Monday, April 6, 2026
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MP News: अक्षय तृतीया पर भोपाल में सामूहिक विवाह सम्मेलन, 151 जोड़ों ने विवाह बंधन में बंधकर नया जीवन शुरू किया

अक्षय तृतीया के मौके पर भोपाल में सामूहिक विवाह सम्मेलन का आयोजन बड़े धूमधाम से किया गया। इस अवसर पर फंदा में 151 जोड़े विवाह के बंधन में बंधे। विधायक रामेश्वर शर्मा, जनपद अध्यक्ष प्रमोद राजपूत समेत अन्य महत्वपूर्ण व्यक्तित्व इस आयोजन में शामिल हुए। इस समारोह में सभी जोड़ों को उपहार के तौर पर श्रीरामचरित मानस भेंट की गई।

मुख्यमंत्री कन्या दान योजना के तहत सामूहिक विवाह सम्मेलन

मुख्यमंत्री कन्या दान योजना के तहत आयोजित इस सामूहिक विवाह सम्मेलन में कुल 151 जोड़े शामिल हुए। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ दूल्हा-दुल्हन ने विवाह सूत्र में बंधकर एक नया जीवन शुरू किया। इस आयोजन का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद परिवारों के बच्चों के लिए विवाह की कठिनाइयों को कम करना है, ताकि वे बिना किसी आर्थिक बोझ के अपना विवाह संपन्न कर सकें।

अक्षय तृतीया पर विशेष आयोजन और जिला प्रशासन की निगरानी

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इस आयोजन के दौरान जिला प्रशासन की टीमें यह सुनिश्चित कर रही हैं कि किसी भी तरह का बाल विवाह न हो। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने इस पर निगरानी रखने के लिए टीमों का गठन किया है। इस प्रकार की पहल से बाल विवाह की रोकथाम के साथ-साथ समाज में जागरूकता भी बढ़ रही है।

अन्य सामूहिक विवाह सम्मेलन: विभिन्न समाजों का योगदान

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अक्षय तृतीया के मौके पर शहर के विभिन्न हिस्सों में भी सामूहिक विवाह सम्मेलन आयोजित किए गए, जहां कई समाजों ने इस आयोजन में भाग लिया:

  • अखिल भारतीय पाल महासभा: बिट्टन मार्केट स्थित दशहरा मैदान में 51 जोड़ों का सामूहिक विवाह हुआ।

  • श्री 360 गौत्रिय खटीक समाज: शाहजहानी पार्क में 11 जोड़ों का विवाह संपन्न हुआ।

  • फूल माली समाज: ईंटखेड़ी में 19 जोड़ों का विवाह हुआ।

  • मुख्यमंत्री कन्यादान योजना: जंबूरी मैदान में 51 जोड़े विवाह सूत्र में बंधे।

  • नागर धाकड़ समाज: औबेदुल्लागंज और भौंरी बकानिया में सामूहिक विवाह आयोजित हुए।

  • अखिल भारतीय श्री क्षत्रिय राजपूत समाज: करोंद स्थित कनक मैरिज गार्डन में सामूहिक विवाह सम्मेलन हुआ।

मुख्यमंत्री कन्यादान योजना का महत्व

मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के अंतर्गत, राज्य सरकार द्वारा गरीब परिवारों की बेटियों का विवाह करवाने के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है। इस योजना से न केवल विवाह को आसान बनाया जा रहा है, बल्कि समाज में सशक्तिकरण का संदेश भी दिया जा रहा है। सामूहिक विवाह सम्मेलन के माध्यम से सरकार सामाजिक समरसता और सहयोग की भावना को भी बढ़ावा दे रही है।

भोपाल: समारोह के दौरान बारात और सात फेरे

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शाम को बिट्टन मार्केट में अभा पाल महासभा द्वारा आयोजित सामूहिक विवाह सम्मेलन में बारात का आगमन हुआ और सभी जोड़ों ने सात फेरे लेकर अपने जीवन के इस नए अध्याय की शुरुआत की। इस विशेष अवसर पर समुदाय के सभी सदस्य एकजुट होकर विवाह की खुशी में शामिल हुए।

अक्षय तृतीया के अवसर पर हुए सामूहिक विवाह सम्मेलन ने न केवल विवाह की संस्कृति को सहेजने का काम किया, बल्कि समाज में एकता, समृद्धि और भाईचारे को भी बढ़ावा दिया। यह आयोजन मुख्यमंत्री कन्या दान योजना की सफलता का एक उदाहरण बनकर उभरा है, जो समाज में बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

मध्यप्रदेश में सरकारी भर्ती प्रक्रिया में बड़ा बदलाव, एक परीक्षा से होंगे सभी पदों की भर्तियाँ

मध्यप्रदेश में अब सरकारी नौकरी की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस महत्वपूर्ण बदलाव की घोषणा की है, जिसके तहत अब मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की परीक्षाएँ यूपीएससी (UPSC) के तर्ज पर आयोजित की जाएंगी। इसका उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाना है। इस नई प्रक्रिया के तहत साल में केवल एक परीक्षा होगी, जिसके जरिए विभिन्न श्रेणियों के पदों पर उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा। आइए जानते हैं इस बदलाव के बारे में विस्तार से।

एमपीपीएससी की परीक्षा अब यूपीएससी की तर्ज पर

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में सरकारी भर्ती की प्रक्रिया को यूपीएससी के मॉडल के आधार पर किया जाएगा। इस प्रक्रिया के तहत सभी सरकारी पदों के लिए एक ही परीक्षा आयोजित होगी, और इसके माध्यम से चयन किया जाएगा। इससे सभी विभागों में रिक्त पदों की भर्ती समय पर और बिना किसी देरी के होगी।

