Anmol Sandesh News Desk, इंदौर।
भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता और इंदौर की पूर्व सांसद सुमित्रा महाजन एक बार फिर अपने मजाकिया अंदाज को लेकर चर्चा में हैं। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, “हां, नौकरी मांगने आई थी।” उनके इस बयान की चर्चा हो रही है। हालांकि, इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य इंदौर में अधूरे पड़े विकास और कला से जुड़े कार्यों को पूरा कराने के लिए सरकार का ध्यान आकर्षित करना था।
सुमित्रा महाजन ने इंदौर की रेसीडेंसी कोठी में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने कला जगत से जुड़ी परियोजनाओं, ‘कला संकुल’ के अधूरे निर्माण और ‘अहिल्या मेमोरियल’ के शेष कार्यों को जल्द पूरा कराने का मुद्दा उठाया। साथ ही, मालवा-निमाड़ क्षेत्र में संभावित जल संकट और शहर की भूमिगत पाइपलाइनों की जानकारी डिजिटल रूप में उपलब्ध कराने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी अपनी बात रखी।
‘कला संकुल’ का काम पूरा कराने के लिए मांगा फंड
सुमित्रा महाजन ने इंदौर में कला और संस्कृति से जुड़े कार्यों में हो रही देरी पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि उनके ट्रस्ट द्वारा कलाकारों के लिए तैयार कराया जा रहा ‘कला संकुल’ प्रोजेक्ट अधूरा पड़ा है। यह परियोजना स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत आगे बढ़ाई जा रही थी, लेकिन फंड की कमी के कारण इसका काम पूरा नहीं हो सका।
उन्होंने सरकार से आवश्यक धनराशि उपलब्ध कराने का आग्रह किया, ताकि निर्माण कार्य को पूरा कर कलाकारों के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित की जा सकें। उनका कहना है कि कला और संस्कृति से जुड़ी परियोजनाएं शहर की पहचान और रचनात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
सुमित्रा महाजन ने ‘अहिल्या मेमोरियल’ और ‘कला संकुल’ के बाकी कार्यों को भी जल्द पूरा कराने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस संबंध में उन्होंने संबंधित अधिकारियों से मुलाकात कर परियोजनाओं की प्रगति और उन्हें पूरा करने के लिए जरूरी कदमों पर चर्चा की।
जल संकट को लेकर जताई चिंता, पहले से तैयारी करने की जरूरत
मालवा-निमाड़ क्षेत्र में बारिश की कमी और भविष्य में संभावित जल संकट को लेकर भी सुमित्रा महाजन ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि पानी की समस्या को लेकर समय रहते तैयारी करना जरूरी है। उनके अनुसार, जल प्रबंधन के साथ-साथ शहर में मौजूद भूमिगत पाइपलाइनों की सटीक जानकारी उपलब्ध होना भी बेहद आवश्यक है।
उन्होंने सुझाव दिया कि शहर की ड्रेनेज लाइनों और अन्य भूमिगत पाइपलाइनों का डिजिटल मैप तैयार किया जाना चाहिए। यह जानकारी नगर निगम के जोनल कार्यालयों में भी उपलब्ध होनी चाहिए, ताकि जरूरत पड़ने पर संबंधित पाइपलाइन की स्थिति का तुरंत पता लगाया जा सके।
सुमित्रा महाजन ने बताया कि खुदाई के दौरान कई बार पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने की स्थिति बन सकती है। यदि संबंधित अधिकारियों के पास डिजिटल मैप उपलब्ध हो, तो यह पता लगाने में आसानी होगी कि पाइपलाइन कहां स्थित है और उसे नुकसान पहुंचने पर तत्काल मरम्मत कैसे कराई जाए।
उन्होंने इस विषय पर महापौर, नगर निगम आयुक्त और अन्य संबंधित लोगों के साथ अपने सुझाव साझा किए हैं। उनका मानना है कि बेहतर योजना और तकनीक के इस्तेमाल से पानी की बर्बादी रोकने तथा नागरिकों को होने वाली परेशानियां कम करने में मदद मिल सकती है।
कौन हैं सुमित्रा महाजन, जिन्हें लोग कहते हैं ‘ताई’?
सुमित्रा महाजन भारतीय राजनीति की वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं। इंदौर लोकसभा सीट से उन्होंने वर्ष 1989 से 2019 तक लगातार आठ बार जीत दर्ज की। लंबे समय तक इंदौर का प्रतिनिधित्व करने के कारण उन्हें शहर में ‘ताई’ के नाम से जाना जाता है।
उन्होंने केंद्र सरकार में राज्य मंत्री के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई। इसके बाद वर्ष 2014 से 2019 तक वह 16वीं लोकसभा की अध्यक्ष रहीं। वह लोकसभा अध्यक्ष का पद संभालने वाली दूसरी महिला थीं।
राजनीति के अलावा सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों से भी उनका जुड़ाव रहा है। वर्ष 2021 में उन्हें देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।
विकास कार्यों को पूरा कराने पर रहा मुलाकात का फोकस
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ सुमित्रा महाजन की मुलाकात में इंदौर की कला-संस्कृति से जुड़ी परियोजनाओं को पूरा कराने, आवश्यक फंड उपलब्ध कराने और शहर की बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।
मीडिया से बातचीत में उनका मजाकिया अंदाज जरूर चर्चा में आया, लेकिन मुलाकात के दौरान उठाए गए मुद्दे शहर के विकास और भविष्य की जरूरतों से जुड़े हैं। अब देखना होगा कि ‘कला संकुल’, ‘अहिल्या मेमोरियल’ और भूमिगत पाइपलाइनों के डिजिटल मैप से संबंधित सुझावों पर आगे क्या कार्रवाई होती है।
