Anmol Sandesh News Desk, भोपाल
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में निर्माणाधीन ऑरेंज लाइन मेट्रो के अंडरग्राउंड रूट को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। सोमवार रात 5 अक्टूबर को टॉकीज चौराहे के पास स्थित शाही कब्रिस्तान के आसपास मेट्रो निर्माण से जुड़ी टीम के पहुंचने के बाद कांग्रेस विधायक आतिफ अकील ने मौके पर पहुंचकर आपत्ति जताई। बताया जा रहा है कि मेट्रो टीम यहां बैरिकेडिंग और निर्माण संबंधी काम की तैयारी के लिए पहुंची थी। इस दौरान विधायक और मौके पर मौजूद मेट्रो अधिकारियों एवं पुलिसकर्मियों के बीच तीखी बहस की स्थिति बन गई। विधायक ने निर्माण कार्य पर सवाल उठाते हुए संबंधित अधिकारियों से पहले अनुमति लेने की बात कही।
‘बाहर निकलो, वरना बदतमीजी करने लगूंगा’
मौके पर विधायक आतिफ अकील ने मेट्रो अधिकारियों से नाराजगी जताते हुए कहा कि शाही कब्रिस्तान की जमीन पर काम करने से पहले संबंधित अनुमति ली जाए। विधायक ने अधिकारियों से सवाल किया कि निर्माण सामग्री और मशीनें यहां किस अनुमति के आधार पर लाई गई हैं। इसी दौरान उन्होंने कथित तौर पर अधिकारियों से तीखे लहजे में कहा कि “बाहर निकलो, वरना बदतमीजी करने लगूंगा।” विधायक का आरोप है कि पुलिस की मौजूदगी में शाही कब्रिस्तान की जमीन पर काम शुरू करने की कोशिश की जा रही थी। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि पहले शाही औकाफ से अनुमति ली जाए और उसके बाद ही निर्माण कार्य आगे बढ़ाया जाए।
कब्रिस्तान के नीचे से मेट्रो रूट को लेकर पहले से आपत्ति
विवाद की मुख्य वजह भोपाल मेट्रो के ऑरेंज लाइन के दूसरे चरण का प्रस्तावित अंडरग्राउंड सेक्शन है। इस रूट को लेकर शाही कब्रिस्तान के नीचे से मेट्रो ले जाने पर आपत्तियां सामने आती रही हैं। विधायक आतिफ अकील ने भी इसी मुद्दे को उठाते हुए कहा कि कब्रिस्तान को प्रभावित किए बिना मेट्रो का काम किया जाना चाहिए। उन्होंने निर्माण एजेंसियों से यह स्पष्ट करने की मांग की कि काम शुरू करने से पहले संबंधित पक्षों से आवश्यक अनुमति और सहमति ली गई है या नहीं। हालांकि, इस मामले में अनुमतियों और संबंधित जमीन के अधिकार को लेकर अंतिम स्थिति संबंधित विभागों और आधिकारिक दस्तावेजों से स्पष्ट होना बाकी है।
सुभाषनगर से करोंद तक बन रही ऑरेंज लाइन
भोपाल मेट्रो के ऑरेंज लाइन कॉरिडोर का पहला हिस्सा एम्स से सुभाषनगर के बीच तैयार होकर मेट्रो संचालन के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। इसे भोपाल मेट्रो के प्रायोरिटी कॉरिडोर के तौर पर विकसित किया गया है। इसके दूसरे चरण में सुभाषनगर से करोंद तक मेट्रो का निर्माण किया जा रहा है। प्रस्तावित रूट की कुल लंबाई करीब 9.74 किलोमीटर बताई गई है। इसमें लगभग 5.38 किलोमीटर हिस्सा एलिवेटेड होगा, जबकि करीब 3.39 किलोमीटर हिस्सा अंडरग्राउंड बनाया जाना है।
अंडरग्राउंड सेक्शन में दो स्टेशन
अंडरग्राउंड हिस्से में प्रमुख रूप से भोपाल रेलवे स्टेशन और नादरा बस स्टैंड स्टेशन शामिल हैं। इसी अंडरग्राउंड रूट के निर्माण को लेकर अब विवाद सामने आया है। प्रस्तावित कॉरिडोर में पुल बोगदा, ऐशबाग, सिंधी कॉलोनी, डीआईजी बंगला, कृषि उपज मंडी और करोंद चौराहा जैसे क्षेत्र भी मेट्रो नेटवर्क से जुड़ेंगे।
करीब 1540 करोड़ रुपये की लागत
सुभाषनगर से करोंद के बीच बनने वाले इस हिस्से की अनुमानित लागत करीब 1540 करोड़ रुपये बताई गई है। इस कॉरिडोर के पूरा होने के बाद भोपाल के पुराने शहर और घनी आबादी वाले इलाकों को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ने में मदद मिलने की उम्मीद है। अंडरग्राउंड सेक्शन को इस परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है, क्योंकि इससे शहर के व्यस्त और घने इलाकों में सतह पर बड़े पैमाने पर निर्माण की जरूरत कम होगी।
विवाद के बीच बड़ा सवाल- क्या अनुमति ली गई?
सोमवार देर रात हुए घटनाक्रम के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि शाही कब्रिस्तान क्षेत्र में निर्माण कार्य या बैरिकेडिंग के लिए संबंधित पक्षों से आवश्यक अनुमति ली गई थी या नहीं। विधायक आतिफ अकील ने स्पष्ट रूप से अनुमति का मुद्दा उठाया है। अब इस पूरे मामले में मेट्रो प्रशासन, संबंधित विभाग और शाही औकाफ की ओर से स्थिति स्पष्ट किए जाने के बाद ही विवाद की वास्तविक स्थिति सामने आएगी।
मेट्रो विस्तार के बीच बढ़ा राजनीतिक विवाद
भोपाल में मेट्रो के विस्तार का काम तेजी से चल रहा है। एक ओर सरकार और मेट्रो प्रशासन शहर के अलग-अलग हिस्सों को जोड़ने के लिए निर्माण कार्य आगे बढ़ा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ स्थानों पर जमीन, निर्माण और रूट को लेकर स्थानीय स्तर पर आपत्तियां सामने आ रही हैं। शाही कब्रिस्तान के पास सामने आया यह विवाद भी अब इसी कड़ी में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में संबंधित विभागों की ओर से इस मामले में क्या स्पष्टीकरण दिया जाता है और अंडरग्राउंड रूट पर काम किस तरह आगे बढ़ता है, इस पर नजर रहेगी।