MP CM Mohan Yadav to seek investment in Space Technology during 2-day  investors summit road-show in Bengaluru | Bengaluru - Hindustan Times

सितंबर में जारी होगा 2026 का भर्ती कैलेंडर

राज्य सरकार ने यह भी घोषणा की है कि हर साल एक स्थाई भर्ती कैलेंडर जारी किया जाएगा। 2026 के लिए पहला भर्ती कैलेंडर सितंबर 2025 में जारी किया जाएगा। इस कैलेंडर के आधार पर सभी विभागों को एक बार में पदों की मांग करनी होगी, और उसी के हिसाब से परीक्षा आयोजित की जाएगी। इस बदलाव से भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी।

साल में एक ही परीक्षा और एक ही मेरिट सूची

अब मध्यप्रदेश में भी संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की तर्ज पर एक ही परीक्षा होगी और एक ही मेरिट सूची तैयार की जाएगी, जिसमें विभिन्न श्रेणियों के उम्मीदवारों को शामिल किया जाएगा। चयन सूची के साथ प्रतीक्षा सूची भी तैयार की जाएगी, जिससे भविष्य में रिक्त पदों पर जल्दी भर्ती की प्रक्रिया पूरी हो सकेगी।

MPESB में भी बदलाव: सीमित परीक्षाएँ आयोजित होंगी

मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) भी अब अपनी परीक्षाओं में बदलाव करेगा। 28 से अधिक परीक्षाओं की जगह सिर्फ 6 परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी। इससे उम्मीदवारों को बार-बार परीक्षा देने के झंझट से राहत मिलेगी और प्रक्रिया और अधिक व्यवस्थित होगी।

ऑनलाइन और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया

नई प्रक्रिया के तहत सभी भर्ती क्रियाएँ पूरी तरह से ऑनलाइन और पारदर्शी होंगी। नियम, विज्ञापन, परीक्षा की सभी जानकारी सार्वजनिक की जाएगी, ताकि उम्मीदवारों को कोई संदेह न हो और किसी प्रकार की न्यायिक अड़चने का सामना न करना पड़े।

समान भर्ती नियम होंगे सभी विभागों के लिए

अब सभी विभागों के लिए भर्ती नियम समान होंगे। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) एक मॉडल नियम बनाएगा, जिससे विज्ञापन जारी करने में देरी नहीं होगी और परीक्षा एजेंसियों के लिए प्रक्रिया आसान होगी।

आने वाले वर्षों में लाखों पदों पर भर्ती

sarkari naukri 3000 government job 2022 bsf ssc vacancy 10th 12th pass govt  job vacancy sdmp | सरकारी नौकरी: 3000 से ज्यादा पदों पर भर्तियां, 12वीं पास  से लेकर डिग्री होल्डर तक

मध्यप्रदेश सरकार अगले दो से तीन वर्षों में 2 से 2.5 लाख पदों पर भर्ती करने का लक्ष्य रखेगी। इसमें रिक्त पदों के साथ-साथ पदोन्नति से खाली हुए पदों को भी भरा जाएगा। इस प्रकार से नौकरी चाहने वाले उम्मीदवारों के लिए बड़ी संख्या में अवसर होंगे।

नए नियम जनवरी 2026 से होंगे लागू

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि नए भर्ती नियमों का मसौदा लगभग तैयार है और इसे कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद जनवरी 2026 से लागू किया जाएगा। इस प्रक्रिया के लागू होने से राज्य में सरकारी भर्ती में पारदर्शिता और समयबद्धता आएगी।

इस बदलाव के बाद, मध्यप्रदेश में सरकारी नौकरी की प्रक्रिया और अधिक सुगम, पारदर्शी और समय पर होगी। उम्मीदवारों को अब बार-बार परीक्षा देने की चिंता नहीं होगी और सभी पदों पर भर्ती की प्रक्रिया बिना किसी देरी के पूरी की जाएगी। इस बदलाव से राज्य के युवा बेरोजगारों को नई दिशा मिलेगी और नौकरी पाने का अवसर भी बढ़ेगा।

आगे की राह मध्यप्रदेश में सरकारी नौकरी की प्रक्रिया में यह बदलाव उम्मीदों को नया मुकाम दे सकता है। जब सभी विभागों में भर्ती एक ही प्रक्रिया से होगी, तो न सिर्फ उम्मीदवारों के लिए यह सरल होगा, बल्कि सरकारी विभागों के लिए भी कार्य में तेजी

सिंहस्थ भूमि पर 9 साल से फैले अतिक्रमण पर चला बुलडोजर, नगर निगम ने 45 अवैध दुकानें ध्वस्त कीं

मुख्य बातें:

  • 45 अवैध दुकानों पर निगम की जेसीबी चली

  • एक महीने पहले दी गई थी चेतावनी, फिर भी नहीं हटे अतिक्रमण

  • दुकानदार बोले—बिना सूचना के हुई कार्रवाई, सामान तक नहीं बचा पाए

उज्जैन के सिंहस्थ क्षेत्र की शासकीय भूमि पर लगभग 9 साल से पसरा अतिक्रमण आखिरकार रविवार को हटाया गया। नगर निगम ने जिला प्रशासन और पुलिस की मदद से मकोड़ियाआम नाके से खाक चौक तक की जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया। इस दौरान टीनशेड से बनी 45 अवैध दुकानें, कार गैरेज, कार वॉशिंग सेंटर, और गोदाम जेसीबी और पोकलेन की मदद से ध्वस्त किए गए।

