Saturday, September 26, 2026
Homeअन्य राज्यजमुई पीड़िता की तस्वीर पर बवाल: CM सम्राट चौधरी पर तेजस्वी ने...

जमुई पीड़िता की तस्वीर पर बवाल: CM सम्राट चौधरी पर तेजस्वी ने लगाए POCSO उल्लंघन के आरोप, FIR की मांग

Anmol Sandesh News Desk, पटना

Jamui Case: बिहार के जमुई में नाबालिग लड़की से जुड़ी घटना को लेकर जारी विवाद अब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सोशल मीडिया पोस्ट तक पहुंच गया है। मुख्यमंत्री ने गुरुवार को पीड़िता और उसके परिवार से मुलाकात की थी। इसके बाद उनके आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से मुलाकात की एक तस्वीर पोस्ट की गई, जिसे बाद में हटा दिया गया। तस्वीर को लेकर आरजेडी ने मुख्यमंत्री पर नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर होने का आरोप लगाया है।

तेजस्वी यादव ने कार्रवाई की मांग की

बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री की पोस्ट का स्क्रीनशॉट साझा करते हुए उन पर POCSO कानून के प्रावधानों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। तेजस्वी ने बिहार पुलिस से इस मामले में कार्रवाई की मांग की है। आरजेडी सांसद मीसा भारती ने भी पुलिस से मुख्यमंत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की। तेजस्वी का तर्क है कि नाबालिग पीड़िता की पहचान को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता और तस्वीर या ऐसी कोई जानकारी भी साझा नहीं की जानी चाहिए, जिससे उसकी पहचान सामने आ सके।

मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया पोस्ट पर क्यों हुआ विवाद?

रिपोर्टों के मुताबिक, जमुई की नाबालिग पीड़िता अपने परिवार के साथ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मिलने पहुंची थी। मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री की ओर से बताया गया कि परिवार को जल्द न्याय का भरोसा दिया गया है। मुख्यमंत्री ने आरोपियों के खिलाफ तेज कार्रवाई और स्पीडी ट्रायल के जरिए कड़ी सजा दिलाने की बात भी कही। इसके बाद मुलाकात की तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की गई, जिसे विवाद बढ़ने के बाद हटा दिया गया। कुछ रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि तस्वीर में पीड़िता का चेहरा ब्लर किया गया था, लेकिन विपक्ष का आरोप है कि तस्वीर और उससे जुड़ी जानकारी से उसकी पहचान उजागर हो सकती थी।

POCSO में क्या है पहचान से जुड़ा प्रावधान?

POCSO Act, 2012 की धारा 23 मीडिया द्वारा बच्चे की पहचान उजागर करने से संबंधित है। कानून में नाम, पता, फोटो या ऐसी अन्य जानकारी प्रकाशित करने पर रोक है, जिससे बच्चे की पहचान हो सके। India Code में धारा 23 को “Procedure for media” के रूप में दर्ज किया गया है। धारा 23 के उल्लंघन पर एक साल तक की जेल या जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। इसलिए पीड़िता की पहचान उजागर करने के आरोपों की कानूनी जांच महत्वपूर्ण होगी।

बिहार पुलिस पहले ही कर चुकी है कार्रवाई

जमुई मामले से जुड़े वीडियो में नाबालिग की पहचान सामने आने को लेकर बिहार पुलिस ने सोशल मीडिया पर सामग्री प्रसारित करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही थी। रिपोर्टों के अनुसार कई सोशल मीडिया अकाउंट्स को नोटिस भी भेजे गए हैं और मामले की जांच की जा रही है।

पोस्ट हटने के बाद बढ़ा राजनीतिक विवाद

मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया अकाउंट से तस्वीर हटाए जाने के बाद भी उसका स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर सामने आ गया। इसके बाद तेजस्वी यादव और मीसा भारती ने सरकार पर निशाना साधते हुए कार्रवाई की मांग की। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में मुख्यमंत्री के खिलाफ POCSO उल्लंघन को लेकर किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा दोष सिद्ध होने की जानकारी नहीं है। मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के साथ-साथ संभावित कानूनी जांच का विषय बन गया है।

बड़ी बात एक नजर में

  • जमुई की नाबालिग पीड़िता से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मुलाकात की।
  • मुलाकात की तस्वीर मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया हैंडल से पोस्ट हुई।
  • पोस्ट बाद में हटा दी गई।
  • तेजस्वी यादव ने POCSO प्रावधानों के उल्लंघन का आरोप लगाया।
  • तेजस्वी ने कार्रवाई की मांग की।
  • मीसा भारती ने भी मुख्यमंत्री के खिलाफ FIR की मांग की।
  • POCSO की धारा 23 बच्चे की पहचान उजागर करने से जुड़ी है।
  • आरोपों पर कानूनी कार्रवाई का निर्णय संबंधित जांच/कानूनी प्रक्रिया से होगा।

 

Kanchan Sharma
Kanchan Sharma
कंचन शर्मा वर्तमान में दैनिक समाचार पत्र "अनमोल संदेश" में कार्यरत। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया,प्रिंट, न्यूज एजेंसी और डिजिटल पत्रकारिता में उनका लंबा अनुभव है, जिसमें उन्होंने रिपोर्टर और डेस्क पर विभिन्न भूमिकाओं में काम किया है।
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular