Anmol Sandesh News Desk | वॉशिंगटन
अमेरिका और यूक्रेन के बीच रिश्तों में तनाव की खबरों के बीच एक अहम कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में हुई एक बंद कमरे की बैठक के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रतिनिधियों ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से उनके बयानों को लेकर नाराजगी जताई। अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशनर ने कथित तौर पर जेलेंस्की से कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति उनसे बेहद नाराज हैं। इसके बाद जेलेंस्की को सफाई देनी पड़ी। यह बैठक ऐसे समय हुई, जब रूस को लेकर अमेरिकी नीति, यूक्रेन को मिलने वाली सैन्य सहायता और मॉस्को पर प्रतिबंधों के मुद्दे पर वॉशिंगटन और कीव के बीच मतभेद चर्चा में हैं।
‘ट्रम्प आपसे बहुत नाराज हैं’, बैठक में क्या हुआ?
रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को ओस्लो में हुई बैठक का मुख्य उद्देश्य ट्रम्प और जेलेंस्की के बीच हालिया तनाव को कम करना था। बैठक में अमेरिकी राष्ट्रपति के प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर ने जेलेंस्की के सामने उनकी टिप्पणियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि जेलेंस्की के बयानों से ट्रम्प नाराज हैं। इसके जवाब में जेलेंस्की ने कथित तौर पर कहा कि उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति के खिलाफ ऐसी कोई टिप्पणी नहीं की है। इस तरह बातचीत का केंद्र यूक्रेन को अमेरिकी समर्थन के साथ-साथ दोनों नेताओं के बीच बिगड़ते संवाद को सुधारना भी रहा। हालांकि, बंद कमरे में हुई इस बातचीत के सभी विवरणों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
ट्रम्प की नाराजगी से क्यों बढ़ी जेलेंस्की की मुश्किल?
डोनाल्ड ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल में अमेरिका के सहयोगी देशों के नेताओं के सामने एक बड़ी चुनौती है। उन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति के फैसलों से असहमति भी जतानी है और वॉशिंगटन के साथ अपने रिश्ते भी बनाए रखने हैं। ट्रम्प की व्यापार नीति, टैरिफ लगाने की धमकियों और दूसरे देशों के नेताओं पर सार्वजनिक टिप्पणियों के कारण कई बार कूटनीतिक तनाव पैदा हुआ है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कई विश्व नेता ट्रम्प को सीधे जवाब देने से बचते हैं, क्योंकि उन्हें आशंका रहती है कि इससे द्विपक्षीय संबंध प्रभावित हो सकते हैं या उनके देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है। लेकिन यूक्रेन की स्थिति दूसरे देशों से अलग है। रूस के साथ जारी युद्ध के बीच यूक्रेन को अमेरिकी हथियारों, खुफिया जानकारी और अन्य सैन्य सहायता की जरूरत रही है। ऐसे में जेलेंस्की के लिए अमेरिका की नीतियों पर अपनी असहमति जताना और अमेरिकी समर्थन बनाए रखना, दोनों बेहद अहम हैं।
रूस को लेकर अमेरिका के रुख से यूक्रेन चिंतित
रूस के प्रति ट्रम्प प्रशासन की नीति यूक्रेन और उसके यूरोपीय सहयोगियों के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा बनी हुई है।
रिपोर्ट में तीन प्रमुख मुद्दों का उल्लेख किया गया है:
- रूस से जुड़े ऊर्जा कारोबार का मुद्दा: रूस से डीजल खरीदने के अमेरिकी फैसले को लेकर सवाल उठे हैं।
- प्रतिबंधों में ढील: रूस पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों में राहत की खबरों ने अमेरिकी नीति को लेकर बहस बढ़ाई है।
- यूक्रेन को सहायता: अमेरिकी सैन्य और अन्य सहायता सीमित होने की आशंका कीव के लिए चिंता का विषय है।
यूक्रेन की चिंता यह है कि यदि अमेरिकी समर्थन कमजोर पड़ता है, तो रूस के खिलाफ युद्ध में उसकी स्थिति प्रभावित हो सकती है। हालांकि, इन नीतिगत फैसलों और ओस्लो बैठक के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध को स्थापित करने के लिए अतिरिक्त पुष्टि जरूरी है।
ओस्लो बैठक में नॉर्वे और फिनलैंड के नेता भी रहे मौजूद
इस महत्वपूर्ण बातचीत में यूक्रेन के साथ एकजुटता दिखाने वाले दो यूरोपीय नेता भी मौजूद थे।
- जोनास गार स्टोर: नॉर्वे के प्रधानमंत्री।
- अलेक्जेंडर स्टब: फिनलैंड के राष्ट्रपति।
रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों नेता यूक्रेन का समर्थन करते हैं और रूस के प्रति अमेरिकी रुख को लेकर यूरोप में मौजूद चिंताओं से परिचित हैं। बैठक से जुड़े घटनाक्रम में बताया गया कि विटकॉफ रूस जाने से पहले ओस्लो में रुके थे। वहीं, बीमारी के कारण कुशनर व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हो सके और वीडियो कॉल के माध्यम से बातचीत में जुड़े। यूरोपीय देशों के सामने भी यही चुनौती है कि वे यूक्रेन को समर्थन देते रहें और साथ ही अमेरिका के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को नुकसान पहुंचाने से बचें।
कनाडा ने ट्रम्प को दिया जवाब, लेकिन यूक्रेन की स्थिति अलग
रिपोर्ट में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का उदाहरण भी दिया गया है। अमेरिकी टैरिफ के जवाब में कनाडा ने भी जवाबी व्यापारिक कदम उठाए। लेकिन यूक्रेन के लिए कनाडा जैसा रुख अपनाना आसान नहीं है। कनाडा और अमेरिका के आर्थिक संबंध महत्वपूर्ण हैं, जबकि यूक्रेन की सुरक्षा रूस के साथ चल रहे युद्ध से सीधे जुड़ी है। यूक्रेन को अपनी रक्षा मजबूत करने के लिए बाहरी सैन्य सहायता की जरूरत है। इसलिए जेलेंस्की को हर बयान और कूटनीतिक कदम के संभावित परिणामों पर विचार करना पड़ता है।
क्या अमेरिकी मध्यावधि चुनाव भी हैं इस तनाव की वजह?
रूस के प्रति ट्रम्प प्रशासन के रुख को लेकर यह चर्चा भी हुई है कि क्या इसका संबंध अमेरिका की घरेलू राजनीति और मध्यावधि चुनावों से हो सकता है। हालांकि, बातचीत से परिचित एक व्यक्ति के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया कि विटकॉफ और कुशनर ने जेलेंस्की को समझाने की कोशिश की कि रूस को लेकर अमेरिकी नीति का घरेलू राजनीति से संबंध नहीं है। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध विवरणों से नहीं होती। इसलिए इसे बैठक में अमेरिकी प्रतिनिधियों द्वारा कथित तौर पर रखे गए पक्ष के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
आगे क्या होगा? अमेरिका-यूक्रेन रिश्तों पर दुनिया की नजर
ओस्लो की कथित बैठक ने अमेरिका और यूक्रेन के बीच संवाद की अहमियत को फिर सामने ला दिया है। यूक्रेन के लिए अमेरिकी समर्थन उसकी सुरक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जबकि ट्रम्प प्रशासन रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध को लेकर अपनी नीतियों पर काम कर रहा है।