कार्रवाई रविवार दोपहर 1.30 बजे से शाम 5 बजे तक चली। इसमें निगम ने 2 पोकलेन, 5 जेसीबी, 5 डंपर, एक क्रेन और दो फायर फाइटर का इस्तेमाल किया। टीम में एडीएम प्रथम कौशिक, निगम आयुक्त आशीष पाठक, अपर आयुक्त संदीप शिवा, एडिशनल एसपी नीतेश भार्गव, सीएसपी सुमित अग्रवाल और बड़ी संख्या में पुलिस बल मौजूद रहा।

निगम ने पहले ही कर दी थी मुनादी और नोटिस जारी

नगर निगम द्वारा अतिक्रमण हटाने के लिए करीब एक माह पहले मुनादी कराई गई थी। इससे पहले लिखित नोटिस भी दिए गए थे, पर दुकानदारों ने अतिक्रमण नहीं हटाया। मजबूर होकर निगम को सीधी कार्रवाई करनी पड़ी

दुकानदारों की नाराजगी: “हमें समय नहीं दिया गया”

कार्रवाई के दौरान कई दुकानदारों ने विरोध जताया और कहा कि उन्हें सामान हटाने का मौका तक नहीं मिला। कुछ दुकानों में माल टूटने की शिकायतें भी सामने आईं। दुकानदारों का कहना है कि एक दिन पहले तक उन्हें कोई सूचना नहीं दी गई थी

मैरिज गार्डन पर कोर्ट का स्टे, नहीं हो सकी कार्रवाई

इसी क्षेत्र में बना एक मैरिज गार्डन भी कार्रवाई के दायरे में था, लेकिन कोर्ट से स्टे होने के कारण वहां तोड़फोड़ नहीं की गई। सिंहस्थ 2016 के बाद से इस क्षेत्र में लगातार अवैध निर्माण और व्यवसाय बढ़ते जा रहे थे, जो अब हटाए जा रहे हैं।

कब्जा हटाने की कार्रवाई से जुड़े तथ्य

दिल्ली की अवैध दुकानों पर चला बुलडोजर, JCB के आगे आए "आप" MLA - Dainik  Bhaskar | Uttar Pradesh News, UP Dainikbhaskar

  • मकोड़ियाआम नाका से खाक चौक तक की भूमि सिंहस्थ क्षेत्र में आती है

  • लगभग 40+ अवैध निर्माण इन वर्षों में खड़े हो गए थे

  • सड़क तक वाहन पार्किंग और अतिक्रमण की वजह से ट्रैफिक भी प्रभावित हो रहा था

  • अब तक केवल मैरिज गार्डन पर स्टे के चलते कार्रवाई रुकी है

कार्रवाई में शामिल अधिकारी और संसाधन

  • एडीएम प्रथम कौशिक

  • निगम आयुक्त आशीष पाठक

  • अपर आयुक्त संदीप शिवा

  • एडिशनल एसपी नीतेश भार्गव

  • सीएसपी सुमित अग्रवाल

  • 2 पोकलेन, 5 जेसीबी, 5 डंपर, 1 क्रेन, 2 फायर फाइटर

निगम की चेतावनी: अब दोबारा कब्जा किया तो सीधे केस दर्ज होगा

नगर निगम अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जिस भूमि को खाली कराया गया है, वहां फिर से कब्जा करने की कोशिश की गई तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।

सिंहस्थ क्षेत्र में वर्षों से चल रहे अतिक्रमण पर नगर निगम ने सख्त रुख अपनाते हुए रविवार को बड़ा एक्शन लिया। इस कार्रवाई से यह स्पष्ट संदेश गया है कि अब शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। हालांकि, सूचना न मिलने की शिकायतों और अदालत की रोक जैसी चुनौतियाँ भी प्रशासन को झेलनी पड़ीं।

सरकारी योजना के मकान किराए पर दिए तो अब होगी बड़ी कार्रवाई, ‘हाउसिंग फॉर ऑल’ में गड़बड़ी पर सरकार सख्त

मुख्य बिंदु:

  • फ्लैट में किराएदार या रिश्तेदार मिले तो होगा आवंटन रद्द
  • एक ही परिवार को दो बार योजना का लाभ नहीं मिलेगा

  • सर्वे में अवैध कब्जा, फर्जी दस्तावेज और एक से ज्यादा फ्लैट की भी हो रही जांच

अगर आपने हाउसिंग फॉर ऑल (Housing For All) योजना के तहत सरकारी फ्लैट लिया है और उसे किराए पर दे रखा है, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। सरकार ऐसे आवंटियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी में है। अब ऐसे लोगों का फ्लैट आवंटन निरस्त किया जा सकता है, और उन्हें दोबारा कोई सरकारी आवास नहीं मिलेगा।

दक्षिण-पश्चिम विधानसभा से हुई सर्वे की शुरुआत

राजधानी में 21 अप्रैल से जिला प्रशासन और नगर निगम की संयुक्त टीम द्वारा सर्वे शुरू किया गया है। शुरुआत दक्षिण-पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से हुई है। यह सर्वे करीब एक महीने तक चलेगा, जिसमें सरकारी योजनाओं के तहत आवंटित सभी फ्लैट्स की स्थिति की समीक्षा की जाएगी।

क्या देखा जा रहा है सर्वे में?

