Anmol Sandesh News Desk, रायपुर
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना VB-G RAM G की निगरानी और प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक नई व्यवस्था तैयार करने जा रही है। राज्य सरकार अब राज्य ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद के गठन की तैयारी में है। इसके लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने नियम-2026 का प्रारूप तैयार कर लिया है। सरकार की ओर से इस संबंध में राजपत्र में अधिसूचना जारी कर दी गई है और आम लोगों, संबंधित पक्षों तथा हितधारकों से 30 दिनों के भीतर आपत्ति और सुझाव मांगे गए हैं। सुझाव और आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद परिषद के गठन और नियमों को अंतिम रूप दिया जा सकता है।
मुख्यमंत्री होंगे परिषद के अध्यक्ष
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्य ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद का गठन किया जाएगा। वहीं पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से जुड़े मंत्री को परिषद का उपाध्यक्ष बनाया जाएगा। परिषद में ग्रामीण रोजगार योजना से सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े कई महत्वपूर्ण विभागों के मंत्रियों को भी शामिल किया जाएगा। इनमें लोक निर्माण, राजस्व, वन, वित्त और कृषि जैसे विभाग प्रमुख हैं। इससे ग्रामीण रोजगार से जुड़े कार्यों में अलग-अलग विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने और योजनाओं के क्रियान्वयन को गति देने की कोशिश की जाएगी।
योजना के कामों की होगी समीक्षा
प्रस्तावित परिषद की सबसे अहम जिम्मेदारी VB-G RAM G के तहत चल रहे कार्यों की समीक्षा और निगरानी करना होगी। परिषद यह देखेगी कि जिलों में योजना का क्रियान्वयन तय नियमों और मानकों के अनुसार हो रहा है या नहीं। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने से जुड़े कार्यों की प्रगति की भी समीक्षा की जाएगी।
मजदूरों के भुगतान पर भी रहेगी नजर
परिषद के सामने एक महत्वपूर्ण मुद्दा मजदूरों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करना भी होगा। योजना के तहत काम करने वाले श्रमिकों को भुगतान में किसी तरह की देरी या तकनीकी समस्या तो नहीं आ रही, इसकी समीक्षा व्यवस्था के जरिए की जाएगी। इसके अलावा काम की गुणवत्ता और योजनाओं के वास्तविक लाभ की भी निगरानी की जाएगी।
कार्यों की गुणवत्ता की होगी मॉनिटरिंग
ग्रामीण क्षेत्रों में योजना के तहत कराए जा रहे कार्यों की गुणवत्ता पर भी परिषद नजर रखेगी। सड़क, जल संरक्षण, तालाब, ग्रामीण अधोसंरचना या अन्य स्वीकृत कार्यों में तय मानकों का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी समीक्षा की जा सकेगी। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि योजना के लिए उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी इस्तेमाल हो और ग्रामीण क्षेत्रों को उसका वास्तविक लाभ मिले।
केंद्र और राज्य के बीच समन्वय में अहम भूमिका
प्रस्तावित परिषद की एक अन्य महत्वपूर्ण भूमिका केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना होगी। ग्रामीण रोजगार से जुड़े कार्यक्रमों में केंद्र और राज्य सरकार के बीच नीतिगत समन्वय, योजनाओं की प्रगति और बजट से जुड़े विषय महत्वपूर्ण होते हैं। परिषद इन मामलों की समीक्षा और समन्वय में भूमिका निभाएगी। इसके अलावा योजना के लिए बजट आवंटन और वित्तीय जरूरतों से जुड़े मुद्दों पर भी परिषद महत्वपूर्ण निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा होगी।
मुख्य सचिव और पंचायत विभाग के सचिव भी होंगे सदस्य
परिषद में सिर्फ राजनीतिक प्रतिनिधियों को ही शामिल नहीं किया जाएगा, बल्कि प्रशासनिक स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार मुख्य सचिव और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव परिषद में शामिल होंगे। इसके अलावा राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष और VB-G RAM G के आयुक्त को भी परिषद में सदस्य के रूप में शामिल किया जाएगा। इससे नीति निर्माण के साथ-साथ योजना के जमीनी क्रियान्वयन और प्रशासनिक निगरानी के बीच बेहतर तालमेल बनाने की कोशिश होगी।
30 दिन में मांगे गए आपत्ति और सुझाव
राज्य सरकार ने नियम-2026 के प्रारूप को लेकर आम लोगों और संबंधित पक्षों से 30 दिनों के भीतर आपत्ति और सुझाव मांगे हैं। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्राप्त सुझावों और आपत्तियों की समीक्षा की जाएगी। इसके आधार पर नियमों में आवश्यक बदलाव किए जा सकते हैं और आगे परिषद के गठन की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा सकता है।
क्या बदलेगा ग्रामीण रोजगार योजना की निगरानी में?
राज्य ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद बनने के बाद योजना की निगरानी के लिए एक उच्चस्तरीय संस्थागत व्यवस्था तैयार हो जाएगी। परिषद के जरिए योजना की समीक्षा, जिलों में क्रियान्वयन, श्रमिक भुगतान, कार्यों की गुणवत्ता, बजट और केंद्र-राज्य समन्वय जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर एक साथ नजर रखने की व्यवस्था होगी। सरकार का फोकस ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों को प्रभावी तरीके से लागू करने और योजना से जुड़े कार्यों की जवाबदेही मजबूत करने पर रहेगा।
