Anmol Sandesh News Desk, भोपाल
मध्य प्रदेश में करीब 21 साल बाद सार्वजनिक बस सेवा की दोबारा शुरुआत के मौके पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बसों की गुणवत्ता और सार्वजनिक परिवहन को लेकर अधिकारियों एवं ऑपरेटरों को सख्त संदेश दिया। भोपाल के बीएचईएल दशहरा मैदान में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ उन्होंने मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा का शुभारंभ किया। पहले चरण में सात शहरों के लिए 351 इंटरसिटी और इंट्रासिटी बसें शुरू की गई हैं। कार्यक्रम के दौरान गडकरी ने सार्वजनिक परिवहन को बेहतर बनाने और प्रदूषण कम करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बस सेवा में अभी और सुधार की जरूरत है। इसी दौरान उन्होंने संबंधित लोगों को संबोधित करते हुए सख्त लहजे में कहा कि यदि बसों में सुधार नहीं किया गया तो वे कॉन्ट्रैक्टरों के साथ अपनाए जाने वाले सख्त रवैये की तरह कार्रवाई करेंगे।
‘क्लीन ट्रांसपोर्ट’ पर गडकरी का जोर
गडकरी ने सार्वजनिक परिवहन के भविष्य को लेकर क्लीन ट्रांसपोर्ट को प्राथमिकता देने की बात कही। उनके अनुसार परिवहन क्षेत्र को ज्यादा स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की जरूरत है। उन्होंने प्रदूषण के मुद्दे पर अपनी जिम्मेदारी का भी उल्लेख किया और कहा कि परिवहन व्यवस्था को अधिक स्वच्छ बनाना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। गडकरी ने इलेक्ट्रिक और अन्य स्वच्छ ईंधन वाली बसों के इस्तेमाल को बढ़ाने पर जोर दिया। नई बस सेवा में इलेक्ट्रिक और सीएनजी बसों के संचालन के लिए ड्राइवरों को आधुनिक तकनीक, संचालन और सुरक्षा मानकों का प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की गई है।
‘बसों में सुधार करिए… नहीं तो रगड़ूंगा’
कार्यक्रम में बसों की गुणवत्ता को लेकर गडकरी का सख्त अंदाज भी देखने को मिला। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से कंपनी संचालकों को बसों में जरूरी सुधार करने के निर्देश देने की बात कही। गडकरी ने कहा कि यात्रियों को बेहतर और सुरक्षित सुविधा मिलनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि यदि अपेक्षित सुधार नहीं किए गए तो वे संबंधित ऑपरेटरों के खिलाफ उसी तरह सख्ती करेंगे, जैसे वे काम में लापरवाही करने वाले कॉन्ट्रैक्टरों के मामले में करते हैं।
351 बसों से हुई शुरुआत
‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा’ के पहले चरण में 351 बसें सात शहरों में संचालित की जा रही हैं। इनमें 120 इंटरसिटी और 231 इंट्रासिटी बसें शामिल हैं।
शहरवार बसों का वितरण इस प्रकार है—
- इंदौर – 145 बसें
- भोपाल – 106 बसें
- जबलपुर – 67 बसें
- रीवा – 18 बसें
- देवास – 10 बसें
- कटनी – 3 बसें
- भिंड – 2 बसें
इंदौर को सबसे ज्यादा 145 बसें मिली हैं, जिनमें 50 इंटरसिटी और 95 इंट्रासिटी बसें हैं। भोपाल में 23 इंटरसिटी और 83 इंट्रासिटी समेत 106 बसें संचालित होंगी।
2031 तक 15 हजार बसों का लक्ष्य
सरकार ने इस सेवा को चरणबद्ध तरीके से पूरे प्रदेश में विस्तार देने की योजना बनाई है। पहले वर्ष करीब 1,500 बसें चलाने और वर्ष 2031 तक लगभग 15 हजार बसों का नेटवर्क तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। सेवा का संचालन निजी भागीदारी यानी पीपीपी मॉडल के तहत किया जाएगा। सरकार की योजना ग्रामीण क्षेत्रों को भी सार्वजनिक परिवहन से जोड़ने की है, ताकि गांवों से कस्बों और शहरों तक आने-जाने में यात्रियों को बेहतर विकल्प मिल सकें।
बसों में सीसीटीवी, पैनिक बटन और जीपीएस
नई बस सेवा को तकनीक से जोड़ने पर भी जोर दिया गया है। बसों में सीसीटीवी कैमरे, पैनिक बटन और वाहन लोकेशन ट्रैकिंग जैसी सुविधाएं रखी गई हैं। संचालन और समयबद्धता की निगरानी इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम के जरिए किए जाने की योजना है। ड्राइवरों को इलेक्ट्रिक और सीएनजी बसों के संचालन तथा सुरक्षा मानकों का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
परिवहन मंत्री बोले- निजी बस ऑपरेटरों के हित प्रभावित नहीं होंगे
मध्य प्रदेश के परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने कहा कि 21 साल पहले बंद हुई सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को नए स्वरूप में शुरू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की योजना निजी बस संचालकों के कारोबार से टकराव पैदा करने की नहीं है। उन्होंने सार्वजनिक बस सेवा को प्रदेश के परिवहन क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया और कहा कि इसका उद्देश्य यात्रियों को बेहतर सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराना है।
कनेक्टिविटी बढ़ाने पर जोर
लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि नई बस सेवा से प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों के बीच कनेक्टिविटी मजबूत करने में मदद मिलेगी। उन्होंने सार्वजनिक परिवहन को यात्रियों के लिए सुविधाजनक बनाने और नई तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया। इस नई व्यवस्था के जरिए सरकार का फोकस सिर्फ बसों की संख्या बढ़ाने पर नहीं, बल्कि सुरक्षित, आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क तैयार करने पर है।
21 साल बाद वापसी, अब गुणवत्ता की परीक्षा
मध्य प्रदेश में 21 साल बाद सार्वजनिक बस सेवा की वापसी के साथ सरकार ने बड़ा परिवहन नेटवर्क खड़ा करने का लक्ष्य रखा है। फिलहाल 351 बसों से शुरुआत हुई है और आने वाले वर्षों में इसे हजारों बसों तक विस्तार देने की योजना है। ऐसे में गडकरी की गुणवत्ता और प्रदूषण को लेकर दी गई सख्त हिदायत इस नई व्यवस्था के संचालन पर भी नजर बनाए रखने का संकेत देती है।
