Anmol Sandesh News Desk, राजनांदगांव, छत्तीसगढ़
CG News: राजनांदगांव जिले के दाढ़ी विद्युत उप संभाग में बिजली कंपनी के मैदानी अमले की कमी का असर ग्रामीण बिजली व्यवस्था पर पड़ने की बात सामने आई है। उप संभाग के अंतर्गत 133 गांव आते हैं, जहां हजारों घरेलू, गैर-घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं की बिजली आपूर्ति, फॉल्ट सुधार और लाइन रखरखाव का जिम्मा सीमित कर्मचारियों पर है। पूरे उप संभाग में वर्तमान में केवल एक सहायक यंत्री (AE) और एक कनिष्ठ यंत्री (JE) पदस्थ बताए जा रहे हैं। अकेले JE के जिम्मे करीब 5800 उपभोक्ताओं की व्यवस्था और तकनीकी समन्वय से जुड़े काम हैं। वहीं तीनों वितरण केंद्रों में भी स्वीकृत आवश्यकता की तुलना में मैदानी कर्मचारियों की कमी बताई जा रही है। बारिश, आंधी-तूफान और कृषि सीजन के दौरान बिजली से जुड़ी शिकायतों की संख्या बढ़ने पर सीमित अमले के सामने एक साथ कई क्षेत्रों में पहुंचने की चुनौती खड़ी हो सकती है।
दाढ़ी वितरण केंद्र: 52 गांव, सिर्फ 4 लाइनमैन
दाढ़ी वितरण केंद्र के अंतर्गत पांच मुख्यालय और 52 गांव आते हैं। यहां करीब 20 हजार कृषि, घरेलू और गैर-घरेलू उपभोक्ता बताए गए हैं। इतने बड़े क्षेत्र की बिजली व्यवस्था के लिए सिर्फ चार मैदानी कर्मचारी बताए गए हैं। इनमें एक नियमित और तीन संविदा लाइनमैन शामिल हैं। 11 केवी लाइन में फॉल्ट, बिजली के खंभे या तार टूटने और ट्रांसफार्मर खराब होने जैसी स्थिति में इन्हीं कर्मचारियों को मौके पर पहुंचकर सुधार कार्य करना होता है। यदि एक साथ कई गांवों से शिकायतें आती हैं तो सीमित कर्मचारियों के कारण सभी स्थानों पर तत्काल पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
कारेसरा: 47 गांवों का जिम्मा सिर्फ 2 लाइनमैन पर
कारेसरा वितरण केंद्र के अंतर्गत तीन मुख्यालय और 47 गांव आते हैं। यहां करीब 2400 उपभोक्ताओं की बिजली व्यवस्था के लिए सिर्फ दो नियमित लाइनमैन पदस्थ बताए गए हैं। इन कर्मचारियों पर लाइन रखरखाव, बिजली फॉल्ट सुधार और उपभोक्ताओं की शिकायतों के निराकरण की जिम्मेदारी है। ग्रामीण क्षेत्रों के बीच दूरी अधिक होने के कारण किसी एक स्थान पर सुधार कार्य के दौरान दूसरे गांव से आई शिकायत तक पहुंचने में समय लग सकता है। कृषि सीजन में सिंचाई के लिए बिजली की मांग बढ़ने पर मैदानी अमले पर काम का दबाव और बढ़ सकता है।
प्रतापपुर: 34 गांव, 6 कर्मचारियों के भरोसे व्यवस्था
प्रतापपुर वितरण केंद्र में तीन नियमित और तीन संविदा कर्मचारी, यानी कुल छह कर्मचारी पदस्थ बताए गए हैं। इसके अंतर्गत चार मुख्यालय और 34 गांव आते हैं। इस क्षेत्र में करीब 1400 उपभोक्ताओं की बिजली व्यवस्था संचालित होती है। कर्मचारियों की संख्या अन्य केंद्रों की तुलना में अधिक होने के बावजूद ग्रामीण क्षेत्र के विस्तार और तकनीकी शिकायतों के कारण मैदानी अमले पर काम का दबाव बना रहता है।
एक JE पर 5800 उपभोक्ताओं की जिम्मेदारी
दाढ़ी विद्युत उप संभाग कार्यालय में करीब 5800 उपभोक्ताओं के लिए एक ही कनिष्ठ यंत्री पदस्थ होने की जानकारी सामने आई है। JE को बिजली वितरण व्यवस्था की निगरानी के साथ फील्ड में आने वाली तकनीकी समस्याओं का समन्वय और कर्मचारियों से संबंधित कार्य भी देखना पड़ता है। ऐसे में बारिश, आंधी-तूफान या कृषि सीजन के दौरान यदि अलग-अलग इलाकों से एक साथ बिजली संबंधी शिकायतें आती हैं, तो उपलब्ध सीमित अमले के सामने प्राथमिकता तय करने और समय पर सुधार कार्य पहुंचाने की चुनौती बढ़ सकती है।
133 गांवों की व्यवस्था पर स्टाफ का दबाव
दाढ़ी विद्युत उप संभाग के तीनों वितरण केंद्रों में कुल 133 गांव शामिल हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति और तकनीकी व्यवस्था काफी हद तक सीमित मैदानी अमले पर निर्भर है। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था सुचारू रखने के लिए पर्याप्त लाइनमैन, तकनीकी कर्मचारी और अधिकारियों की उपलब्धता महत्वपूर्ण है। ऐसे में स्टाफ की कमी का मुद्दा सामने आने के बाद अतिरिक्त अमले की जरूरत और व्यवस्था को मजबूत करने पर ध्यान दिए जाने की आवश्यकता बताई जा रही है।