सर्वे के दौरान ये प्रमुख बातें जांची जा रही हैं:

  1. फ्लैट में खुद आवंटी रह रहा है या नहीं

  2. फ्लैट किराए पर दिया गया है या खाली पड़ा है

  3. फ्लैट में अवैध कब्जा तो नहीं है

  4. कहीं एक व्यक्ति को एक से ज्यादा फ्लैट तो नहीं मिले

अब तक क्या सामने आया?

अब तक अंबेडकर नगर के केवल 84 फ्लैट्स का सर्वे किया गया है, जिनमें से 6 फ्लैट ऐसे पाए गए हैं, जिनमें किराएदार रह रहे थे — यानी लगभग 7% फ्लैट का दुरुपयोग हुआ है।

किरायेदार या रिश्तेदार मिले तो रद्द होगा आवंटन

Pradhan Mantri Awas Yojana: Housing for All

अगर किसी फ्लैट में हितग्राही खुद न रहकर किरायेदार या परिवार का कोई अन्य सदस्य रह रहा है, या फ्लैट का कोई उपयोग ही नहीं हो रहा, तो ऐसे मामलों में आवंटन को तत्काल निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

क्या कहता है नियम?

हाउसिंग फॉर ऑल योजना के नियमों के अनुसार:

  • एक व्यक्ति को जीवन में केवल एक बार इस योजना का लाभ मिल सकता है।

  • अगर व्यक्ति फ्लैट किराए पर देता है या उसका व्यावसायिक उपयोग करता है, तो योजना का उल्लंघन माना जाएगा।

  • दूसरी बार योजना का लाभ नहीं मिलेगा।

इन कॉलोनियों में होना है सर्वे:

  • अंबेडकर नगर

  • आराधना नगर

  • राहुल नगर

  • श्याम नगर

  • शबरी नगर

  • मद्रासी कॉलोनी

  • अर्जुन नगर
    (अन्य प्रोजेक्ट एरिया भी शामिल)

कौन कर रहा है सर्वे?

6 सदस्यों की सर्वे टीम बनाई गई है, जिसमें शामिल हैं:

  • नायब तहसीलदार

  • पटवारी

  • नगर निगम का राजस्व अमला

  • स्वच्छता अमला

  • पुलिस विभाग

सर्वे में मिले चौंकाने वाले तथ्य:

1. अवैध कब्जे:

कई फ्लैट्स में ऐसे लोग पाए गए हैं जो बिना किसी वैध दस्तावेज के रह रहे हैं।

2. फर्जी लाभ:

कुछ लाभार्थियों ने एक से ज्यादा फ्लैट हड़प लिए हैं। रिकॉर्ड से नाम और फ्लैट मिलान कर गड़बड़ी पकड़ी जा रही है।

सर्वे के बाद क्या होगा?

प्रशासन की ओर से स्पष्ट कर दिया गया है कि:

  • गलत तरीके से आवंटित या किराए पर दिए गए फ्लैट्स का आवंटन निरस्त किया जाएगा।

  • फर्जी लाभ लेने वालों पर कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।

  • रिक्त फ्लैट्स को नए पात्र आवंटियों को सौंपा जाएगा।

अगर आप ‘हाउसिंग फॉर ऑल‘ जैसी योजनाओं का लाभ लेकर उसे किराए पर चला रहे हैं या खुद न रहकर किसी और को रख रहे हैं, तो सतर्क हो जाइए। प्रशासन की नजर अब ऐसे हर मकान और हर आवंटी पर है। नियमों का उल्लंघन करने पर आपको न सिर्फ फ्लैट गंवाना पड़ सकता है, बल्कि भविष्य में सरकारी योजनाओं से भी वंचित किया जा सकता है।

MP Tech Growth Conclave 2025: इंदौर से गूंजा निवेश का बिगुल, 20 हजार करोड़ के प्रस्ताव, 75 हजार को मिलेगा रोजगार

मुख्य बातें

  • 20,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव
  • 75,000 नए रोजगार के अवसर

  • भोपाल में इलेक्ट्रॉनिक पार्क और IT टॉवर का निर्माण

  • पंचशील कंपनी से मांगे गए 5000 करोड़ के निवेश

  • 4 नई IT पॉलिसी और स्टार्टअप्स को प्लग-एंड-प्ले सुविधा

  • 60 दिनों में हुआ मेगा आयोजन

27 अप्रैल को इंदौर में आयोजित MP Tech Growth Conclave 2025 में मध्यप्रदेश सरकार को 20,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इन प्रस्तावों से राज्य में 75,000 लोगों को रोजगार मिलेगा। उन्होंने बताया कि भोपाल में इलेक्ट्रॉनिक पार्क और इंदौर में आईटी टॉवर का निर्माण किया जाएगा।

सीएम बोले: मप्र बना निवेश का केंद्र, रिकॉर्ड तोड़े

सीएम ने कहा, “हमने छोटे-छोटे स्थानों पर उद्योगपतियों को बुलाया। हमारे पास जमीन कम पड़ रही है क्योंकि मांग बहुत अधिक है।” उन्होंने यह भी कहा कि मप्र में अब तक के निवेश के सारे रिकॉर्ड टूट चुके हैं, और इस माहौल को देखकर स्पष्ट है कि प्रदेश निवेशकों की पहली पसंद बन चुका है।

