Anmol Sandesh News Desk, बलूचिस्तान।
पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में शनिवार को 5.7 तीव्रता का भूकंप आने से इलाके में हलचल मच गई। भूकंप के झटके पड़ोसी सिंध प्रांत के कुछ हिस्सों में भी महसूस किए गए। अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण (USGS) के मुताबिक, भूकंप का केंद्र बलूचिस्तान के खुझदार शहर से करीब 48 किलोमीटर दूर था। शुरुआती जानकारी के अनुसार, फिलहाल भूकंप से किसी तरह के जान-माल के नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमें स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
खुझदार और आसपास के इलाकों में सतर्कता
भूकंप के बाद खुझदार और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में संभावित नुकसान का आकलन किया जा रहा है। एहतियात के तौर पर राहत एवं बचाव दलों, अस्पतालों और पुलिस को अलर्ट पर रखा गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई की जा सके। प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। फिलहाल, किसी बड़ी तबाही या हताहतों की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
फरवरी में भी आया था 5.7 तीव्रता का भूकंप
बलूचिस्तान में इस साल फरवरी में भी 5.7 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। शनिवार को आए भूकंप के बाद एक बार फिर क्षेत्र में भूकंपीय गतिविधियों को लेकर चिंता बढ़ गई है। हालांकि, केवल समान तीव्रता के आधार पर दोनों घटनाओं के बीच सीधा संबंध नहीं माना जा सकता। इसके लिए भूकंप के केंद्र, गहराई और अन्य वैज्ञानिक आंकड़ों का विश्लेषण जरूरी होता है।
कितना खतरनाक होता है 5.7 तीव्रता का भूकंप?
5.7 तीव्रता का भूकंप मध्यम से तेज श्रेणी का माना जा सकता है और परिस्थितियों के आधार पर इससे नुकसान होने की आशंका रहती है। भूकंप के दौरान कमजोर या पुरानी इमारतों में दरारें आ सकती हैं, दीवारों और प्लास्टर को नुकसान पहुंच सकता है तथा कुछ संरचनाओं के हिस्से गिर सकते हैं। हालांकि, हर भूकंप में इस तरह का नुकसान हो, यह जरूरी नहीं है।
नुकसान की गंभीरता केवल भूकंप की तीव्रता पर निर्भर नहीं करती। भूकंप की गहराई, आबादी वाले क्षेत्रों से केंद्र की दूरी, जमीन की प्रकृति और इमारतों की मजबूती भी अहम भूमिका निभाते हैं। उथले भूकंप में, यदि केंद्र घनी आबादी के पास हो, तो नुकसान की आशंका बढ़ सकती है।
बलूचिस्तान का भूकंपों से पुराना नाता
पाकिस्तान का बलूचिस्तान क्षेत्र पहले भी विनाशकारी भूकंपों का सामना कर चुका है। वर्ष 1935 में क्वेटा में आए भीषण भूकंप ने भारी तबाही मचाई थी। ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार, इस आपदा में करीब 35 हजार लोगों की जान गई थी।
इसके बाद वर्ष 1945 में मकरान तट के पास शक्तिशाली भूकंप आया, जिसकी तीव्रता लगभग 8.1 दर्ज की गई थी। इस भूकंप के कारण समुद्र में सुनामी भी उठी थी, जिससे तटीय इलाकों में खतरा पैदा हुआ।
2005 के भूकंप में 74 हजार से ज्यादा लोगों की मौत
8 अक्टूबर 2005 को पाकिस्तान और पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के क्षेत्र में विनाशकारी भूकंप आया था। इसका केंद्र मुजफ्फराबाद के पास था। इस आपदा में 74 हजार से अधिक लोगों की मौत हुई थी और बड़ी संख्या में इमारतें क्षतिग्रस्त हुई थीं। इस त्रासदी ने पाकिस्तान में भूकंप से निपटने की तैयारी और सुरक्षित निर्माण की जरूरत को गंभीरता से सामने रखा।
तीन टेक्टोनिक प्लेटों के संपर्क क्षेत्र में है पाकिस्तान
भौगोलिक रूप से पाकिस्तान ऐसे क्षेत्र में स्थित है, जहां अरबियन, यूरेशियन और भारतीय टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल भूकंपीय गतिविधियों को प्रभावित करती है। इन प्लेटों के बीच होने वाली गति और दबाव के कारण इस क्षेत्र में भूकंप आने की आशंका बनी रहती है।
