Anmol Sandesh News Desk, नई दिल्ली/वडनगर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सार्वजनिक जीवन के 25 साल पूरे होने के मौके पर बुधवार को आयोजित कार्यक्रम में अपने राजनीतिक सफर, देश के विकास और भविष्य के संकल्प को लेकर विस्तार से बात की। करीब 50 मिनट के संबोधन में प्रधानमंत्री ने ‘We Will Do It’ यानी ‘हम करके दिखाएंगे’ का नारा 19 बार दोहराया। पीएम मोदी ने कहा कि जब तक भारत विकसित राष्ट्र नहीं बन जाता, तब तक वह न थकेंगे और न रुकेंगे। उन्होंने अपने 25 साल के सफर को उपलब्धियों से ज्यादा सीख, संघर्ष और कृतज्ञता का दौर बताया।
‘मैं महत्वाकांक्षा नहीं, मिशन के लिए जीता हूं’
प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका सार्वजनिक जीवन व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा के लिए नहीं, बल्कि एक मिशन के लिए है। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर के संघर्षों का जिक्र करते हुए कहा कि जिन परिस्थितियों ने उन्हें गिराया, उन्हीं से उन्होंने दोबारा खड़े होना सीखा। उन्होंने कहा कि विरोध करने वालों से भी उन्हें लोकतंत्र की ताकत समझने का अवसर मिला। पीएम मोदी के मुताबिक, 25 साल के इस सफर में हर घटना ने उन्हें कुछ न कुछ सिखाया और उन्हें और अधिक विनम्र बनाया। उन्होंने ईश्वर के प्रति आभार जताते हुए कहा कि उनकी सबसे बड़ी इच्छा यही है कि सीखने की इच्छा कभी कम न हो।
25 साल के सफर का आकलन खुद से नहीं, देश से होगा
प्रधानमंत्री ने कहा कि 25 साल पीछे मुड़कर देखने पर उन्हें अपनी उपलब्धियों से ज्यादा कृतज्ञता का भाव महसूस होता है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन के इस पड़ाव का मूल्यांकन इस आधार पर नहीं होना चाहिए कि वह खुद कहां पहुंचे, बल्कि इस आधार पर होना चाहिए कि भारत कहां पहुंचा। पीएम मोदी ने कहा कि भारत में जन्म लेना अपने आप में एक गौरव और अमृत जैसा अनुभव है। उन्होंने कहा कि सत्ता और पद की प्रतिष्ठा कहीं और भी मिल सकती है, लेकिन भारत जैसी पुण्यभूमि मिलना संभव नहीं।
‘जब तक भारत विकसित नहीं होता, न थकूंगा, न रुकूंगा’
अपने भाषण के दौरान पीएम मोदी ने विकसित भारत के लक्ष्य को लेकर अपना संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि देश को विकसित बनाने का लक्ष्य केवल सरकार का नहीं, बल्कि पूरे देश का मिशन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए निरंतर प्रयास जरूरी है और वह इस लक्ष्य तक पहुंचने तक रुकने वाले नहीं हैं। इसी संकल्प को व्यक्त करते हुए उन्होंने अपने भाषण में बार-बार कहा—‘We Will Do It’ यानी ‘हम करके दिखाएंगे।’
CM से PM तक 25 साल का सफर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में सार्वजनिक जीवन की एक महत्वपूर्ण संवैधानिक जिम्मेदारी संभाली थी। इसके बाद वह गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में लंबे समय तक रहे और वर्ष 2014 में देश के प्रधानमंत्री बने। प्रधानमंत्री के रूप में वह लगातार तीसरी बार देश का नेतृत्व कर रहे हैं। इस तरह मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में उनके सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होना भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।
‘हर घटना ने मुझे कुछ सिखाया’
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि 25 वर्षों की यात्रा में अनेक उतार-चढ़ाव आए। उनके मुताबिक, हर घटना ने उन्हें सीखने का अवसर दिया। उन्होंने कहा कि जीवन में आने वाली चुनौतियों ने उन्हें मजबूत बनाया और विरोध ने लोकतंत्र को समझने का अवसर दिया। पीएम मोदी ने कहा कि इस पूरे सफर में उन्हें यह सीख मिली कि व्यक्ति को लगातार सीखते रहना चाहिए और सफलता के बावजूद विनम्र बने रहना चाहिए।
आगे का लक्ष्य—विकसित भारत
पीएम मोदी के संबोधन का सबसे बड़ा संदेश आने वाले वर्षों में विकसित भारत के लक्ष्य को लेकर रहा। उन्होंने साफ किया कि 25 साल के सफर को केवल पीछे मुड़कर देखने का अवसर नहीं, बल्कि भविष्य के लिए नए संकल्प लेने का पड़ाव मानना चाहिए।
