Monday, August 31, 2026
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ग्वालियर में फर्जी SIM का बड़ा नेटवर्क, 110 सिम से 12 राज्यों में 14 करोड़ की साइबर ठगी, दिसंबर 2025 से अगस्त 2026 तक चल रहा फर्जी सिम का खेल

Anmol Sandesh News Desk, ग्वालियर

मध्य प्रदेश के ग्वालियर से सामने आया साइबर ठगी का मामला फर्जी SIM के बड़े नेटवर्क की ओर इशारा कर रहा है। पुलिस के मुताबिक अलग-अलग सिम वेंडरों से जारी कराई गई करीब 110 फर्जी SIM का इस्तेमाल कर 12 राज्यों में 180 लोगों से 14 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी की गई। जांच में सामने आया कि इस नेटवर्क का असर सिर्फ ग्वालियर या मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं था, बल्कि देश के कई राज्यों और शहरों तक इसका कनेक्शन फैला हुआ था।

दस्तावेज-बायोमेट्रिक का गलत इस्तेमाल

पुलिस जांच में आरोप है कि कुछ लोगों के दस्तावेज और बायोमेट्रिक जानकारी का इस्तेमाल उनकी जानकारी के बिना SIM जारी करने में किया गया। इन SIM का इस्तेमाल कथित तौर पर दिसंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच साइबर अपराधों के लिए किया गया। जिन लोगों के नाम पर SIM जारी हुईं, उनमें से कई को इस बात की जानकारी तक नहीं थी कि उनके दस्तावेजों पर मोबाइल कनेक्शन एक्टिव हैं।

NCRP डेटा से खुली नेटवर्क की परतें

साइबर अपराधों से जुड़े NCRP डेटा की जांच के दौरान पुलिस को इन SIM और अलग-अलग ठगी की शिकायतों के बीच कनेक्शन मिला। इसके बाद पुलिस ने ऑपरेशन फास्ट’ के तहत जांच आगे बढ़ाई और फर्जी SIM जारी करने वाले वेंडरों तथा उनसे जुड़े लोगों पर कार्रवाई शुरू की। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि SIM जारी कराने के पीछे कौन-कौन से बिचौलिए सक्रिय थे और इन कनेक्शनों को वास्तविक साइबर ठगों तक कौन पहुंचाता था।

12 राज्यों तक फैला ठगी का नेटवर्क

पुलिस के मुताबिक ग्वालियर से जारी इन SIM का इस्तेमाल कई राज्यों में दर्ज साइबर ठगी के मामलों में पाया गया है। इनमें मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, महाराष्ट्र, दिल्ली, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, बिहार, केरल, चंडीगढ़ और हरियाणा शामिल हैं।यानी एक शहर से जारी कराई गई SIM का इस्तेमाल अलग-अलग राज्यों में बैठे साइबर अपराधियों ने कथित तौर पर लोगों को निशाना बनाने के लिए किया।

180 लोगों से 14 करोड़ से ज्यादा की ठगी

जांच में करीब 180 पीड़ितों से 14 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी का आंकड़ा सामने आया है। पुलिस अब प्रत्येक मामले में रकम के लेनदेन, मोबाइल नंबर, बैंक खातों और डिजिटल ट्रेल की जांच कर रही है।अधिकारियों का फोकस यह पता लगाने पर है कि ठगी की रकम आखिर किन खातों में पहुंची और इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं।

अब बिचौलियों से मुख्य आरोपियों तक पहुंचेगी पुलिस

पुलिस की जांच अब फर्जी SIM उपलब्ध कराने वाले वेंडरों और बिचौलियों पर केंद्रित है। माना जा रहा है कि इन्हीं कड़ियों के जरिए उन साइबर अपराधियों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है, जिन्होंने इन मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल कर लोगों को ठगी का शिकार बनाया। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि SIM जारी करने की प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन किस स्तर पर हुआ और संबंधित दस्तावेजों का इस्तेमाल कैसे किया गया।

आपके नाम पर कितनी SIM चल रही हैं?

इस मामले ने आम लोगों के लिए भी एक बड़ा सवाल खड़ा किया है—कहीं आपके दस्तावेजों पर भी आपकी जानकारी के बिना SIM तो जारी नहीं है? लोगों को समय-समय पर अपने नाम पर एक्टिव मोबाइल कनेक्शनों की जानकारी जांचते रहना चाहिए और किसी अनजान नंबर की जानकारी मिलने पर संबंधित सेवा प्रदाता तथा साइबर अपराध हेल्पलाइन को सूचित करना चाहिए।

 

Kanchan Sharma
Kanchan Sharma
कंचन शर्मा वर्तमान में दैनिक समाचार पत्र "अनमोल संदेश" में कार्यरत। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया,प्रिंट, न्यूज एजेंसी और डिजिटल पत्रकारिता में उनका लंबा अनुभव है, जिसमें उन्होंने रिपोर्टर और डेस्क पर विभिन्न भूमिकाओं में काम किया है।
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