Anmol Sandesh News Desk | नई दिल्ली
राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने के साथ ही चिंता बढ़ने लगी है। हवा की गुणवत्ता खराब श्रेणी में पहुंचने के बाद प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के पहले चरण यानी GRAP-1 के तहत उपाय लागू किए गए हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, सुबह 9 बजे दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 233 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है।
सर्दियों की आहट के साथ दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण बढ़ने की आशंका एक बार फिर गहराने लगी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब अक्टूबर में ही हवा की गुणवत्ता खराब स्तर पर पहुंच रही है, तो सर्दियों के दौरान स्थिति कितनी चुनौतीपूर्ण हो सकती है?
GRAP-1 लागू होने का क्या मतलब है?
GRAP यानी Graded Response Action Plan वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए तैयार की गई चरणबद्ध कार्ययोजना है। इसके तहत प्रदूषण का स्तर बढ़ने पर संबंधित प्राधिकरण अलग-अलग उपाय लागू करते हैं।
GRAP के पहले चरण में धूल और प्रदूषण के स्रोतों पर नियंत्रण के लिए कई कदम उठाए जा सकते हैं, जिनमें प्रमुख हैं:
- सड़कों की सफाई: धूल कम करने के लिए सड़कों की नियमित सफाई और जरूरत के अनुसार पानी का छिड़काव।
- निर्माण स्थलों की निगरानी: निर्माण और तोड़फोड़ से उड़ने वाली धूल पर नियंत्रण तथा नियमों का पालन सुनिश्चित करना।
- खुले में कचरा जलाने पर रोक: कचरा और अन्य सामग्री जलाने की घटनाओं पर कार्रवाई।
- वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण: प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों और नियमों का उल्लंघन करने वालों की जांच।
- डीजल जनरेटर पर प्रतिबंध: लागू नियमों के अनुसार प्रतिबंधित श्रेणी के डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर रोक, निर्धारित छूट और आपात स्थितियों के प्रावधानों के अधीन।
इन उपायों का उद्देश्य प्रदूषण को शुरुआती स्तर पर ही नियंत्रित करना और हवा की गुणवत्ता को और बिगड़ने से रोकना है। हालांकि, किसी विशेष गतिविधि पर लागू प्रतिबंध और छूट की जानकारी संबंधित सरकारी आदेशों से ही सुनिश्चित की जानी चाहिए।
क्या होता है AQI? कैसे तय होती है हवा की गुणवत्ता?
AQI यानी Air Quality Index एक ऐसा सूचकांक है, जिसके माध्यम से हवा में मौजूद प्रदूषकों के स्तर के आधार पर वायु गुणवत्ता को समझा जाता है। इसके जरिए आम लोगों को पता चलता है कि हवा कितनी साफ या प्रदूषित है और उससे स्वास्थ्य पर कितना असर पड़ सकता है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के भारतीय AQI मानकों के अनुसार हवा की गुणवत्ता को छह श्रेणियों में बांटा जाता है।
| AQI स्तर | वायु गुणवत्ता की श्रेणी |
| 0–50 | अच्छा |
| 51–100 | संतोषजनक |
| 101–200 | मध्यम |
| 201–300 | खराब |
| 301–400 | बहुत खराब |
| 401–500 | गंभीर |
दिल्ली का AQI 233 होने का मतलब: उपलब्ध आंकड़े के अनुसार, दिल्ली की हवा ‘खराब’ श्रेणी में है। इस स्तर पर संवेदनशील लोगों के साथ-साथ कुछ अन्य लोगों को भी सांस लेने में परेशानी या असहजता महसूस हो सकती है। स्वास्थ्य पर प्रभाव व्यक्ति की स्थिति, प्रदूषण के संपर्क की अवधि और अन्य कारकों पर निर्भर करता है।
अक्टूबर में ही क्यों बढ़ने लगता है प्रदूषण?
दिल्ली-एनसीआर में अक्टूबर से मौसम में बदलाव आने लगता है। तापमान में गिरावट, हवा की गति में कमी और वातावरण में प्रदूषकों के फैलाव की परिस्थितियां कमजोर होने से प्रदूषण जमीन के करीब जमा हो सकता है। इसके अलावा, वाहनों का धुआं, निर्माण स्थलों से उड़ती धूल, औद्योगिक उत्सर्जन, कचरा जलाने और क्षेत्रीय स्तर पर पराली जलाने से होने वाला प्रदूषण भी वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है। अलग-अलग दिनों में इन कारकों का योगदान मौसम और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार बदलता रहता है। सर्दियों में प्रतिकूल मौसम संबंधी परिस्थितियां लंबे समय तक बनी रहें, तो प्रदूषण का स्तर और बढ़ सकता है। हालांकि, आने वाले दिनों में AQI कितना रहेगा, इसका आकलन ताजा निगरानी आंकड़ों और मौसम पूर्वानुमान के आधार पर ही किया जा सकता है।
प्रदूषण से बचने के लिए क्या करें?
दिल्ली में हवा की गुणवत्ता खराब होने पर नागरिक कुछ सावधानियां अपना सकते हैं:
- बाहर निकलने से पहले AQI की ताजा स्थिति और स्वास्थ्य संबंधी सलाह देखें।
- बहुत प्रदूषित समय में सुबह की दौड़, तेज व्यायाम और लंबे समय तक खुले में मेहनत करने से बचें।
- अस्थमा, हृदय या फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित लोग, बुजुर्ग और बच्चे विशेष सावधानी बरतें।
- बाहर जाना जरूरी हो तो अच्छी फिटिंग वाला N95 या समकक्ष मास्क उपयोगी हो सकता है।
- आंखों में जलन, लगातार खांसी, सांस फूलने या सीने में तकलीफ होने पर चिकित्सकीय सलाह लें। गंभीर सांस की परेशानी होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
सरकार और प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
प्रदूषण बढ़ने के साथ दिल्ली सरकार और संबंधित एजेंसियों के सामने हवा की गुणवत्ता में सुधार लाने की चुनौती है। GRAP-1 के तहत उठाए जाने वाले कदमों का असर इस बात पर निर्भर करेगा कि नियमों का पालन कितनी प्रभावी ढंग से कराया जाता है और प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों पर कितना नियंत्रण किया जाता है।
फिलहाल, उपलब्ध जानकारी में AQI 233 दर्ज होने से राजधानी की हवा को लेकर चिंता बढ़ी है। सर्दियों के दौरान प्रदूषण की स्थिति कैसी रहती है, यह मौसम, उत्सर्जन और नियंत्रण उपायों की प्रभावशीलता पर निर्भर करेगा।
