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सरकारी योजना के मकान किराए पर दिए तो अब होगी बड़ी कार्रवाई, ‘हाउसिंग फॉर ऑल’ में गड़बड़ी पर सरकार सख्त

मुख्य बिंदु:

  • फ्लैट में किराएदार या रिश्तेदार मिले तो होगा आवंटन रद्द
  • एक ही परिवार को दो बार योजना का लाभ नहीं मिलेगा

  • सर्वे में अवैध कब्जा, फर्जी दस्तावेज और एक से ज्यादा फ्लैट की भी हो रही जांच

अगर आपने हाउसिंग फॉर ऑल (Housing For All) योजना के तहत सरकारी फ्लैट लिया है और उसे किराए पर दे रखा है, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। सरकार ऐसे आवंटियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी में है। अब ऐसे लोगों का फ्लैट आवंटन निरस्त किया जा सकता है, और उन्हें दोबारा कोई सरकारी आवास नहीं मिलेगा।

दक्षिण-पश्चिम विधानसभा से हुई सर्वे की शुरुआत

राजधानी में 21 अप्रैल से जिला प्रशासन और नगर निगम की संयुक्त टीम द्वारा सर्वे शुरू किया गया है। शुरुआत दक्षिण-पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से हुई है। यह सर्वे करीब एक महीने तक चलेगा, जिसमें सरकारी योजनाओं के तहत आवंटित सभी फ्लैट्स की स्थिति की समीक्षा की जाएगी।

क्या देखा जा रहा है सर्वे में?

सर्वे के दौरान ये प्रमुख बातें जांची जा रही हैं:

  1. फ्लैट में खुद आवंटी रह रहा है या नहीं

  2. फ्लैट किराए पर दिया गया है या खाली पड़ा है

  3. फ्लैट में अवैध कब्जा तो नहीं है

  4. कहीं एक व्यक्ति को एक से ज्यादा फ्लैट तो नहीं मिले

अब तक क्या सामने आया?

अब तक अंबेडकर नगर के केवल 84 फ्लैट्स का सर्वे किया गया है, जिनमें से 6 फ्लैट ऐसे पाए गए हैं, जिनमें किराएदार रह रहे थे — यानी लगभग 7% फ्लैट का दुरुपयोग हुआ है।

किरायेदार या रिश्तेदार मिले तो रद्द होगा आवंटन

Pradhan Mantri Awas Yojana: Housing for All

अगर किसी फ्लैट में हितग्राही खुद न रहकर किरायेदार या परिवार का कोई अन्य सदस्य रह रहा है, या फ्लैट का कोई उपयोग ही नहीं हो रहा, तो ऐसे मामलों में आवंटन को तत्काल निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

क्या कहता है नियम?

हाउसिंग फॉर ऑल योजना के नियमों के अनुसार:

  • एक व्यक्ति को जीवन में केवल एक बार इस योजना का लाभ मिल सकता है।

  • अगर व्यक्ति फ्लैट किराए पर देता है या उसका व्यावसायिक उपयोग करता है, तो योजना का उल्लंघन माना जाएगा।

  • दूसरी बार योजना का लाभ नहीं मिलेगा।

इन कॉलोनियों में होना है सर्वे:

  • अंबेडकर नगर

  • आराधना नगर

  • राहुल नगर

  • श्याम नगर

  • शबरी नगर

  • मद्रासी कॉलोनी

  • अर्जुन नगर
    (अन्य प्रोजेक्ट एरिया भी शामिल)

कौन कर रहा है सर्वे?

6 सदस्यों की सर्वे टीम बनाई गई है, जिसमें शामिल हैं:

  • नायब तहसीलदार

  • पटवारी

  • नगर निगम का राजस्व अमला

  • स्वच्छता अमला

  • पुलिस विभाग

सर्वे में मिले चौंकाने वाले तथ्य:

1. अवैध कब्जे:

कई फ्लैट्स में ऐसे लोग पाए गए हैं जो बिना किसी वैध दस्तावेज के रह रहे हैं।

2. फर्जी लाभ:

कुछ लाभार्थियों ने एक से ज्यादा फ्लैट हड़प लिए हैं। रिकॉर्ड से नाम और फ्लैट मिलान कर गड़बड़ी पकड़ी जा रही है।

सर्वे के बाद क्या होगा?

प्रशासन की ओर से स्पष्ट कर दिया गया है कि:

  • गलत तरीके से आवंटित या किराए पर दिए गए फ्लैट्स का आवंटन निरस्त किया जाएगा।

  • फर्जी लाभ लेने वालों पर कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।

  • रिक्त फ्लैट्स को नए पात्र आवंटियों को सौंपा जाएगा।

अगर आप ‘हाउसिंग फॉर ऑल‘ जैसी योजनाओं का लाभ लेकर उसे किराए पर चला रहे हैं या खुद न रहकर किसी और को रख रहे हैं, तो सतर्क हो जाइए। प्रशासन की नजर अब ऐसे हर मकान और हर आवंटी पर है। नियमों का उल्लंघन करने पर आपको न सिर्फ फ्लैट गंवाना पड़ सकता है, बल्कि भविष्य में सरकारी योजनाओं से भी वंचित किया जा सकता है।

