Anmol Sandesh News Desk,दिल्ली/रायपुर
देश के सबसे महत्वाकांक्षी सड़क परियोजनाओं में शामिल रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है। करीब 465 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड 6-लेन एक्सप्रेसवे के शुरू होने के बाद मध्य भारत से पूर्वी तट तक की कनेक्टिविटी पूरी तरह बदल जाएगी। अभी रायपुर से विशाखापट्टनम पहुंचने में जहां 12 से 14 घंटे लगते हैं, वहीं इस कॉरिडोर के चालू होने के बाद यही सफर 5 से 6 घंटे में पूरा होने की उम्मीद है। यह एक्सप्रेसवे सिर्फ दो शहरों को जोड़ने वाली सड़क नहीं, बल्कि दिल्ली से विशाखापट्टनम तक तेज और निर्बाध सड़क नेटवर्क तैयार करने वाली महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। इससे व्यापार, उद्योग, पर्यटन और माल ढुलाई को बड़ी रफ्तार मिलेगी।
समुद्र तक पहुंचेगा मध्य भारत
यह कॉरिडोर छत्तीसगढ़ के रायपुर, कांकेर, कोंडागांव और बस्तर से होकर ओडिशा के नवरंगपुर और कोरापुट तक जाएगा। इसके बाद यह आंध्र प्रदेश के रास्ते सीधे विशाखापट्टनम पोर्ट से जुड़ जाएगा। समुद्री बंदरगाह तक सीधी हाई-स्पीड कनेक्टिविटी मिलने से उद्योगों के लिए परिवहन लागत घटने की संभावना है।
20 से ज्यादा बड़े शहरों को मिलेगा फायदा
इस एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी ताकत इसकी मल्टी-हाईवे कनेक्टिविटी है। यह कॉरिडोर NH-30, NH-34, NH-539, NH-44, यमुना एक्सप्रेसवे और ग्वालियर-आगरा एक्सप्रेसवे जैसे प्रमुख मार्गों से जुड़ेगा। इससे दिल्ली, आगरा, ग्वालियर, रायपुर, जगदलपुर, विशाखापट्टनम समेत देश के करीब 20 बड़े शहरों तक तेज सड़क संपर्क मिलेगा।
सफर में आएगा बड़ा बदलाव
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पहलू |
अभी |
एक्सप्रेसवे के बाद |
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दूरी |
597 किमी |
465 किमी |
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यात्रा समय |
12–14 घंटे |
5–6 घंटे |
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सड़क |
सामान्य हाईवे |
6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे |
ट्विन टनल बनेगी सबसे बड़ा आकर्षण
कॉरिडोर का सबसे रोमांचक हिस्सा कोंडागांव-कांकेर सेक्शन में बनने वाली लगभग 2.83 किलोमीटर लंबी 6-लेन ट्विन टनल होगी। पहाड़ी इलाके में बनने वाली यह सुरंग यात्रा को तेज और सुरक्षित बनाने के साथ इंजीनियरिंग का भी बड़ा उदाहरण मानी जा रही है।
दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य
करीब ₹16,482 करोड़ से ₹20,000 करोड़ की लागत वाली इस परियोजना का निर्माण हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (HAM) के तहत किया जा रहा है। परियोजना को 19 से अधिक पैकेजों में बांटा गया है। अधिकांश हिस्सों में निर्माण तेजी से आगे बढ़ चुका है और कई सेक्शन अंतिम फिनिशिंग चरण में हैं। सरकार का लक्ष्य दिसंबर 2026 तक पूरे कॉरिडोर को चालू करना है।
बस्तर के विकास को मिलेगी नई रफ्तार
विशेषज्ञों का मानना है कि इस एक्सप्रेसवे से लंबे समय तक पिछड़े माने जाने वाले बस्तर, कांकेर और कोंडागांव जैसे क्षेत्रों में निवेश, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। विशाखापट्टनम पोर्ट तक तेज पहुंच मिलने से कृषि, वन उत्पाद और खनिज आधारित उद्योगों को भी बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।
