Anmol Sandesh News Desk, नेपाल
नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने बड़े इलाके को तबाह कर दिया है। भोटेकोशी नदी में आई अचानक बाढ़ और उससे जुड़े मलबे के सैलाब ने नेपाल-चीन सीमा क्षेत्र सहित कई इलाकों में भारी तबाही मचाई। राहत और बचाव अभियान के बीच मृतकों और लापता लोगों का आंकड़ा लगातार बदल रहा है। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार मृतकों की संख्या 900 के पार पहुंच गई है, जबकि हजारों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल सरकार की 30 अगस्त की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक उस समय तक 734 शव बरामद किए जा चुके थे और करीब 2,498 लोग अब भी लापता थे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि खोज और सत्यापन अभियान जारी रहने के कारण आंकड़ों में लगातार बदलाव हो सकता है।
शवों की पहचान बनी सबसे बड़ी चुनौती
बाढ़ और मलबे के बीच राहत दलों को लगातार शव मिल रहे हैं। इनमें कई शवों की हालत बेहद खराब होने के कारण तत्काल पहचान करना मुश्किल हो रहा है। ऐसे शवों की पहचान के लिए प्रशासन फोरेंसिक प्रक्रिया और DNA सैंपलिंग का सहारा ले रहा है। मृतकों से जुड़े उपलब्ध रिकॉर्ड और नमूनों को सुरक्षित रखा जा रहा है, ताकि बाद में DNA मिलान के जरिए परिवारों तक सही जानकारी पहुंचाई जा सके। बड़ी संख्या में शव मिलने के कारण अस्पतालों और शवगृहों पर भी दबाव बढ़ गया है। रिपोर्टों के मुताबिक कुछ स्थानों पर शवगृहों की क्षमता से अधिक शव पहुंचने के कारण प्रशासन को वैकल्पिक व्यवस्थाएं करनी पड़ी हैं।
सामूहिक अंतिम संस्कार और दफन की प्रक्रिया क्यों?
आपदा के बाद मिले अज्ञात और लंबे समय से पड़े शवों की स्थिति बिगड़ने के कारण प्रशासन के सामने उन्हें सुरक्षित तरीके से संभालना बड़ी चुनौती बन गया है। रिपोर्टों के अनुसार चितवन क्षेत्र में बड़ी संख्या में अज्ञात शवों के सामूहिक दफन की प्रक्रिया शुरू की गई है। हालांकि, प्रशासन मृतकों की पहचान की संभावना खत्म नहीं करना चाहता। इसलिए शवों से जुड़े जरूरी रिकॉर्ड और DNA नमूने सुरक्षित रखे जा रहे हैं। इसका उद्देश्य यह है कि भविष्य में किसी परिवार को अपने लापता सदस्य की पहचान करनी हो तो उपलब्ध वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर उसकी पुष्टि की जा सके।
बीमारी फैलने का भी बढ़ रहा खतरा
बाढ़ के बाद सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक स्वास्थ्य संकट भी है। मलबे, दूषित पानी, मृत पशुओं और लंबे समय तक खुले में पड़े शवों के कारण प्रभावित क्षेत्रों में संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। इसी वजह से प्रशासन राहत शिविरों में साफ पानी, भोजन, चिकित्सा सहायता और शवों के सुरक्षित प्रबंधन पर जोर दे रहा है। हालांकि यह कहना सही नहीं होगा कि शवों के कारण निश्चित रूप से कोई महामारी फैल जाएगी। लेकिन आपदा के बाद स्वच्छता और शव प्रबंधन की उचित व्यवस्था सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद जरूरी होती है।
रसुवा सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में
नेपाल के रसुवा जिले और भोटेकोशी नदी के आसपास का क्षेत्र इस आपदा से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। बाढ़ ने सड़कें, पुल, बिजली परियोजनाएं और दूसरी बुनियादी सुविधाओं को नुकसान पहुंचाया। कई जगहों पर भारी मलबा जमा होने के कारण राहत दलों की आवाजाही मुश्किल बनी हुई है। लगातार बारिश और नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव ने बचाव अभियान को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। नेपाल सरकार ने रसुवा के साथ-साथ नुवाकोट, धादिंग, गोरखा और चितवन समेत प्रभावित क्षेत्रों में खोज एवं राहत अभियान तेज किया है।
हाइड्रोपावर टनल में फंसे लोगों को बचाने की कोशिश
इस आपदा के बाद सबसे कठिन रेस्क्यू ऑपरेशनों में से एक हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे लोगों को निकालना है। नेपाल सरकार के मुताबिक भारत, चीन और दक्षिण कोरिया से विशेष टनल-रेस्क्यू विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। भारत की 11 सदस्यीय तकनीकी टीम और चीन की टीम को सुरंगों में फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए लगाया गया है। कुछ परियोजनाओं में सुरंगों तक पहुंचने के रास्ते मलबे और पानी से बाधित हैं। ऐसे में रेस्क्यू टीमों को पहले रास्ता सुरक्षित करना पड़ रहा है और फिर अंदर तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ
नेपाल की त्रासदी में भारत की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है। भारत ने टनल-रेस्क्यू विशेषज्ञों के साथ फोरेंसिक विशेषज्ञों को नेपाल भेजा है। नेपाल सरकार की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक भारत से 18 फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम DNA विश्लेषण और मृतकों की पहचान में सहायता के लिए पहुंच चुकी है। इसके अलावा भारत की तकनीकी टीम सुरंगों में बचाव अभियान में भी मदद कर रही है। भारत की ओर से राहत सामग्री और अन्य आवश्यक उपकरण भी नेपाल भेजे गए हैं।
2500 के करीब लोग अब भी लापता
आपदा की सबसे बड़ी चिंता सिर्फ मृतकों की संख्या नहीं, बल्कि हजारों लोगों का अब तक पता नहीं चलना है। नेपाल सरकार की 30 अगस्त की आधिकारिक ब्रीफिंग में करीब 2,498 लोगों के लापता होने की जानकारी दी गई थी। इनमें नेपाली नागरिकों के साथ विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। सरकार ने कहा कि 400 से ज्यादा विदेशी नागरिकों के अब भी लापता होने की जानकारी है। लापता लोगों के परिवार लगातार राहत केंद्रों और प्रशासनिक कार्यालयों से संपर्क कर रहे हैं। कई परिवारों को अब भी अपने परिजनों की कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिल पाई है।
अब नई बाढ़ का खतरा क्यों?