MP Tech Growth Conclave 2025: इंदौर से गूंजा निवेश का बिगुल, 20 हजार करोड़ के प्रस्ताव, 75 हजार को मिलेगा रोजगार

मुख्य बातें

  • 20,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव
  • 75,000 नए रोजगार के अवसर

  • भोपाल में इलेक्ट्रॉनिक पार्क और IT टॉवर का निर्माण

  • पंचशील कंपनी से मांगे गए 5000 करोड़ के निवेश

  • 4 नई IT पॉलिसी और स्टार्टअप्स को प्लग-एंड-प्ले सुविधा

  • 60 दिनों में हुआ मेगा आयोजन

27 अप्रैल को इंदौर में आयोजित MP Tech Growth Conclave 2025 में मध्यप्रदेश सरकार को 20,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इन प्रस्तावों से राज्य में 75,000 लोगों को रोजगार मिलेगा। उन्होंने बताया कि भोपाल में इलेक्ट्रॉनिक पार्क और इंदौर में आईटी टॉवर का निर्माण किया जाएगा।

सीएम बोले: मप्र बना निवेश का केंद्र, रिकॉर्ड तोड़े

सीएम ने कहा, “हमने छोटे-छोटे स्थानों पर उद्योगपतियों को बुलाया। हमारे पास जमीन कम पड़ रही है क्योंकि मांग बहुत अधिक है।” उन्होंने यह भी कहा कि मप्र में अब तक के निवेश के सारे रिकॉर्ड टूट चुके हैं, और इस माहौल को देखकर स्पष्ट है कि प्रदेश निवेशकों की पहली पसंद बन चुका है।

इंदौर की पहचान बदली: स्वच्छता से ग्रीन नगरी की ओर

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सीएम ने मां अहिल्या की नगरी इंदौर की तारीफ करते हुए कहा कि शहर अब सिर्फ सबसे स्वच्छ नगरी नहीं, बल्कि ग्रीन नगरी की ओर भी तेज़ी से बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि शहर में 51 लाख पेड़ लगाए गए हैं जो पर्यावरणीय बदलाव का प्रतीक हैं।

मुख्यमंत्री ने इवेंट की भव्यता की तुलना इंद्र के दरबार से की और कहा, “यह दरबार इंद्र के दरबार से शोभायमान होकर मुकाबला कर रहा होगा।”

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पंचशील ग्रुप से 5000 करोड़ के निवेश की मांग

कॉन्क्लेव में पंचशील कंपनी के अतुल ने 1000 करोड़ के निवेश की घोषणा की, जिस पर सीएम ने तुरंत कहा कि “1000 करोड़ से काम नहीं चलेगा, हमें आपसे 5000 करोड़ का निवेश चाहिए।”

नई घोषणाएं: टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप सेक्टर को मिलेगा बूस्ट

कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री ने कई बड़े ऐलान किए जो टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप्स को नई ऊंचाई देंगे:

घोषित योजनाएं:

  1. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजी का क्षेत्रीय केंद्र

  2. एग्रीटेक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस – IIT इंदौर में

  3. एमपी डिजिटल इकोनॉमी मिशन का गठन

  4. भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर में IT सुविधा केंद्र

  5. भोपाल में IT पार्क टॉवर – 125 करोड़ की लागत, 3 लाख स्क्वायर फीट लीजेबल स्पेस

  6. देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी इंदौर में प्लग एंड प्ले सुविधा

IT सेक्टर के लिए घोषित 4 पॉलिसियां

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मुख्यमंत्री ने कहा कि मप्र की तकनीकी क्षमता को बढ़ावा देने के लिए राज्य ने चार नई आईटी नीतियों को लागू किया है। इसके अंतर्गत बैरसिया में 209 करोड़ का इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट शामिल है।

GIS से 30 लाख करोड़ का निवेश प्रस्ताव मिला

सीएम मोहन यादव ने बताया कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS) में मप्र को 30 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। उन्होंने कहा कि “हम रुके नहीं हैं, 60 दिनों से भी कम में यह कॉन्क्लेव कर दिखाया।”

MP Tech Growth Conclave 2025 ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मप्र अब सिर्फ कृषि या पर्यटन राज्य नहीं रहा — यह टेक्नोलॉजी, निवेश और रोजगार का नया हब बनता जा रहा है। आने वाले समय में यहां युवाओं को न सिर्फ रोजगार, बल्कि ग्लोबल लेवल की स्किलिंग और इनोवेशन के अवसर भी मिलेंगे।

भोपाल में बिगड़ती सुरक्षा: बढ़ती वारदातें, बंद पड़े CCTV कैमरे, सड़क हादसों और चोरी के मामलों में इजाफा