इंदौर की पहचान बदली: स्वच्छता से ग्रीन नगरी की ओर

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सीएम ने मां अहिल्या की नगरी इंदौर की तारीफ करते हुए कहा कि शहर अब सिर्फ सबसे स्वच्छ नगरी नहीं, बल्कि ग्रीन नगरी की ओर भी तेज़ी से बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि शहर में 51 लाख पेड़ लगाए गए हैं जो पर्यावरणीय बदलाव का प्रतीक हैं।

मुख्यमंत्री ने इवेंट की भव्यता की तुलना इंद्र के दरबार से की और कहा, “यह दरबार इंद्र के दरबार से शोभायमान होकर मुकाबला कर रहा होगा।”

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पंचशील ग्रुप से 5000 करोड़ के निवेश की मांग

कॉन्क्लेव में पंचशील कंपनी के अतुल ने 1000 करोड़ के निवेश की घोषणा की, जिस पर सीएम ने तुरंत कहा कि “1000 करोड़ से काम नहीं चलेगा, हमें आपसे 5000 करोड़ का निवेश चाहिए।”

नई घोषणाएं: टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप सेक्टर को मिलेगा बूस्ट

कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री ने कई बड़े ऐलान किए जो टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप्स को नई ऊंचाई देंगे:

घोषित योजनाएं:

  1. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजी का क्षेत्रीय केंद्र

  2. एग्रीटेक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस – IIT इंदौर में

  3. एमपी डिजिटल इकोनॉमी मिशन का गठन

  4. भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर में IT सुविधा केंद्र

  5. भोपाल में IT पार्क टॉवर – 125 करोड़ की लागत, 3 लाख स्क्वायर फीट लीजेबल स्पेस

  6. देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी इंदौर में प्लग एंड प्ले सुविधा

IT सेक्टर के लिए घोषित 4 पॉलिसियां

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मुख्यमंत्री ने कहा कि मप्र की तकनीकी क्षमता को बढ़ावा देने के लिए राज्य ने चार नई आईटी नीतियों को लागू किया है। इसके अंतर्गत बैरसिया में 209 करोड़ का इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट शामिल है।

GIS से 30 लाख करोड़ का निवेश प्रस्ताव मिला

सीएम मोहन यादव ने बताया कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS) में मप्र को 30 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। उन्होंने कहा कि “हम रुके नहीं हैं, 60 दिनों से भी कम में यह कॉन्क्लेव कर दिखाया।”

MP Tech Growth Conclave 2025 ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मप्र अब सिर्फ कृषि या पर्यटन राज्य नहीं रहा — यह टेक्नोलॉजी, निवेश और रोजगार का नया हब बनता जा रहा है। आने वाले समय में यहां युवाओं को न सिर्फ रोजगार, बल्कि ग्लोबल लेवल की स्किलिंग और इनोवेशन के अवसर भी मिलेंगे।

भोपाल में बिगड़ती सुरक्षा: बढ़ती वारदातें, बंद पड़े CCTV कैमरे, सड़क हादसों और चोरी के मामलों में इजाफा

मुख्य बिंदु 

  • चोरी, हिट एंड रन और फौजदारी के मामलों में तेजी से वृद्धि

  • पुलिस की निगरानी का मुख्य जरिया CCTV, पर कई कैमरे खराब

  • मेट्रो निर्माण और तकनीकी कारणों से 40 से अधिक कैमरे बंद

  • स्मार्ट सिटी और पुलिस विभाग मिलकर लगा रहे हैं नए कैमरे

  • सड़क हादसों और वाहन चोरी के मामलों में चौंकाने वाला आंकड़ा

भोपाल में बढ़ रहे अपराध: हर दिन 7 वाहन चोरी, हिट एंड रन के केस भी बढ़े

पिछले कुछ महीनों में भोपाल में अपराध के ग्राफ में लगातार इजाफा हुआ है। चोरी, फौजदारी, मोबाइल स्नैचिंग और हिट एंड रन की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, हर दिन औसतन 7 वाहन चोरी हो रहे हैं, जबकि सड़क हादसों की औसत संख्या हर महीने 489 तक पहुंच चुकी है

CCTV कैमरे हुए फेल: अपराधियों की पहचान में पुलिस को मुश्किल

जिन CCTV कैमरों के भरोसे पुलिस अपराध पर नजर रखती है, वही अब बड़ी संख्या में बंद हो चुके हैं। दैनिक भास्कर के सर्वे में सामने आया कि शहर के संवेदनशील क्षेत्रों और यहां तक कि सेंट्रल जेल परिसर में भी कैमरे ठीक से काम नहीं कर रहे हैं।

  • जेल रोड पर केवल एक कैमरा काम कर रहा है

  • बोर्ड ऑफिस, लिंक रोड, नर्मदापुरम रोड, और वीआईपी रोड पर लगे कई कैमरे खराब

भोपाल पुलिस के CCTV प्रभारी मनोज बेग ने बताया कि शहर की 153 लोकेशनों पर 781 कैमरे लगाए गए हैं, जिनमें से लगभग 40 कैमरे बंद हैं। इसकी बड़ी वजह मेट्रो निर्माण और तकनीकी खराबी है। यह संख्या समय-समय पर बदलती रहती है।

एनपीआर कैमरे आउटर एरिया में निगरानी के लिए

New Cop On Board: How Is Artificial Intelligence Helping Police Prevent  Crime

शहर के आउटर क्षेत्रों की 16 लोकेशनों पर 152 NPR कैमरे लगे हैं जो भोपाल में प्रवेश और निकासी करने वाले वाहनों की निगरानी करते हैं। ये नंबर प्लेट पहचानने की तकनीक से लैस हैं और ट्रैफिक की सुरक्षा में मददगार हैं।

