Anmol Sandesh News Desk, सागर
मध्य प्रदेश में चीता पुनर्स्थापना अभियान ने बुधवार को एक और महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सागर जिले के वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में दो चीतों को छोड़ा। कूनो नेशनल पार्क से लाए गए इन चीतों को थोलो और CCB-3 नाम दिया गया है। इसके साथ ही नौरादेही मध्य प्रदेश में चीतों का तीसरा प्रमुख ठिकाना बन गया है। मुख्यमंत्री ने वन्य प्राणी संरक्षण सप्ताह के कार्यक्रम में चीतों को मुहली रेंज में तैयार किए गए बोमा में छोड़ा। चीतों की निगरानी और सुरक्षा के लिए करीब 439 हेक्टेयर क्षेत्र में विशेष इंतजाम किए गए हैं।
CM मोहन यादव ने छोड़े दो चीते
7 अक्टूबर को कूनो नेशनल पार्क से नर चीता थोलो और मादा चीता CCB-3 को वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व लाया गया। दोनों को मुहली रेंज में तैयार किए गए बोमा में रिलीज किया गया। चीतों की निगरानी के लिए वन विभाग की टीम तैनात रहेगी। उनके स्वास्थ्य, गतिविधियों और सुरक्षा पर लगातार नजर रखी जाएगी। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस मौके पर कहा कि चीते आमतौर पर इंसानों से संघर्ष नहीं करते और शांतिपूर्वक रहते हैं। उन्होंने कहा कि चीतों के यहां आने से आने वाले समय में उनका परिवार बढ़ेगा और क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण को नई दिशा मिलेगी।
एक ही जंगल में चीता, तेंदुआ और बाघ कैसे रहेंगे?
नौरादेही में चीते ऐसे क्षेत्र में रहेंगे, जहां पहले से तेंदुए और बाघ जैसे बड़े शिकारी मौजूद हैं। विशेषज्ञों के अनुसार चीता, तेंदुआ और बाघ के शिकार करने का तरीका और उनके शिकार अलग-अलग होते हैं। चीता आम तौर पर खुले इलाकों में अपनी तेज रफ्तार का इस्तेमाल कर शिकार करता है, जबकि बाघ और तेंदुआ अलग रणनीति अपनाते हैं। यही वजह है कि एक ही लैंडस्केप में इनके बीच संसाधनों को लेकर सीधी प्रतिस्पर्धा सीमित रह सकती है। चीतों के लिए बाघ और तेंदुए से दूरी बनाए रखना भी स्वाभाविक व्यवहार का हिस्सा है। वन विभाग की निगरानी के साथ यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नए क्षेत्र में दोनों चीते किस तरह अनुकूलन करते हैं।
MP में सबसे ज्यादा गिद्ध और बाघ होने पर CM ने जताया गर्व
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मध्य प्रदेश की वन्यजीव संपदा का जिक्र करते हुए कहा कि देश में सबसे ज्यादा गिद्ध मध्य प्रदेश में हैं। उन्होंने इसे प्रदेश के लिए गौरव की बात बताया।
उन्होंने कहा कि देश में सबसे ज्यादा बाघों की मौजूदगी भी मध्य प्रदेश में है। इसके साथ उन्होंने चंबल के घड़ियाल और नर्मदा नदी का उल्लेख करते हुए प्रदेश की जैव विविधता को रेखांकित किया। मुख्यमंत्री ने नर्मदा में मगरों की मौजूदगी का भी जिक्र किया और कहा कि मगर से डर लग सकता है, लेकिन धार्मिक मान्यता में मगर को मां नर्मदा का वाहन माना जाता है।
‘अगले महीने दो और चीते लेकर आएंगे’
मुख्यमंत्री ने चीतों की संख्या बढ़ाने की दिशा में आगे की योजना का भी संकेत दिया। उन्होंने कहा कि आज दो चीते छोड़े गए हैं और अगले महीने दो और चीते लाए जाएंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि इन चीतों से आगे चलकर यहां उनका परिवार बढ़ेगा और नौरादेही एक महत्वपूर्ण चीता आवास के रूप में विकसित होगा।
गाइड ट्रेनिंग सेंटर से स्थानीय युवाओं को रोजगार की उम्मीद
कार्यक्रम में रहली विधायक गोपाल भार्गव ने मुहली में गाइड ट्रेनिंग सेंटर खोलने की मांग रखी। उनका कहना है कि स्थानीय युवाओं को अलग-अलग भाषाओं में प्रशिक्षण देकर गाइड के रूप में तैयार किया जा सकता है। इससे क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। विस्थापित परिवारों के लिए स्थानीय स्तर पर छोटे उद्योग शुरू करने की सुविधा देने की मांग भी कार्यक्रम में रखी गई।
चीतों से बुंदेलखंड में पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
कैबिनेट मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि चीतों का आगमन केवल वन्यजीव संरक्षण तक सीमित नहीं रहेगा। इससे सागर और पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। वन्यजीव पर्यटन बढ़ने से होटल, गाइड, परिवहन, स्थानीय हस्तशिल्प और अन्य सेवाओं से जुड़े रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं। इसी वजह से नौरादेही में चीता परियोजना को स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
करीब 439 हेक्टेयर क्षेत्र में सुरक्षा इंतजाम
दोनों चीतों को छोड़ने से पहले मुहली रेंज में उनके लिए पांच बोमा तैयार किए गए हैं। करीब 439 हेक्टेयर क्षेत्र में चीतों की सुरक्षा और निगरानी की व्यवस्था की गई है। वन विभाग की टीम उनकी गतिविधियों, स्वास्थ्य और क्षेत्र में उनके मूवमेंट पर नजर रखेगी। इससे पहले कलेक्टर प्रतिभा पाल और डीएफओ रजनीश कुमार ने मुहली पहुंचकर तैयारियों का जायजा लिया था।
नौरादेही क्यों चुना गया?
नौरादेही को भारत में चीता बसाने के लिए काफी पहले से उपयुक्त माना जाता रहा है। भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII), देहरादून ने चीता पुनर्स्थापना योजना के शुरुआती दौर में नौरादेही को संभावित स्थल के तौर पर चिन्हित किया था। करीब 15 साल पहले किए गए सर्वे में नौरादेही की मुहली, सिंहपुर और झापन रेंज को चीतों के लिए अनुकूल माना गया था। हालांकि, परिस्थितियों को देखते हुए भारत में चीता पुनर्स्थापना की शुरुआत पहले कूनो से हुई। अब नौरादेही के टाइगर रिजर्व बनने के बाद यहां चीता बसाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
MP में अब तीन प्रमुख चीता ठिकाने
नौरादेही में दो चीतों की रिलीज के बाद मध्य प्रदेश में चीता पुनर्स्थापना के तीन प्रमुख केंद्र हो गए हैं—
- कूनो नेशनल पार्क
- गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य
- वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (नौरादेही)
गांधी सागर में भी चार चीते मौजूद हैं। इनमें दक्षिण अफ्रीकी मूल के नर चीते प्रभास और पावक, मादा धीरा और बोत्सवाना से लाई गई मादा राधा शामिल हैं।
कूनो में अब 54 चीते
थोलो और CCB-3 के नौरादेही आने के बाद कूनो नेशनल पार्क में 54 चीते रह जाएंगे। इससे पहले 5 अक्टूबर को कूनो में भारत में जन्मी मादा चीता KJP21 ने पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया था। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, इन शावकों के जन्म के बाद देश में चीतों की कुल संख्या 60 हो गई है, जिनमें 41 भारत में जन्मे चीते शामिल हैं।
