम के लिए रामलीला मैदान के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई थी।यही हवन बाद में ‘शुद्धिकरण’ विवाद बन गया। कांग्रेस ने इसे खड़गे और दलित समाज के अपमान से जोड़ते हुए भाजपा पर निशाना साधा।
राज्यसभा में खड़गे ने उठाया था मुद्दा
13 अगस्त को खड़गे ने राज्यसभा में इस मामले को जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने कहा कि उनके भाषण में किसी धर्म या समुदाय का नाम नहीं लिया गया था, फिर भी उनके कार्यक्रम के बाद मंच का कथित तौर पर ‘शुद्धिकरण’ किया गया।खड़गे ने इसे लोकतंत्र और संविधान की भावना के खिलाफ बताया और इस मामले में कार्रवाई की मांग की।मामला संसद में पहुंचने के बाद BJP अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने भी इस तरह की घटना को उचित नहीं बताया। नड्डा ने कहा कि भाजपा ऐसी गतिविधियों का समर्थन नहीं करती और मामले की जांच कराई जाएगी।
अब CWC में क्यों छलका खड़गे का दर्द?
हल्द्वानी विवाद के कुछ दिन बाद हुई कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में खड़गे ने कथित तौर पर पार्टी के अंदर इस मुद्दे को पर्याप्त मजबूती से नहीं उठाए जाने पर नाराजगी जाहिर की।खड़गे की शिकायत का सार यह बताया जा रहा है कि जब उन पर व्यक्तिगत और सामाजिक रूप से गंभीर टिप्पणी या कार्रवाई हुई, तब पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने सार्वजनिक तौर पर उतना मुखर समर्थन नहीं किया, जितनी उनसे उम्मीद थी।उन्होंने बैठक में किसी एक नेता का नाम लेकर हमला नहीं किया, बल्कि उन नेताओं पर सवाल उठाए जिन्हें मीडिया में लगातार जगह मिलती है। उनका सवाल था कि जब मामला इतना गंभीर था तो पार्टी के वरिष्ठ नेता इसे मजबूती से क्यों नहीं उठा पाए?
वेणुगोपाल ने दी सफाई
खड़गे की नाराजगी के दौरान कांग्रेस संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल की ओर से सफाई दी गई कि पार्टी के नेताओं ने इस मामले को उठाया था।लेकिन रिपोर्टों के मुताबिक, खड़गे इस जवाब से पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आए। यही वजह है कि CWC की बैठक में उनका असंतोष चर्चा का विषय बन गया।
बीजेपी का क्या कहना है?
BJP की ओर से इस पूरे मामले में यह स्पष्ट किया गया है कि पार्टी कथित ‘शुद्धिकरण’ जैसी कार्रवाई का समर्थन नहीं करती। जेपी नड्डा ने संसद में घटना को दुखद बताया और जांच का भरोसा दिया।वहीं, भाजपा नेताओं की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि हवन करने वाले संगठन ने इसे राजनीतिक मंच के इस्तेमाल और कथित नारों के विरोध में किया था, न कि खड़गे की जाति को लेकर। इस दावे और कांग्रेस के आरोपों के बीच विवाद अब राजनीतिक मुद्दा बन चुका है।
विवाद का राजनीतिक असर
इस पूरे मामले ने एक साथ जाति, सामाजिक समानता, धार्मिक आस्था और राजनीतिक मर्यादा जैसे कई संवेदनशील सवाल खड़े कर दिए हैं।कांग्रेस इसे दलित सम्मान और संविधान के मूल्यों से जोड़ रही है, जबकि भाजपा इस घटना से अपना संस्थागत संबंध होने से इनकार करते हुए जांच की बात कर रही है।सबसे दिलचस्प बात यह है कि अब विवाद केवल BJP बनाम कांग्रेस तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि CWC बैठक में खड़गे की कथित नाराजगी ने कांग्रेस के भीतर भी इस सवाल को जन्म दे दिया है कि पार्टी अपने ही राष्ट्रीय अध्यक्ष के मुद्दे को लेकर कितनी मजबूती से उनके साथ खड़ी हुई।