450 नई लोकेशनों पर 2,000 कैमरे लगाने की योजना

भविष्य की योजना के तहत भोपाल में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 450 नई लोकेशनों पर 2,000 नए CCTV कैमरे लगाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। स्मार्ट सिटी और पुलिस विभाग मिलकर इस योजना को जमीन पर उतारने की तैयारी में हैं।

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट: RNBD और NPR कैमरे लगे, लेकिन स्थिति अस्पष्ट

स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत 29 चौराहों पर 332 कैमरे लगाए गए हैं जिनमें RNBD (रियल-टाइम निगरानी) और NPR (नंबर प्लेट रीडर) कैमरे शामिल हैं। हालांकि, इन कैमरों की मौजूदा स्थिति — कितने काम कर रहे हैं और कितने बंद — इसकी जानकारी अभी स्पष्ट नहीं है।

सड़क हादसे बढ़े, फरार आरोपी पकड़ना मुश्किल

108 एंबुलेंस सेवा की रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में अब तक 5869 सड़क हादसे दर्ज किए जा चुके हैं। पिछले तीन वर्षों में 108 कॉल्स में 15% की वृद्धि दर्ज की गई है। खराब कैमरों के कारण कई हिट एंड रन मामलों में आरोपी पकड़ से बाहर हैं।

कमिश्नर ऑफिस से जारी आंकड़ों के अनुसार, 2023 की तुलना में 2024 में अपहरण के मामलों में 15% की वृद्धि दर्ज की गई है। चोरी और मोबाइल स्नैचिंग जैसे अपराध आम होते जा रहे हैं।

बढ़ते अपराधों पर रोक कैसे लगे जब निगरानी ही फेल हो जाए?

भोपाल जैसे राजधानी शहर में बढ़ते अपराध और फेल होती निगरानी व्यवस्था गंभीर चिंता का विषय हैं। जहां एक ओर शहर डिजिटल सुरक्षा की ओर बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर तकनीकी खामियों और लापरवाही के कारण अपराधियों को पकड़ना मुश्किल हो रहा है। अब देखना होगा कि आने वाली CCTV योजना अपराध रोकने में कितनी कारगर साबित होती है।

Indore liquor scam: ईडी की 18 जगहों पर बड़ी कार्रवाई, 100 करोड़ की धोखाधड़ी का पर्दाफाश

मुख्य बिंदु

  • इंदौर में ईडी की 18 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी
  • 2015-2018 के बीच 100 करोड़ के फर्जी बैंक चालानों से की गई धोखाधड़ी
  • शराब कारोबारियों और आबकारी अफसरों की मिलीभगत से हुआ बड़ा घोटाला
  • पहले भी हुई थी पुलिस और विभागीय कार्रवाई, पर ठोस नतीजे नहीं निकले

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार सुबह इंदौर में 18 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी कर बड़ी कार्रवाई की। यह रेड मुख्य रूप से उन शराब कारोबारियों पर की गई है, जिन पर आबकारी विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर करोड़ों का घोटाला करने का आरोप है। यह कार्रवाई इंदौर के बसंत विहार कॉलोनी, तुलसी नगर और महालक्ष्मी नगर सहित कई इलाकों में की गई।

कैसे हुआ घोटाला? जानिए घोटाले की पूरी स्कीम

इस घोटाले की शुरुआत 2015 से 2018 के बीच हुई, जब इंदौर जिला आबकारी कार्यालय में शराब उठाने के लिए 194 फर्जी बैंक चालानों का इस्तेमाल किया गया। चालानों में हजारों रुपये जमा दिखाए गए, लेकिन रिकॉर्ड में लाखों रुपए की राशि दर्शाकर अधिक शराब उठाई गई और अवैध रूप से बेची गई। यह सारा घोटाला गोदामों और दुकानों के माध्यम से किया गया।

ईडी की जांच का आधार: पहले भी हो चुकी है FIR

Chennai money laundering case: ED seizes Rs 1,000 cr worth assets of  Chennai-based firm in PMLA case

इस मामले में 12 अगस्त 2017 को रावजी बाजार पुलिस स्टेशन में 14 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया था। आबकारी विभाग की आंतरिक जांच रिपोर्ट के आधार पर ईडी ने 2024 में इस मामले में जांच शुरू की और विभाग से आवश्यक दस्तावेज मांगे।

जिनके ठिकानों पर पड़े छापे ये हैं प्रमुख नाम

  • एमजी रोड समूह: अविनाश और विजय श्रीवास्तव

  • जीपीओ चौराहा समूह: राकेश जायसवाल

  • तोपखाना समूह: योगेंद्र जायसवाल

  • बायपास चौराहा समूह: राहुल चौकसे

  • गवली पलासिया समूह: सूर्यप्रकाश अरोरा

  • अन्य: गोपाल शिवहरे, लवकुश, प्रदीप जायसवाल

निलंबित हुए थे कई अधिकारी सिस्टम की मिलीभगत उजागर

2017 में हुई प्राथमिक जांच में आबकारी विभाग के अधिकारी संजीव दुबे सहित कई अफसरों को निलंबित कर दिया गया था। इन अधिकारियों पर चालानों का मिलान समय पर न करने और जानबूझकर अनदेखी करने के आरोप लगे थे।
निलंबित अधिकारी:

  • संजीव दुबे (जिला आबकारी अधिकारी)

