Anmol Sandesh News Desk, नई दिल्ली।
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग करीब 7 साल बाद भारत पहुंचे हैं। उनके दौरे को भारत-चीन संबंधों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के बाद दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बातचीत पर पूरी दुनिया की नजर है। जिनपिंग के भारत पहुंचने से पहले चीन की ओर से भी अहम बयान जारी किया गया। चीन ने कहा कि वह भारत के साथ बातचीत बढ़ाने, मतभेदों को उचित तरीके से सुलझाने और सहयोग के रास्ते पर आगे बढ़ने के लिए तैयार है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब दोनों देशों के संबंधों में पिछले कुछ वर्षों में सीमा विवाद के कारण तनाव रहा है।
गलवान के बाद पहली भारत यात्रा
शी जिनपिंग ने इससे पहले 11 अक्टूबर 2019 को भारत का दौरा किया था। इसके कुछ महीने बाद 15 जून 2020 को गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इस घटना के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ गया और सीमा पर सैन्य तैनाती भी बढ़ी। हालांकि राजनीतिक और सीमा संबंधी तनाव के बावजूद दोनों देशों के बीच व्यापार जारी रहा। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 2020-21 में चीन से भारत का आयात करीब 65 अरब डॉलर था, जो 2025-26 में बढ़कर 132 अरब डॉलर से अधिक हो गया। यानी इस अवधि में चीन से भारत का आयात लगभग दोगुना हुआ।
शी जिनपिंग के साथ कै शी भी भारत आए
शी जिनपिंग के साथ चीन के वरिष्ठ नेता कै शी भी भारत पहुंचे हैं। वे चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की पॉलिटब्यूरो स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य हैं और पार्टी के जनरल ऑफिस के प्रमुख के तौर पर शी जिनपिंग के बेहद करीबी माने जाते हैं। कै शी की जिम्मेदारियों में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के कामकाज से जुड़े महत्वपूर्ण प्रशासनिक और समन्वय संबंधी कार्य शामिल हैं। इसी प्रभावशाली भूमिका के कारण उन्हें अक्सर शी जिनपिंग का ‘डी फैक्टो चीफ ऑफ स्टाफ’ कहा जाता है।
18 फीट लंबी होंगकी N701 में रवाना हुए जिनपिंग
दिल्ली पहुंचने के बाद शी जिनपिंग होंगकी N701 स्टेट लिमोजिन से पालम एयरपोर्ट से रवाना हुए। यह विशेष वाहन चीनी राष्ट्रपति के लिए तैयार किया गया है और इसकी लंबाई करीब 18 फीट यानी लगभग 5.5 मीटर बताई गई है।
2019 में मामल्लपुरम में हुई थी मोदी-शी मुलाकात
शी जिनपिंग की पिछली भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका तमिलनाडु के मामल्लपुरम (महाबलीपुरम) में स्वागत किया था। दोनों नेताओं ने पंच रथ और शोर मंदिर जैसे ऐतिहासिक स्थलों का दौरा किया और अनौपचारिक बातचीत की थी।उस मुलाकात में दोनों देशों के बीच व्यापार असंतुलन कम करने, आपसी विश्वास बढ़ाने और सीमा पर शांति बनाए रखने जैसे मुद्दों पर आगे काम करने पर जोर दिया गया था। अब सात साल बाद जिनपिंग के भारत पहुंचने से एक बार फिर भारत-चीन संबंध, सीमा विवाद, व्यापार और रणनीतिक सहयोग चर्चा के केंद्र में हैं। BRICS मंच के बीच होने वाली उच्चस्तरीय बातचीत से दोनों देशों के रिश्तों की दिशा को लेकर नई उम्मीदें भी जुड़ी हैं।