मुख्य बिंदु 

  • चोरी, हिट एंड रन और फौजदारी के मामलों में तेजी से वृद्धि

  • पुलिस की निगरानी का मुख्य जरिया CCTV, पर कई कैमरे खराब

  • मेट्रो निर्माण और तकनीकी कारणों से 40 से अधिक कैमरे बंद

  • स्मार्ट सिटी और पुलिस विभाग मिलकर लगा रहे हैं नए कैमरे

  • सड़क हादसों और वाहन चोरी के मामलों में चौंकाने वाला आंकड़ा

भोपाल में बढ़ रहे अपराध: हर दिन 7 वाहन चोरी, हिट एंड रन के केस भी बढ़े

पिछले कुछ महीनों में भोपाल में अपराध के ग्राफ में लगातार इजाफा हुआ है। चोरी, फौजदारी, मोबाइल स्नैचिंग और हिट एंड रन की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, हर दिन औसतन 7 वाहन चोरी हो रहे हैं, जबकि सड़क हादसों की औसत संख्या हर महीने 489 तक पहुंच चुकी है

CCTV कैमरे हुए फेल: अपराधियों की पहचान में पुलिस को मुश्किल

जिन CCTV कैमरों के भरोसे पुलिस अपराध पर नजर रखती है, वही अब बड़ी संख्या में बंद हो चुके हैं। दैनिक भास्कर के सर्वे में सामने आया कि शहर के संवेदनशील क्षेत्रों और यहां तक कि सेंट्रल जेल परिसर में भी कैमरे ठीक से काम नहीं कर रहे हैं।

  • जेल रोड पर केवल एक कैमरा काम कर रहा है

  • बोर्ड ऑफिस, लिंक रोड, नर्मदापुरम रोड, और वीआईपी रोड पर लगे कई कैमरे खराब

भोपाल पुलिस के CCTV प्रभारी मनोज बेग ने बताया कि शहर की 153 लोकेशनों पर 781 कैमरे लगाए गए हैं, जिनमें से लगभग 40 कैमरे बंद हैं। इसकी बड़ी वजह मेट्रो निर्माण और तकनीकी खराबी है। यह संख्या समय-समय पर बदलती रहती है।

एनपीआर कैमरे आउटर एरिया में निगरानी के लिए

New Cop On Board: How Is Artificial Intelligence Helping Police Prevent  Crime

शहर के आउटर क्षेत्रों की 16 लोकेशनों पर 152 NPR कैमरे लगे हैं जो भोपाल में प्रवेश और निकासी करने वाले वाहनों की निगरानी करते हैं। ये नंबर प्लेट पहचानने की तकनीक से लैस हैं और ट्रैफिक की सुरक्षा में मददगार हैं।

450 नई लोकेशनों पर 2,000 कैमरे लगाने की योजना

भविष्य की योजना के तहत भोपाल में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 450 नई लोकेशनों पर 2,000 नए CCTV कैमरे लगाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। स्मार्ट सिटी और पुलिस विभाग मिलकर इस योजना को जमीन पर उतारने की तैयारी में हैं।

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट: RNBD और NPR कैमरे लगे, लेकिन स्थिति अस्पष्ट

स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत 29 चौराहों पर 332 कैमरे लगाए गए हैं जिनमें RNBD (रियल-टाइम निगरानी) और NPR (नंबर प्लेट रीडर) कैमरे शामिल हैं। हालांकि, इन कैमरों की मौजूदा स्थिति — कितने काम कर रहे हैं और कितने बंद — इसकी जानकारी अभी स्पष्ट नहीं है।

सड़क हादसे बढ़े, फरार आरोपी पकड़ना मुश्किल

108 एंबुलेंस सेवा की रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में अब तक 5869 सड़क हादसे दर्ज किए जा चुके हैं। पिछले तीन वर्षों में 108 कॉल्स में 15% की वृद्धि दर्ज की गई है। खराब कैमरों के कारण कई हिट एंड रन मामलों में आरोपी पकड़ से बाहर हैं।

कमिश्नर ऑफिस से जारी आंकड़ों के अनुसार, 2023 की तुलना में 2024 में अपहरण के मामलों में 15% की वृद्धि दर्ज की गई है। चोरी और मोबाइल स्नैचिंग जैसे अपराध आम होते जा रहे हैं।

बढ़ते अपराधों पर रोक कैसे लगे जब निगरानी ही फेल हो जाए?

भोपाल जैसे राजधानी शहर में बढ़ते अपराध और फेल होती निगरानी व्यवस्था गंभीर चिंता का विषय हैं। जहां एक ओर शहर डिजिटल सुरक्षा की ओर बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर तकनीकी खामियों और लापरवाही के कारण अपराधियों को पकड़ना मुश्किल हो रहा है। अब देखना होगा कि आने वाली CCTV योजना अपराध रोकने में कितनी कारगर साबित होती है।

Indore liquor scam: ईडी की 18 जगहों पर बड़ी कार्रवाई, 100 करोड़ की धोखाधड़ी का पर्दाफाश

मुख्य बिंदु

  • इंदौर में ईडी की 18 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी
  • 2015-2018 के बीच 100 करोड़ के फर्जी बैंक चालानों से की गई धोखाधड़ी
  • शराब कारोबारियों और आबकारी अफसरों की मिलीभगत से हुआ बड़ा घोटाला
  • पहले भी हुई थी पुलिस और विभागीय कार्रवाई, पर ठोस नतीजे नहीं निकले

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार सुबह इंदौर में 18 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी कर बड़ी कार्रवाई की। यह रेड मुख्य रूप से उन शराब कारोबारियों पर की गई है, जिन पर आबकारी विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर करोड़ों का घोटाला करने का आरोप है। यह कार्रवाई इंदौर के बसंत विहार कॉलोनी, तुलसी नगर और महालक्ष्मी नगर सहित कई इलाकों में की गई।

कैसे हुआ घोटाला? जानिए घोटाले की पूरी स्कीम

इस घोटाले की शुरुआत 2015 से 2018 के बीच हुई, जब इंदौर जिला आबकारी कार्यालय में शराब उठाने के लिए 194 फर्जी बैंक चालानों का इस्तेमाल किया गया। चालानों में हजारों रुपये जमा दिखाए गए, लेकिन रिकॉर्ड में लाखों रुपए की राशि दर्शाकर अधिक शराब उठाई गई और अवैध रूप से बेची गई। यह सारा घोटाला गोदामों और दुकानों के माध्यम से किया गया।

ईडी की जांच का आधार: पहले भी हो चुकी है FIR

Chennai money laundering case: ED seizes Rs 1,000 cr worth assets of  Chennai-based firm in PMLA case

इस मामले में 12 अगस्त 2017 को रावजी बाजार पुलिस स्टेशन में 14 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया था। आबकारी विभाग की आंतरिक जांच रिपोर्ट के आधार पर ईडी ने 2024 में इस मामले में जांच शुरू की और विभाग से आवश्यक दस्तावेज मांगे।

जिनके ठिकानों पर पड़े छापे ये हैं प्रमुख नाम

  • एमजी रोड समूह: अविनाश और विजय श्रीवास्तव

  • जीपीओ चौराहा समूह: राकेश जायसवाल

  • तोपखाना समूह: योगेंद्र जायसवाल

  • बायपास चौराहा समूह: राहुल चौकसे

  • गवली पलासिया समूह: सूर्यप्रकाश अरोरा

  • अन्य: गोपाल शिवहरे, लवकुश, प्रदीप जायसवाल

निलंबित हुए थे कई अधिकारी सिस्टम की मिलीभगत उजागर

2017 में हुई प्राथमिक जांच में आबकारी विभाग के अधिकारी संजीव दुबे सहित कई अफसरों को निलंबित कर दिया गया था। इन अधिकारियों पर चालानों का मिलान समय पर न करने और जानबूझकर अनदेखी करने के आरोप लगे थे।
निलंबित अधिकारी:

  • संजीव दुबे (जिला आबकारी अधिकारी)

  • डीएस सिसोदिया (लसूड़िया वेयरहाउस प्रभारी)

  • सुखनंदन पाठक (महू वेयरहाउस प्रभारी)

  • कौशल्या सबवानी (सब इंस्पेक्टर)

  • धनराज सिंह परमार (हेड क्लर्क)

  • अनमोल गुप्ता (कर्मचारी)

2024 में ईडी ने लिखा पत्र मांगे गए दस्तावेज और बैंक डिटेल्स

ईडी ने 2024 में आबकारी घोटाले से जुड़े आरोपियों की एफआईआर, बैंक खातों, वसूली और आंतरिक जांच रिपोर्ट की जानकारी मांगी थी।

ईडी ने आबकारी विभाग को पत्र लिखकर सभी संबंधित दस्तावेज, ठेकेदारों के बैंक खाते और आंतरिक जांच रिपोर्ट सौंपने का अनुरोध किया है। साथ ही, विभाग से यह भी पूछा गया है कि ठेकेदारों से कितनी राशि वसूल की गई और अब तक जांच किस स्तर तक पहुंची है।

ऑडिट में भी नहीं मिला ठोस नतीजा जांच का निष्कर्ष शून्य

इस मामले में 11 ऑडिटरों की टीम ने करीब 1700 करोड़ रुपए के शराब चालानों की जांच की, जिसमें 2015 से 2017 तक की शराब दुकानों की नीलामी शामिल थी। लेकिन इतनी विस्तृत जांच के बाद भी कोई ठोस परिणाम नहीं निकल पाया।

ये बनाए गए हैं आरोपी बड़े नाम शामिल

  • अविनाश और विजय श्रीवास्तव

  • राकेश जायसवाल

  • योगेंद्र जायसवाल

  • राहुल चौकसे

  • सूर्यप्रकाश अरोरा

  • गोपाल शिवहरे, लवकुश, प्रदीप जायसवाल

क्या इस बार कुछ बदलेगा?

ईडी की इस सख्त कार्रवाई से उम्मीद बंधी है कि सालों से लंबित इस बड़े घोटाले में अब ठोस कार्रवाई होगी। हालांकि, पूर्व की कार्रवाईयां और जांच निष्कर्ष विफल रहे हैं, इसलिए देखना होगा कि क्या इस बार न्याय की दिशा में ठोस कदम उठाए जाते हैं।

भोपाल में रह रहे 3 पाकिस्तानियों को आदेश जारी, जल्द छोड़ना होगा भारत

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने कड़ा कदम उठाते हुए पाकिस्तानी नागरिकों को जारी 14 श्रेणियों के वीजा में से 13 को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। केवल मेडिकल वीजा को इस आदेश से छूट दी गई है।

भारत सरकार द्वारा 23 अप्रैल को जारी निर्देशों के अनुसार, जिन पाकिस्तानी नागरिकों के पास अब वैध वीजा नहीं है, उन्हें 27 अप्रैल (रविवार) तक देश छोड़ने का आदेश दिया गया है। जिनके पास मेडिकल वीजा है, उन्हें 29 अप्रैल तक भारत से लौटने को कहा गया है।

एमपी में 228 पाकिस्तानी नागरिकों की पहचान, भोपाल में भी नोटिस जारी

मध्य प्रदेश में कुल 228 पाकिस्तानी नागरिकों को चिह्नित किया गया है। इनमें से भोपाल में रह रहे तीन नागरिकों को स्थानीय पुलिस ने नोटिस जारी कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारत सरकार के आदेशों का सख्ती से पालन किया जाएगा और एक-एक पाकिस्तानी नागरिक को चिन्हित कर वापस भेजा जाएगा।

इंदौर पुलिस की तैयारी: सोमवार से कार्रवाई होगी शुरू

इंदौर के एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया ने जानकारी दी कि अब तक शॉर्ट टर्म वीजा पर आए पाकिस्तानी नागरिकों को वापस भेजने की कोई कार्रवाई नहीं हुई है, लेकिन सोमवार से वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।

ऐज फैक्टर बना उलझन का विषय, अंतिम फैसला केंद्र के स्तर पर

भोपाल में रह रहे एक पाकिस्तानी नागरिक की उम्र संबंधी स्थिति (ऐज फैक्टर) को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। स्थानीय स्तर पर इसका निपटारा नहीं किया जाएगा, बल्कि केंद्र सरकार से दिशा-निर्देश मिलने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। उम्मीद की जा रही है कि रविवार (27 अप्रैल) की रात तक स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

कौन रह सकता है भारत में? जानिए वीजा कैटेगरी का विवरण

रहने की अनुमति वाले वीजा:

  • लॉन्ग टर्म वीजा (LTV)

  • राजनयिक वीजा (Diplomatic Visa)

  • आधिकारिक वीजा (Official Visa)

इन कैटेगरी में आने वाले पाकिस्तानी नागरिक भारत में वीजा अवधि तक रह सकते हैं।

वापसी की समय सीमा:

  • मेडिकल वीजा धारकों को 29 अप्रैल तक भारत छोड़ना होगा।

  • अन्य सभी वीजा (13 कैटेगरी) वाले नागरिकों को 27 अप्रैल तक लौटना अनिवार्य है।

मुख्यमंत्री ने की समीक्षा बैठक, कहा- सख्ती से होगा आदेशों का पालन

बारिश-ओलावृष्टि से MP में किसानों की फसलें हुई चौपट, CM मोहन यादव ने कहा-  नुकसान की भरपाई की जाएगी | MP CM Mohan Yadav says the losses of farmers  affected by hailstorm

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस मुद्दे पर भोपाल पुलिस हेडक्वॉर्टर में बैठक की और अधिकारियों को निर्देश दिए कि भारत सरकार के आदेशों का हर हाल में पालन कराया जाए। उन्होंने कहा, “हम एक-एक पाकिस्तानी नागरिक को चिन्हित कर उनकी देश वापसी सुनिश्चित करेंगे।”

आतंकी हमले के बाद बढ़ी सतर्कता, केंद्र ने उठाए सख्त कदम

22 अप्रैल के हमले के बाद केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए जो कदम उठाए हैं, वह भविष्य में किसी भी प्रकार की आतंकी साजिश को रोकने की दिशा में एक निर्णायक पहल मानी जा रही है। राज्यों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि समय सीमा के भीतर सभी संबंधित पाकिस्तानी नागरिकों की वापसी सुनिश्चित की जाए।

MP News: डॉक्टरों की कमी दूर करेगी नई नीति, संविदा नियुक्ति अब 70 साल तक, मेडिकल कॉलेजों में भी होगा सुधार

मध्यप्रदेश में सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने 70 वर्ष तक के डॉक्टरों को संविदा नियुक्ति देने का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा, इंदौर और रीवा के मेडिकल कॉलेजों के आधुनिकीकरण की योजना भी बनाई गई है।

स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की दिशा में कदम

प्रदेश सरकार ने 70 वर्ष तक के डॉक्टरों को संविदा नियुक्ति देने का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इससे स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

सीनियर डॉक्टरों के अनुभव का मिलेगा लाभ

10,100+ Mature Indian Doctor Stock Photos, Pictures & Royalty-Free Images -  iStock

सीनियर डॉक्टरों के अनुभव का लाभ उठाकर स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाने की कोशिश की जा रही है। इससे चिकित्सा संस्थानों की गुणवत्ता में वृद्धि होगी और डॉक्टरों की कमी को पूरा किया जा सकेगा।

इंदौर और रीवा मेडिकल कॉलेजों का होगा आधुनिकीकरण

इंदौर और रीवा के मेडिकल कॉलेजों के आधुनिकीकरण की योजना बनाई गई है। इसमें कॉलेजों का अधोसंरचना विकास, अत्याधुनिक उपकरणों की व्यवस्था और अन्य आवश्यक कार्य शामिल हैं।

ई-एचआरएमएस पोर्टल से स्थानांतरण प्रक्रिया में पारदर्शिता

स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित ऑनलाइन ट्रांसफर पोर्टल (ई-एचआरएमएस) की तैयारी पूर्ण कर ली गई है। इससे स्थानांतरण प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से संपन्न किया जाएगा।

सीएम के बाद डिप्टी सीएम ने दिए निर्देश

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी सीनियर डॉक्टरों की सेवाएं लेने के निर्देश दिए थे। इसके बाद अब डिप्टी सीएम शुक्ल ने नियुक्ति को लेकर प्रस्ताव तैयार करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए हैं।

इंदौर में प्रशासन की बड़ी कार्रवाई: सामूहिक विवाह में 36 बाल विवाह रोके गए, सख्त चेतावनी जारी

इंदौर जिले के देपालपुर तहसील स्थित बछौड़ा गांव में शुक्रवार, 25 अप्रैल को एक सामूहिक विवाह समारोह का आयोजन किया गया था। इस आयोजन में कुल 49 जोड़े विवाह के लिए आए थे।

इंदौर: उड़नदस्ते ने मौके पर पहुंचकर की दस्तावेजों की जांच

महिला एवं बाल विकास विभाग के उड़नदस्ते को सूचना मिली कि समारोह में बाल विवाह की संभावना है। प्रभारी महेन्द्र पाठक के नेतृत्व में टीम मौके पर पहुंची और दस्तावेजों की गहन जांच की।

36 नाबालिग जोड़े पाए गए, शादी तुरंत रोकी गई

बाल विवाह पर नियंत्रण - AFEIAS

जांच के दौरान यह सामने आया कि 49 में से 36 जोड़े नाबालिग थे। इनमें से अधिकांश लड़कियां 16-17 वर्ष की थीं, जबकि लड़कों की उम्र भी 21 वर्ष से कम पाई गई। टीम ने तुरंत सभी बाल विवाह को रोक दिया और आयोजन बंद करवा दिया।

इंदौर: सिर्फ 13 जोड़ों की हुई वैध शादी

जिन 13 जोड़ों के दस्तावेजों में उम्र वैध पाई गई, उन्हीं की शादी समारोह में अनुमति दी गई। अन्य सभी जोड़े समारोह स्थल से हटा दिए गए।

आयोजकों को दी गई सख्त कानूनी चेतावनी

महिला एवं बाल विकास विभाग ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के अंतर्गत आयोजकों को चेतावनी दी है। यदि भविष्य में फिर से ऐसा प्रयास किया गया तो आयोजकों के खिलाफ FIR दर्ज की जाएगी।

इंदौर: क्या कहता है कानून?

भारतीय कानून के अनुसार:

  • लड़कियों की विवाह की न्यूनतम उम्र: 18 वर्ष

  • लड़कों की विवाह की न्यूनतम उम्र: 21 वर्ष

बाल विवाह करने या कराने पर:

  • 2 साल की सश्रम कैद या

  • 1 लाख रुपये तक का जुर्माना
    या फिर दोनों सजाएं हो सकती हैं।

अब स्कूल से ही होगा कॉलेज एडमिशन, पारदर्शी और कम खर्चीली प्रक्रिया की शुरुआत

नए शैक्षणिक सत्र से छात्रों को कॉलेज एडमिशन के लिए भागदौड़ नहीं करनी होगी। अब हर हायर सेकंडरी स्कूल और कॉलेज कैंपस में रजिस्ट्रेशन डेस्क या कियोस्क लगाए जाएंगे, जहां से छात्र सीधे रजिस्ट्रेशन कर सकेंगे। इससे लाखों छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी।

एडमिशन प्रोसेस के लिए नई एजेंसी: SRIT बेंगलुरु

अब तक एडमिशन की जिम्मेदारी एमपी ऑनलाइन की थी, लेकिन अब इसे बेंगलुरु की SRIT कंपनी को सौंपा गया है। यह कदम तेज और बेहतर सेवा देने के लिए उठाया गया है।

कम खर्च, ज्यादा सुविधा: ₹70 की जगह ₹39.60 में काम

नई एजेंसी द्वारा छात्रों को केवल ₹39.60 में पूरी सेवा मिलेगी, जबकि पहले एमपी ऑनलाइन ₹70 चार्ज करता था। यह बदलाव आर्थिक रूप से भी छात्रों के लिए फायदेमंद होगा।

मोबाइल ऐप और यूज़र-फ्रेंडली पोर्टल

अब छात्र मोबाइल ऐप के ज़रिए घर बैठे ही:

  • रजिस्ट्रेशन

  • दस्तावेज़ अपलोड

  • फीस भुगतान

  • स्टेटस ट्रैक
    सभी काम कर सकेंगे। यह पोर्टल एंड्रॉयड और iOS दोनों पर उपलब्ध रहेगा।

पूरी प्रक्रिया ऑटोमेटेड और ट्रांसपेरेंट

College Admissions 2022: Check Which are the Best Colleges for Your Stream  - News18

नई एडमिशन प्रणाली पूरी तरह ऑटोमेटेड और रूल-बेस्ड है, जिससे कॉलेज और कोर्स का आवंटन बिना मानवीय हस्तक्षेप के होगा। हर साल यह सॉफ्टवेयर 5 लाख से ज्यादा छात्रों की जानकारी को प्रोसेस करने में सक्षम है।

हेल्पलाइन और कॉल सेंटर की सुविधा

एडमिशन से दो महीने पहले और अंतिम तिथि के दो महीने बाद तक एक टोल-फ्री नंबर और कॉल सेंटर काम करेगा, जिससे छात्र और अभिभावक किसी भी समय जानकारी ले सकेंगे।

फीस और छात्रवृत्ति के लिए एक ही पोर्टल

अब छात्र कॉलेज फीस भी इसी पोर्टल से सीधे शासन के खाते में जमा कर सकेंगे। साथ ही, सभी छात्रवृत्ति योजनाओं का आवेदन भी यहीं से किया जा सकेगा। भविष्य की योजनाओं को भी सिस्टम से जोड़ा जा सकेगा।

तकनीकी टीम रहेगी हर वक्त तैयार

पूरे साल इस सिस्टम की देखरेख के लिए एक टीम लीडर और तकनीकी विशेषज्ञ विभाग के साथ समन्वय में काम करेंगे। इससे किसी भी तकनीकी समस्या का समाधान तुरंत किया जा सकेगा।

यह नई व्यवस्था न केवल छात्रों की सुविधा को ध्यान में रखकर बनाई गई है, बल्कि यह डिजिटल पारदर्शिता और सुलभता की दिशा में एक बड़ी पहल है। इससे न केवल समय और पैसे की बचत होगी, बल्कि एडमिशन प्रक्रिया भी ज्यादा स्मार्ट, सरल और सुलभ हो जाएगी।

MP News: भोपाल रेलवे स्टेशन पर वाटर वेंडिंग मशीनें 6 महीने से बंद, भीषण गर्मी में पानी के लिए तरस रहे यात्री

राजधानी भोपाल के मुख्य रेलवे स्टेशन पर यात्रियों के लिए गर्मी में राहत की बजाय परेशानी और बढ़ गई है। जहां पहले ठंडा और शुद्ध आरओ पानी सस्ते दामों में उपलब्ध होता था, वहीं अब यात्रियों को पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। स्टेशन पर लगी 12 वॉटर वेंडिंग मशीनें बीते छह महीने से बंद पड़ी हैं, जिससे हजारों यात्री प्रभावित हो रहे हैं।

42 डिग्री तक पहुंचा तापमान, स्टेशन पर प्यासा सफर

भोपाल में गर्मी अपने चरम पर है। अप्रैल महीने में ही तापमान 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। ऐसे में रेलवे स्टेशन पर जहां हर रोज़ हजारों यात्री पहुंचते हैं, वहां पानी की व्यवस्था न होना सीधे तौर पर स्वास्थ्य और सुविधा से खिलवाड़ है।

भोपाल स्टेशन का ट्रैफिक और जल संकट

  • 200+ ट्रेनें हर दिन संचालित होती हैं

  • 40,000 से 50,000 यात्रियों का रोज़ आना-जाना

  • 6 प्लेटफॉर्म्स, लेकिन अब बिना वॉटर मशीन के

सस्ता और शुद्ध पानी अब नहीं मिल रहा

जब वॉटर वेंडिंग मशीनें चालू थीं, तब यात्रियों को ₹2 से ₹20 तक में ठंडा और शुद्ध आरओ पानी मिल जाता था। ये थे पुराने रेट:

मात्रा कीमत
300 एमएल ₹2
500 एमएल ₹5
1 लीटर ₹5
2 लीटर ₹8
5 लीटर ₹20

अब यात्रियों को या तो बाहर से बोतलबंद पानी खरीदना पड़ता है, या स्टेशन परिसर में लगे प्याऊ से भीड़ में पानी लेना पड़ता है।

क्यों बंद हुई मशीनें?

Bhopal News: भोपाल रेलवे स्टेशन पर पांच रुपये में शुद्ध पानी उपलब्ध कराने  वाली मशीनें बंद, यात्री महंगा बोतलबंद पानी खरीदने को मजबूर - Machines  providing ...

स्टेशन पर वॉटर मशीनों का संचालन करने वाले पुराने ऑपरेटर का कॉन्ट्रैक्ट खत्म हो चुका है। इसके बाद रेलवे ने नई निविदा प्रक्रिया शुरू की, जो अब अंतिम चरण में है।

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही स्टेशन पर यह सुविधा फिर से शुरू हो जाएगी, लेकिन कब तक, इसका स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है।

यात्रियों की शिकायतें

यात्रियों का कहना है कि—

“भीषण गर्मी में स्टेशन पर पानी के लिए लंबी लाइन लगानी पड़ती है, और बोतलबंद पानी सबके बस की बात नहीं। स्टेशन पर तो कम से कम मूलभूत सुविधाएं होनी ही चाहिए।” — यात्री राजेश कुमार

समाधान की उम्मीद, लेकिन कब?

रेलवे द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार:

  • नई एजेंसी के लिए टेंडर प्रक्रिया अंतिम चरण में है

  • जल्द शुरू हो सकता है वॉटर वेंडिंग सिस्टम

  • मशीनें दोबारा चालू होने पर फिर मिलेगी राहत

भोपाल जैसे प्रमुख स्टेशन पर वॉटर वेंडिंग मशीनों का बंद होना यात्रियों के लिए गंभीर परेशानी का कारण है। गर्मी के इस मौसम में पानी एक मूलभूत जरूरत है, जिसे नजरअंदाज करना किसी भी सूरत में ठीक नहीं। रेलवे को प्राथमिकता के आधार पर इस सुविधा को जल्द बहाल करना चाहिए।

भोपाल AIIMS में एक और चिकित्सा उपलब्धि: मां ने बेटे को दी जिंदगी, 9वां किडनी ट्रांसप्लांट रहा सफल

भोपाल एम्स में 21 अप्रैल को एक 24 वर्षीय युवक का सफल किडनी ट्रांसप्लांट किया गया, जिसने न सिर्फ चिकित्सा की सफलता को दर्शाया, बल्कि मां-बेटे के रिश्ते की अनूठी मिसाल भी कायम की। बिहार निवासी युवक को डेढ़ साल से किडनी फेल्योर की समस्या थी। जब एम्स दिल्ली में लंबी वेटिंग लिस्ट से राहत नहीं मिली, तब उसने भोपाल का रुख किया—जहां उसकी मां ने अपनी किडनी दान कर बेटे को नई जिंदगी दी।

कैसे हुआ ट्रांसप्लांट: जांच, मैचिंग और मेडिकल टीम का समर्पण

भोपाल एम्स पहुंचने के बाद युवक की सभी जरूरी जांचें की गईं। क्रॉस-मैचिंग में मां की किडनी उसके शरीर से मेल खा गई। डॉक्टरों की टीम ने 21 अप्रैल को सफलतापूर्वक किडनी प्रत्यारोपण किया। यह भोपाल एम्स का नवां किडनी ट्रांसप्लांट था।

जल्द होगा बच्चों का किडनी ट्रांसप्लांट भी

एम्स में अब पीडियाट्रिक किडनी ट्रांसप्लांट की भी तैयारी शुरू हो गई है। कुछ बच्चों की प्रक्रिया प्रारंभिक स्तर पर है और डोनर से मेल होने पर जल्द ही उनका ऑपरेशन किया जाएगा। एम्स में पहला किडनी ट्रांसप्लांट 22 जनवरी 2024 को, और पहला कैडेवर डोनेशन आधारित ट्रांसप्लांट 8 नवंबर 2024 को हुआ था।

Kidney transplantation turns back the clock on renal aging

अंगदान की ज़रूरत और वर्तमान स्थिति

भारत में अंगदान की दर अब भी कम बनी हुई है। नेशनल ऑर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (NOTTO) की रिपोर्ट के अनुसार:

  • वर्ष 2023 में पूरे देश में 1,099 कैडेवर डोनेशन हुए।

  • तेलंगाना रहा अग्रणी: 252 डोनेशन

  • मध्यप्रदेश में मात्र 8 डोनेशन, जो जागरूकता की कमी दर्शाता है।

बोन मैरो ट्रांसप्लांट को मिला आयुष्मान भारत में स्थान

सरकार ने आयुष्मान भारत योजना में अब उन्नत तकनीकों को शामिल करना शुरू कर दिया है:

  • बोन मैरो ट्रांसप्लांट,

  • इंटरवेंशनल न्यूरो रेडियोलॉजी,

  • और अन्य आधुनिक उपचार अब योजना के दायरे में हैं।

इससे ब्लड कैंसर और खून से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित मरीजों को बेहतर इलाज की सुविधा मिलेगी।

जन-जागरूकता की जरूरत

मध्यप्रदेश में अंगदान की दर बेहद कम है। जरूरी है कि:

  • लोग कैडेवर डोनेशन (ब्रेन डेड मरीजों से अंगदान) के महत्व को समझें।

  • मीडिया, मेडिकल संस्थाएं और सरकार मिलकर अंगदान जागरूकता अभियान चलाएं।

भोपाल एम्स में हुआ यह किडनी ट्रांसप्लांट सिर्फ एक सर्जरी नहीं, बल्कि मां के प्रेम, चिकित्सा विज्ञान की प्रगति और सेवा भावना का संगम है। यह घटना न केवल मेडिकल क्षेत्र में एक उपलब्धि है, बल्कि समाज को भी सोचने पर मजबूर करती है कि हम कैसे दूसरों की जिंदगी बचाने में योगदान दे सकते हैं।