  • डीएस सिसोदिया (लसूड़िया वेयरहाउस प्रभारी)

  • सुखनंदन पाठक (महू वेयरहाउस प्रभारी)

  • कौशल्या सबवानी (सब इंस्पेक्टर)

  • धनराज सिंह परमार (हेड क्लर्क)

  • अनमोल गुप्ता (कर्मचारी)

2024 में ईडी ने लिखा पत्र मांगे गए दस्तावेज और बैंक डिटेल्स

ईडी ने 2024 में आबकारी घोटाले से जुड़े आरोपियों की एफआईआर, बैंक खातों, वसूली और आंतरिक जांच रिपोर्ट की जानकारी मांगी थी।

ईडी ने आबकारी विभाग को पत्र लिखकर सभी संबंधित दस्तावेज, ठेकेदारों के बैंक खाते और आंतरिक जांच रिपोर्ट सौंपने का अनुरोध किया है। साथ ही, विभाग से यह भी पूछा गया है कि ठेकेदारों से कितनी राशि वसूल की गई और अब तक जांच किस स्तर तक पहुंची है।

ऑडिट में भी नहीं मिला ठोस नतीजा जांच का निष्कर्ष शून्य

इस मामले में 11 ऑडिटरों की टीम ने करीब 1700 करोड़ रुपए के शराब चालानों की जांच की, जिसमें 2015 से 2017 तक की शराब दुकानों की नीलामी शामिल थी। लेकिन इतनी विस्तृत जांच के बाद भी कोई ठोस परिणाम नहीं निकल पाया।

ये बनाए गए हैं आरोपी बड़े नाम शामिल

  • अविनाश और विजय श्रीवास्तव

  • राकेश जायसवाल

  • योगेंद्र जायसवाल

  • राहुल चौकसे

  • सूर्यप्रकाश अरोरा

  • गोपाल शिवहरे, लवकुश, प्रदीप जायसवाल

क्या इस बार कुछ बदलेगा?

ईडी की इस सख्त कार्रवाई से उम्मीद बंधी है कि सालों से लंबित इस बड़े घोटाले में अब ठोस कार्रवाई होगी। हालांकि, पूर्व की कार्रवाईयां और जांच निष्कर्ष विफल रहे हैं, इसलिए देखना होगा कि क्या इस बार न्याय की दिशा में ठोस कदम उठाए जाते हैं।

भोपाल में रह रहे 3 पाकिस्तानियों को आदेश जारी, जल्द छोड़ना होगा भारत

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने कड़ा कदम उठाते हुए पाकिस्तानी नागरिकों को जारी 14 श्रेणियों के वीजा में से 13 को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। केवल मेडिकल वीजा को इस आदेश से छूट दी गई है।

भारत सरकार द्वारा 23 अप्रैल को जारी निर्देशों के अनुसार, जिन पाकिस्तानी नागरिकों के पास अब वैध वीजा नहीं है, उन्हें 27 अप्रैल (रविवार) तक देश छोड़ने का आदेश दिया गया है। जिनके पास मेडिकल वीजा है, उन्हें 29 अप्रैल तक भारत से लौटने को कहा गया है।

एमपी में 228 पाकिस्तानी नागरिकों की पहचान, भोपाल में भी नोटिस जारी

मध्य प्रदेश में कुल 228 पाकिस्तानी नागरिकों को चिह्नित किया गया है। इनमें से भोपाल में रह रहे तीन नागरिकों को स्थानीय पुलिस ने नोटिस जारी कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारत सरकार के आदेशों का सख्ती से पालन किया जाएगा और एक-एक पाकिस्तानी नागरिक को चिन्हित कर वापस भेजा जाएगा।

इंदौर पुलिस की तैयारी: सोमवार से कार्रवाई होगी शुरू

इंदौर के एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया ने जानकारी दी कि अब तक शॉर्ट टर्म वीजा पर आए पाकिस्तानी नागरिकों को वापस भेजने की कोई कार्रवाई नहीं हुई है, लेकिन सोमवार से वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।

ऐज फैक्टर बना उलझन का विषय, अंतिम फैसला केंद्र के स्तर पर

भोपाल में रह रहे एक पाकिस्तानी नागरिक की उम्र संबंधी स्थिति (ऐज फैक्टर) को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। स्थानीय स्तर पर इसका निपटारा नहीं किया जाएगा, बल्कि केंद्र सरकार से दिशा-निर्देश मिलने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। उम्मीद की जा रही है कि रविवार (27 अप्रैल) की रात तक स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

कौन रह सकता है भारत में? जानिए वीजा कैटेगरी का विवरण

रहने की अनुमति वाले वीजा:

  • लॉन्ग टर्म वीजा (LTV)

  • राजनयिक वीजा (Diplomatic Visa)

  • आधिकारिक वीजा (Official Visa)

इन कैटेगरी में आने वाले पाकिस्तानी नागरिक भारत में वीजा अवधि तक रह सकते हैं।

वापसी की समय सीमा:

  • मेडिकल वीजा धारकों को 29 अप्रैल तक भारत छोड़ना होगा।

  • अन्य सभी वीजा (13 कैटेगरी) वाले नागरिकों को 27 अप्रैल तक लौटना अनिवार्य है।

मुख्यमंत्री ने की समीक्षा बैठक, कहा- सख्ती से होगा आदेशों का पालन

बारिश-ओलावृष्टि से MP में किसानों की फसलें हुई चौपट, CM मोहन यादव ने कहा-  नुकसान की भरपाई की जाएगी | MP CM Mohan Yadav says the losses of farmers  affected by hailstorm

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस मुद्दे पर भोपाल पुलिस हेडक्वॉर्टर में बैठक की और अधिकारियों को निर्देश दिए कि भारत सरकार के आदेशों का हर हाल में पालन कराया जाए। उन्होंने कहा, “हम एक-एक पाकिस्तानी नागरिक को चिन्हित कर उनकी देश वापसी सुनिश्चित करेंगे।”

आतंकी हमले के बाद बढ़ी सतर्कता, केंद्र ने उठाए सख्त कदम

22 अप्रैल के हमले के बाद केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए जो कदम उठाए हैं, वह भविष्य में किसी भी प्रकार की आतंकी साजिश को रोकने की दिशा में एक निर्णायक पहल मानी जा रही है। राज्यों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि समय सीमा के भीतर सभी संबंधित पाकिस्तानी नागरिकों की वापसी सुनिश्चित की जाए।

MP News: डॉक्टरों की कमी दूर करेगी नई नीति, संविदा नियुक्ति अब 70 साल तक, मेडिकल कॉलेजों में भी होगा सुधार

मध्यप्रदेश में सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने 70 वर्ष तक के डॉक्टरों को संविदा नियुक्ति देने का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा, इंदौर और रीवा के मेडिकल कॉलेजों के आधुनिकीकरण की योजना भी बनाई गई है।

स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की दिशा में कदम

प्रदेश सरकार ने 70 वर्ष तक के डॉक्टरों को संविदा नियुक्ति देने का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इससे स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

सीनियर डॉक्टरों के अनुभव का मिलेगा लाभ

10,100+ Mature Indian Doctor Stock Photos, Pictures & Royalty-Free Images -  iStock

सीनियर डॉक्टरों के अनुभव का लाभ उठाकर स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाने की कोशिश की जा रही है। इससे चिकित्सा संस्थानों की गुणवत्ता में वृद्धि होगी और डॉक्टरों की कमी को पूरा किया जा सकेगा।

इंदौर और रीवा मेडिकल कॉलेजों का होगा आधुनिकीकरण

इंदौर और रीवा के मेडिकल कॉलेजों के आधुनिकीकरण की योजना बनाई गई है। इसमें कॉलेजों का अधोसंरचना विकास, अत्याधुनिक उपकरणों की व्यवस्था और अन्य आवश्यक कार्य शामिल हैं।

ई-एचआरएमएस पोर्टल से स्थानांतरण प्रक्रिया में पारदर्शिता

स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित ऑनलाइन ट्रांसफर पोर्टल (ई-एचआरएमएस) की तैयारी पूर्ण कर ली गई है। इससे स्थानांतरण प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से संपन्न किया जाएगा।

सीएम के बाद डिप्टी सीएम ने दिए निर्देश

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी सीनियर डॉक्टरों की सेवाएं लेने के निर्देश दिए थे। इसके बाद अब डिप्टी सीएम शुक्ल ने नियुक्ति को लेकर प्रस्ताव तैयार करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए हैं।

इंदौर में प्रशासन की बड़ी कार्रवाई: सामूहिक विवाह में 36 बाल विवाह रोके गए, सख्त चेतावनी जारी

इंदौर जिले के देपालपुर तहसील स्थित बछौड़ा गांव में शुक्रवार, 25 अप्रैल को एक सामूहिक विवाह समारोह का आयोजन किया गया था। इस आयोजन में कुल 49 जोड़े विवाह के लिए आए थे।

इंदौर: उड़नदस्ते ने मौके पर पहुंचकर की दस्तावेजों की जांच

महिला एवं बाल विकास विभाग के उड़नदस्ते को सूचना मिली कि समारोह में बाल विवाह की संभावना है। प्रभारी महेन्द्र पाठक के नेतृत्व में टीम मौके पर पहुंची और दस्तावेजों की गहन जांच की।

36 नाबालिग जोड़े पाए गए, शादी तुरंत रोकी गई

बाल विवाह पर नियंत्रण - AFEIAS

जांच के दौरान यह सामने आया कि 49 में से 36 जोड़े नाबालिग थे। इनमें से अधिकांश लड़कियां 16-17 वर्ष की थीं, जबकि लड़कों की उम्र भी 21 वर्ष से कम पाई गई। टीम ने तुरंत सभी बाल विवाह को रोक दिया और आयोजन बंद करवा दिया।

इंदौर: सिर्फ 13 जोड़ों की हुई वैध शादी

जिन 13 जोड़ों के दस्तावेजों में उम्र वैध पाई गई, उन्हीं की शादी समारोह में अनुमति दी गई। अन्य सभी जोड़े समारोह स्थल से हटा दिए गए।

आयोजकों को दी गई सख्त कानूनी चेतावनी

महिला एवं बाल विकास विभाग ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के अंतर्गत आयोजकों को चेतावनी दी है। यदि भविष्य में फिर से ऐसा प्रयास किया गया तो आयोजकों के खिलाफ FIR दर्ज की जाएगी।

इंदौर: क्या कहता है कानून?

भारतीय कानून के अनुसार:

  • लड़कियों की विवाह की न्यूनतम उम्र: 18 वर्ष

  • लड़कों की विवाह की न्यूनतम उम्र: 21 वर्ष

बाल विवाह करने या कराने पर:

  • 2 साल की सश्रम कैद या

  • 1 लाख रुपये तक का जुर्माना
    या फिर दोनों सजाएं हो सकती हैं।