Saturday, September 26, 2026
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CEC ज्ञानेश कुमार को हटाना आसान नहीं, जानिए क्या है पूरा संवैधानिक खेल और कैसे होती है कार्रवाई

Anmol Sandesh News Desk, नई दिल्ली

CEC Gyanesh Kumar: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की विपक्षी मांग के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया क्या है? हाल के दिनों में विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग के कामकाज और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़े मुद्दों को लेकर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई और उन्हें पद से हटाने की मांग की है। 24 सितंबर 2026 को कांग्रेस सूत्रों ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि संयुक्त विपक्ष दोनों सदनों में हटाने के प्रस्ताव की तैयारी कर रहा है। हालांकि, किसी CEC को केवल राजनीतिक मांग या केंद्र सरकार के आदेश से पद से नहीं हटाया जा सकता। संविधान ने इस पद को विशेष सुरक्षा दी है।

संविधान में CEC को मिली है विशेष सुरक्षा

भारत के संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को उसी तरीके और उन्हीं आधारों पर पद से हटाया जा सकता है, जिस तरीके और आधार पर सुप्रीम कोर्ट के किसी जज को हटाया जाता है। यानी CEC को हटाने के लिए सामान्य सरकारी तबादले या बर्खास्तगी जैसी प्रक्रिया लागू नहीं होती। इसके अलावा, 2023 के Chief Election Commissioner and Other Election Commissioners Act की धारा 11 भी स्पष्ट करती है कि CEC को सुप्रीम कोर्ट के जज के समान तरीके और आधार पर ही हटाया जा सकता है।

आखिर CEC को हटाने की प्रक्रिया कैसे शुरू होती है?

CEC को हटाने की प्रक्रिया संसद से जुड़ी है। इसके लिए लोकसभा या राज्यसभा में हटाने का प्रस्ताव लाया जा सकता है। लेकिन प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए निर्धारित संसदीय प्रक्रिया और आवश्यक समर्थन पूरा करना होता है। सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाने की प्रक्रिया के समान, प्रस्ताव को स्वीकार किए जाने के बाद आरोपों की जांच के लिए निर्धारित संसदीय जांच प्रक्रिया लागू होती है। जांच में यदि सिद्ध दुर्व्यवहार या अक्षमता पाई जाती है, तभी मामला अगले चरण में आगे बढ़ता है।

संसद में कितने बहुमत की जरूरत?

सिर्फ साधारण बहुमत से CEC को हटाया नहीं जा सकता।

दोनों सदनों में प्रस्ताव को विशेष बहुमत से पारित करना होता है। इसमें—

  • सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत, और
  • उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत

की आवश्यकता होती है।

इसके बाद दोनों सदनों द्वारा प्रस्ताव पारित होने पर इसे राष्ट्रपति के समक्ष भेजा जाता है। राष्ट्रपति के आदेश के बाद ही CEC को पद से हटाया जा सकता है।

क्या केंद्र सरकार सीधे CEC को हटा सकती है?

नहीं।

मुख्य चुनाव आयुक्त को केंद्र सरकार सीधे आदेश जारी करके पद से नहीं हटा सकती। संविधान में CEC के लिए सुप्रीम कोर्ट के जज जैसी हटाने की सुरक्षा इसलिए निर्धारित की गई है ताकि पद की संवैधानिक स्वतंत्रता बनी रहे। यही वजह है कि किसी CEC के खिलाफ राजनीतिक आरोप लगने या विपक्ष द्वारा इस्तीफे की मांग किए जाने भर से वह पद से स्वतः नहीं हटता।

CEC और दूसरे चुनाव आयुक्तों में क्या अंतर है?

यहां एक महत्वपूर्ण अंतर है।

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के जज के समान प्रक्रिया लागू होती है। वहीं अन्य चुनाव आयुक्तों (Election Commissioners) को राष्ट्रपति, मुख्य चुनाव आयुक्त की सिफारिश के आधार पर पद से हटा सकते हैं। यह व्यवस्था 2023 के कानून की धारा 11 में दी गई है। यानी CEC और अन्य चुनाव आयुक्तों की हटाने की संवैधानिक सुरक्षा एक जैसी नहीं है।

ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग क्यों उठी?

वर्तमान विवाद की शुरुआत चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों से जुड़ी एक मीडिया रिपोर्ट के बाद हुई। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों को लेकर कम से कम 14 बार आपत्तियां दर्ज की थीं। विपक्षी दलों ने इस रिपोर्ट को आधार बनाकर CEC के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज की। विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनाव आयोग के कामकाज में पारदर्शिता और आंतरिक प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग की ओर से कहा गया है कि आयोग के भीतर अलग-अलग विचार और लिखित सुझाव आना संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा है और अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

पहले भी आ चुका है हटाने का प्रस्ताव

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हटाने की कोशिश पहली बार नहीं हुई है। अप्रैल 2026 में विपक्षी सांसदों ने राज्यसभा में उनके खिलाफ नया नोटिस दिया था, जिसमें कथित ‘proven misbehaviour’ से जुड़े नौ आरोपों का उल्लेख किया गया था। रिपोर्टों के अनुसार, इससे पहले लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति के समक्ष दिए गए एक-एक नोटिस पर भी निर्णय हो चुका था। अब सितंबर 2026 में विपक्ष एक बार फिर दोनों सदनों में नया प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है।

आसान भाषा में समझें पूरा संवैधानिक खेल

CEC को हटाने का रास्ता:

आरोप/शिकायत → संसद में प्रस्ताव → निर्धारित संसदीय जांच प्रक्रिया → दुर्व्यवहार/अक्षमता सिद्ध होना → दोनों सदनों में विशेष बहुमत → राष्ट्रपति का आदेश → CEC पद से हटेंगे

इस पूरी प्रक्रिया के कारण मुख्य चुनाव आयुक्त को किसी सामान्य सरकारी पदाधिकारी की तरह सीधे आदेश से हटाना संभव नहीं है।

 

Kanchan Sharma
Kanchan Sharma
कंचन शर्मा वर्तमान में दैनिक समाचार पत्र "अनमोल संदेश" में कार्यरत। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया,प्रिंट, न्यूज एजेंसी और डिजिटल पत्रकारिता में उनका लंबा अनुभव है, जिसमें उन्होंने रिपोर्टर और डेस्क पर विभिन्न भूमिकाओं में काम किया है।
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