Anmol Sandesh News Desk, लेह/लद्दाख
Sonam Wangchuk: लद्दाख में 24 सितंबर 2025 को हुई हिंसा की पहली बरसी पर एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक विवाद तेज हो गया है। क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने लेह में आयोजित कार्यक्रम के दौरान केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने पिछले साल हुई हिंसा में चार लोगों की मौत की जिम्मेदारी तय करने और न्यायिक जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की। वांगचुक ने अपनी सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताते हुए कहा कि उन्हें चेतावनी मिली है कि उन्हें किसी “एनकाउंटर” में मारा जा सकता है। हालांकि, यह वांगचुक की आशंका और बयान है; उनकी इस आशंका की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।
24 सितंबर 2025 को क्या हुआ था?
24 सितंबर 2025 को लेह में लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक सुरक्षा की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के दौरान स्थिति बिगड़ गई थी। पुलिस कार्रवाई के दौरान चार लोगों की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे। घटना के बाद केंद्र सरकार ने पूरे मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए। लद्दाख प्रशासन के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, गृह मंत्रालय ने 17 अक्टूबर 2025 को पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस बी.एस. चौहान की अध्यक्षता में न्यायिक जांच गठित की थी। जांच का दायरा हिंसा की परिस्थितियों, पुलिस कार्रवाई और चार लोगों की मौत से जुड़े घटनाक्रम की जांच करना था।
वांगचुक ने जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की
हिंसा की पहली बरसी पर वांगचुक ने कहा कि न्यायिक जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि 24 सितंबर 2025 को हुई हिंसा के लिए जिम्मेदारी किसकी थी। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई तो एक स्वतंत्र ‘पीपुल्स ट्रिब्यूनल’ गठित कर घटना और पुलिस कार्रवाई की जांच करने की कोशिश की जाएगी।
पुलिस फायरिंग को लेकर वांगचुक के गंभीर आरोप
वांगचुक ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया गया और फायरिंग में ऑटोमैटिक हथियारों का इस्तेमाल हुआ। उन्होंने दावा किया कि गोलीबारी में मारे गए लोगों को शरीर के ऊपरी हिस्से में गोलियां लगी थीं। ये दावे फिलहाल वांगचुक के आरोप हैं। घटना की परिस्थितियों और पुलिस कार्रवाई की जांच के लिए ही न्यायिक आयोग गठित किया गया था। इसलिए अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट के आधार पर ही स्पष्ट होगा।
‘मुझे एनकाउंटर में मारा जा सकता है’
कार्यक्रम के दौरान वांगचुक ने अपनी सुरक्षा को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें चेतावनी दी गई है कि सरकार के खिलाफ बोलने के कारण उन्हें किसी एनकाउंटर में मारा जा सकता है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा होता है तो देश को इस मुद्दे पर जागना चाहिए। वांगचुक ने इससे पहले अपनी हिरासत का भी जिक्र किया और कहा कि अब उन्हें अपनी जान को लेकर खतरा महसूस हो रहा है।
अमित शाह के इस्तीफे की मांग
वांगचुक ने लेह हिंसा के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को राजनीतिक रूप से जिम्मेदार ठहराते हुए उनके इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा कि चार लोगों की मौत की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। यह वांगचुक की राजनीतिक मांग और आरोप हैं। उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेजों में न्यायिक जांच का उद्देश्य घटना की परिस्थितियों, पुलिस कार्रवाई और चार मौतों की जांच करना बताया गया है।
लद्दाख की पुरानी मांगों का भी उठाया मुद्दा
वांगचुक ने एक बार फिर लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक सुरक्षा देने की मांग दोहराई। उनका कहना है कि लद्दाख के लोगों की इन मांगों को लंबे समय से उठाया जा रहा है और केंद्र से बातचीत के बावजूद अभी तक कोई अंतिम समाधान नहीं निकला है। इन्हीं मांगों से जुड़े आंदोलन के दौरान सितंबर 2025 में लेह में हिंसा हुई थी।
बरसी पर लद्दाख में बंद और श्रद्धांजलि कार्यक्रम
हिंसा की पहली बरसी पर लेह, कारगिल और लद्दाख के अन्य हिस्सों में कई दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के बंद रहने की रिपोर्ट सामने आई। मृतकों को श्रद्धांजलि देने के लिए कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। वांगचुक ने दावा किया कि भारी सुरक्षा व्यवस्था और बैरिकेडिंग की वजह से कार्यक्रमों में लोगों की भागीदारी प्रभावित हुई। दूसरी ओर, लद्दाख पुलिस ने इन आरोपों को गलत और भ्रामक बताया। पुलिस के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था सामान्य प्रोटोकॉल का हिस्सा थी और किसी व्यक्ति को श्रद्धांजलि कार्यक्रम में जाने से नहीं रोका गया।
न्यायिक जांच में अब तक क्या हुआ?
लद्दाख प्रशासन के मुताबिक जस्टिस बी.एस. चौहान की अध्यक्षता वाले आयोग ने अक्टूबर 2025 में कार्यवाही शुरू की थी। दिसंबर 2025 में आयोग ने सीआरपीएफ, मजिस्ट्रेट और लद्दाख पुलिस से जुड़े अधिकारियों के बयान भी दर्ज किए थे। वहीं, वांगचुक अब जांच के निष्कर्ष सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं। इसलिए आने वाले समय में न्यायिक जांच की रिपोर्ट इस पूरे विवाद में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