नेपाल में बचाव अभियान अभी खत्म भी नहीं हुआ है और नई बाढ़ का खतरा चिंता बढ़ा रहा है। प्रभावित क्षेत्र में बारिश और नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। नेपाल सरकार ने नदी तंत्र और डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में बाढ़ के खतरे की निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों को अतिरिक्त बाढ़ की स्थिति के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। भोटेकोशी नदी का जलस्तर दोबारा बढ़ने की खबरों ने चिंता और बढ़ा दी है। ऐसे में राहत दलों के लिए एक साथ दो चुनौतियां हैं—लापता लोगों को ढूंढना और बचावकर्मियों को नई बाढ़ से सुरक्षित रखना।
19 हजार सुरक्षाकर्मी और 16 हेलिकॉप्टर अभियान में
नेपाल सरकार ने राहत और बचाव अभियान के लिए बड़े स्तर पर संसाधन लगाए हैं। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक प्रभावित इलाकों में करीब 19 हजार सुरक्षाकर्मी और 16 हेलिकॉप्टर तैनात किए गए हैं। अब प्राथमिकता लापता लोगों की तलाश, फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालना, घायलों का उपचार और प्रभावित परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाना है।
परिवारों के लिए सबसे मुश्किल दौर
नेपाल की इस त्रासदी में हजारों परिवार अपने रिश्तेदारों की खबर का इंतजार कर रहे हैं। कुछ लोग शव मिलने के बावजूद पहचान न होने के कारण अपने परिजनों की तलाश में हैं, जबकि कई परिवारों को अब भी यह पता नहीं कि उनके प्रियजन जीवित हैं या नहीं। DNA सैंपलिंग और फोरेंसिक जांच ऐसे परिवारों के लिए भविष्य में पहचान की एक महत्वपूर्ण उम्मीद बनी हुई है।
नेपाल त्रासदी: एक नजर में
* आपदा: 26 अगस्त 2026 की विनाशकारी फ्लैश फ्लड
* सबसे प्रभावित क्षेत्र: रसुवा और भोटेकोशी नदी क्षेत्र समेत कई जिले
* मृतक: आंकड़े लगातार अपडेट हो रहे हैं; अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में 900+ तक का आंकड़ा
* लापता: करीब 2,500
* बचाव: 16 हेलिकॉप्टर और करीब 19,000 सुरक्षाकर्मी
* DNA पहचान: भारत के 18 फोरेंसिक विशेषज्ञ मदद कर रहे हैं
* टनल रेस्क्यू: भारत, चीन और दक्षिण कोरिया के विशेषज्ञ जुटे
* भारत की मदद: फोरेंसिक, टनल-रेस्क्यू और राहत सहायता
* नया खतरा: बारिश और नदी का बढ़ता जलस्तर
असली डर अभी खत्म नहीं हुआ
नेपाल में बाढ़ का पानी भले कई इलाकों में उतरने लगा हो, लेकिन संकट अभी टला नहीं है। हजारों लोग लापता हैं, कई शवों की पहचान बाकी है और नदियों के जलस्तर में फिर बढ़ोतरी का खतरा बना हुआ है। ऐसे में अगले कुछ दिन नेपाल के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे। बचाव दलों की नजर अब उन इलाकों पर है जहां लोग मलबे, सुरंगों और बाढ़ के बीच फंसे हो सकते हैं। वहीं प्रशासन के सामने मृतकों की पहचान, सुरक्षित अंतिम प्रक्रिया और संभावित नए सैलाब से लोगों को बचाने की दोहरी चुनौती है।
