Anmol Sandesh News Desk, भोपाल।
मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह का हिंदुत्व को लेकर दिया गया बयान चर्चा में है। इंदौर में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि हिंदुत्व का सनातन धर्म से कोई लेना-देना नहीं है और हिंदुत्व से समाज में कटुता फैलती है। उनके इस बयान ने धर्म, परंपरा और राजनीतिक विचारधारा को लेकर चल रही बहस को फिर चर्चा में ला दिया है।
दिग्विजय सिंह ने अपने बयान में हिंदुत्व की अवधारणा, सनातन परंपरा और धार्मिक पहचान के बीच अंतर बताते हुए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की विचारधारा पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि सनातन परंपरा को समझने के बजाय समाज में ऐसी पहचान को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे अलग-अलग समुदायों के बीच वैमनस्य बढ़ता है।
‘हिंदुत्व का उल्लेख वेदों और पुराणों में नहीं मिलता’: दिग्विजय सिंह
दिग्विजय सिंह ने कहा कि हिंदुत्व का उल्लेख वेदों और पुराणों में नहीं मिलता। उन्होंने विनायक दामोदर सावरकर का जिक्र करते हुए हिंदुत्व की अवधारणा के ऐतिहासिक विकास पर अपनी बात रखी। उनके अनुसार, सनातन परंपरा प्राचीन है, जबकि हिंदुत्व एक अलग वैचारिक अवधारणा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि समाज में धार्मिक पहचान के नाम पर कट्टरता और आपसी वैमनस्य को बढ़ावा दिया जा रहा है। दिग्विजय सिंह ने हिंदुत्व की राजनीति से जुड़े समूहों और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की राजनीति का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों ओर से ऐसी परिस्थितियां पैदा हुई हैं, जिनसे समाज में विभाजन बढ़ा है।
कांग्रेस नेता के इस बयान को धार्मिक पहचान और राजनीतिक विचारधारा के बीच अंतर को लेकर उनके नजरिए के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, हिंदुत्व की परिभाषा और सनातन धर्म के साथ उसके संबंध को लेकर राजनीतिक एवं वैचारिक स्तर पर अलग-अलग मत मौजूद हैं।
पहले भी हिंदू और सनातन धर्म को लेकर दे चुके हैं बयान
दिग्विजय सिंह इससे पहले भी हिंदू शब्द, सनातन धर्म और हिंदुत्व को लेकर अपनी राय रख चुके हैं। उन्होंने पूर्व में बीजेपी, आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद पर सनातन धर्म की व्याख्या को अपने राजनीतिक विचारों के अनुरूप प्रस्तुत करने का आरोप लगाया था।
उनका तर्क रहा है कि सनातन परंपरा और हिंदुत्व की राजनीतिक अवधारणा को एक ही रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि धार्मिक पहचान की राजनीति के कारण हिंदू-मुस्लिम, हिंदू-सिख और हिंदू-ईसाई समुदायों के बीच दूरियां बढ़ी हैं।
इन बयानों पर साधु-संतों और हिंदुत्व से जुड़े विचारों का समर्थन करने वाले लोगों की ओर से आपत्तियां भी सामने आती रही हैं। इस मुद्दे पर बहस का केंद्र यह है कि सनातन धर्म की परंपराओं, हिंदू पहचान और आधुनिक हिंदुत्व की अवधारणा को किस तरह समझा जाए।
20 अक्टूबर से उज्जैन से अयोध्या तक ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’
दिग्विजय सिंह 20 अक्टूबर 2026 को विजयादशमी के अवसर पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर से ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ शुरू करने वाले हैं। यह पदयात्रा ओरछा होते हुए अयोध्या के श्रीराम मंदिर तक पहुंचेगी। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यात्रा की प्रस्तावित दूरी करीब 950 किलोमीटर है और इसे लगभग 70 दिनों में पूरा करने की योजना है। दिग्विजय सिंह ने यात्रा के उद्देश्यों में सत्य, करुणा, सेवा और सामाजिक सद्भाव जैसे सनातन मूल्यों के प्रचार का उल्लेख किया है। इसके साथ ही उन्होंने धार्मिक संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़े मुद्दे उठाने की बात भी कही है।
हिंदुत्व को लेकर उनके हालिया बयान और इस यात्रा की शुरुआत के बीच राजनीतिक एवं वैचारिक चर्चा तेज होने की संभावना है। हालांकि, यात्रा को केवल हिंदुत्व संबंधी बयान के विरोध के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय उसके घोषित उद्देश्यों और दिग्विजय सिंह के बयानों को अलग-अलग समझना जरूरी है।
