Anmol Sandesh News Desk, भोपाल
Dhanteras 2026 Inauspicious Items List: हिंदू धर्म में धनतेरस का पर्व सुख, समृद्धि, सौभाग्य और धन-वैभव का प्रतीक माना जाता है। दिवाली से पहले मनाए जाने वाले इस त्योहार का विशेष धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि धनतेरस के दिन शुभ वस्तुओं की खरीदारी करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और मां लक्ष्मी तथा भगवान कुबेर की कृपा बनी रहती है। यही वजह है कि इस दिन बाजारों में सोने-चांदी के आभूषण, सिक्के, नए बर्तन, झाड़ू, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां और अन्य घरेलू सामान खरीदने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ती है।
धनतेरस को खरीदारी के लिए बेहद शुभ माना जाता है। हालांकि, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन कुछ वस्तुओं को खरीदने से परहेज करने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि ऐसी चीजें नकारात्मकता, अस्थिरता या अभाव का प्रतीक मानी जाती हैं। इसी कारण लोग धनतेरस पर खरीदारी करते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखते हैं। आइए जानते हैं कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार धनतेरस के दिन किन 5 चीजों को खरीदने से बचना चाहिए।
1. चाकू, कैंची और अन्य नुकीली चीजें खरीदने से बचें
धनतेरस के दिन चाकू, कैंची, सुई और अन्य नुकीली वस्तुएं खरीदना कई धार्मिक मान्यताओं में शुभ नहीं माना जाता है। ऐसी वस्तुओं को काटने, अलगाव और विवाद से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि त्योहार के शुभ अवसर पर इनकी खरीदारी करने से घर की सकारात्मकता प्रभावित हो सकती है। इसलिए कई लोग धनतेरस पर इन वस्तुओं को खरीदने से परहेज करते हैं। हालांकि, यह एक पारंपरिक मान्यता है, इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
2. कांच और शीशे की वस्तुओं की खरीदारी में बरतें सावधानी
कांच और शीशे से बनी वस्तुएं नाजुक होती हैं और आसानी से टूट सकती हैं। धार्मिक मान्यताओं में टूटने वाली वस्तुओं को कभी-कभी अस्थिरता से जोड़कर देखा जाता है। इसी वजह से धनतेरस पर कांच के सामान और शीशे की खरीदारी को लेकर कुछ लोग सावधानी बरतते हैं। हालांकि, कांच की वस्तुएं खरीदना हर परंपरा में अशुभ नहीं माना जाता है। इसलिए इसे अनिवार्य नियम के बजाय व्यक्तिगत आस्था और पारिवारिक परंपरा से जोड़कर देखना चाहिए।
3. काले रंग की वस्तुएं खरीदने से क्यों किया जाता है परहेज?
धनतेरस और दिवाली जैसे शुभ त्योहारों पर लाल, पीले और सुनहरे रंगों को विशेष महत्व दिया जाता है। इन रंगों को शुभता, ऊर्जा, समृद्धि और सौभाग्य से जोड़कर देखा जाता है। वहीं, कुछ धार्मिक परंपराओं में काले रंग को शुभ कार्यों के दौरान प्राथमिकता नहीं दी जाती। इसी कारण धनतेरस पर काले कपड़े या काले रंग की कुछ वस्तुएं खरीदने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि, काला रंग अपने आप में अशुभ नहीं है और इसे लेकर अलग-अलग परिवारों तथा क्षेत्रों में अलग मान्यताएं प्रचलित हैं।
4. खाली बर्तन घर लाने से क्यों किया जाता है मना?
धनतेरस पर सोने-चांदी के अलावा नए बर्तन खरीदने की परंपरा भी काफी लोकप्रिय है। इस दिन पीतल, तांबे, स्टील और अन्य धातुओं के बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है। लेकिन एक प्रचलित मान्यता के अनुसार, नया बर्तन घर लाते समय उसे खाली नहीं रखना चाहिए। इसलिए कुछ लोग उसमें चावल, अनाज, मिठाई या पानी भरकर घर लाते हैं। ऐसा करना घर में अन्न-धन की प्रचुरता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इस परंपरा के पीछे यह भाव है कि घर में हमेशा अन्न और संसाधनों की कमी न हो।
5. लोहे के भारी औजार और मशीनें खरीदने से बचने की मान्यता
धार्मिक मान्यताओं में लोहे का संबंध शनिदेव से जोड़ा जाता है। इसी वजह से कुछ लोग धनतेरस के दिन लोहे से बनी वस्तुओं, भारी औजारों और मशीनों की खरीदारी से परहेज करते हैं। मान्यता है कि शुभ अवसर पर ऐसी वस्तुओं की खरीदारी करने के बजाय सोना, चांदी, तांबा, पीतल या नए बर्तनों को प्राथमिकता देनी चाहिए। हालांकि, यह कोई सार्वभौमिक धार्मिक नियम नहीं है। जरूरत के अनुसार लोहे की वस्तुएं खरीदना अशुभ होने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण भी नहीं है।
धनतेरस पर क्या खरीदना माना जाता है शुभ?
धनतेरस के दिन खरीदारी करते समय कई लोग परंपरागत रूप से कुछ विशेष वस्तुओं को प्राथमिकता देते हैं। इनमें शामिल हैं:
- सोना और चांदी: धन, वैभव और समृद्धि के प्रतीक के रूप में।
- नए बर्तन: घर में सुख-समृद्धि और अन्न की प्रचुरता की कामना के साथ।
- झाड़ू: घर की स्वच्छता और मां लक्ष्मी के आगमन से जुड़ी मान्यता के कारण।
- धनिया के बीज: कुछ क्षेत्रों में इसे धन-वृद्धि और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
- लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां: पूजा-अर्चना और शुभ शुरुआत के लिए।
- मिट्टी के दीये: घर को रोशन करने और दीपावली की परंपरा निभाने के लिए।
धनतेरस पर खरीदारी करते समय इन बातों का रखें ध्यान
धनतेरस का मुख्य संदेश केवल खरीदारी करना नहीं, बल्कि परिवार की खुशहाली, समृद्धि और मंगलकामना से भी जुड़ा है। इसलिए अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार ही खरीदारी करें और किसी भी वस्तु को खरीदने के लिए अनावश्यक खर्च या कर्ज लेने से बचें। शुभ मुहूर्त और पूजा-विधि के लिए अपने क्षेत्र की पंचांग परंपरा का ध्यान रख सकते हैं।
