Anmol Sandesh News Desk, भोपाल।
Dewas TI Murder Case: मध्य प्रदेश के देवास जिले में अवैध शराब तस्करी के खिलाफ कार्रवाई के दौरान थाना प्रभारी (TI) दिलीप पुरी की दर्दनाक हत्या से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। इस घटना पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए शहीद पुलिस अधिकारी के परिवार के लिए बड़ी सहायता का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री ने दिवंगत TI के परिवार को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देने और उनकी पत्नी को पुलिस विभाग में सब इंस्पेक्टर (SI) के पद पर अनुकंपा नियुक्ति देने की घोषणा की है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर दिवंगत अधिकारी को श्रद्धांजलि दी और उनके परिवार के प्रति संवेदनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने कहा कि कर्तव्य निभाते हुए अपने प्राणों की आहुति देने वाले पुलिस अधिकारी का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। सरकार इस कठिन समय में पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है।
अवैध शराब से भरे ट्रक का पीछा करते समय हुई वारदात
जानकारी के मुताबिक, देवास जिले में अवैध शराब के कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस अधीक्षक की ओर से पांच विशेष टीमें गठित की गई थीं। इन्हीं टीमों में खातेगांव थाना प्रभारी दिलीप पुरी भी शामिल थे।
पुलिस को सूचना मिली थी कि अवैध शराब से भरा एक ट्रक बैतूल-इंदौर हाईवे के रास्ते हरदा से गुजरात की ओर जा रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम सक्रिय हुई और ट्रक की तलाश शुरू कर दी। इस दौरान नेमावर थाने की पुलिस भी ट्रक का पीछा कर रही थी।
काफी देर तक तलाश करने के बाद पुलिस को संदिग्ध ट्रक सड़क किनारे खड़ा मिला। पुलिस अधिकारी दिलीप पुरी ने ट्रक चालक को नीचे उतरने के लिए कहा, लेकिन चालक ने पुलिस की बात मानने के बजाय अचानक ट्रक आगे बढ़ा दिया। इसी दौरान ट्रक की चपेट में आने से TI दिलीप पुरी गंभीर रूप से घायल हो गए।
अस्पताल में दो घंटे तक चला इलाज, नहीं बच सकी जान
घटना के बाद घायल थाना प्रभारी को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों की टीम ने उनकी जान बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किया। उन्हें करीब दो घंटे तक CPR दिया गया, लेकिन गंभीर चोटों के कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका।
कर्तव्य निभाते हुए एक पुलिस अधिकारी की इस तरह मौत से पुलिस विभाग में शोक की लहर फैल गई। घटना ने एक बार फिर अवैध शराब तस्करी के खिलाफ कार्रवाई के दौरान पुलिसकर्मियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
CM मोहन यादव का बड़ा ऐलान, परिवार को मिलेगी एक करोड़ की मदद
TI दिलीप पुरी की मौत की खबर सामने आने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शोक व्यक्त करते हुए उनके परिवार को आर्थिक सहायता देने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री की ओर से घोषित प्रमुख सहायता इस प्रकार है:
- दिवंगत TI के परिवार को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता।
- उनकी पत्नी को सब इंस्पेक्टर (SI) के पद पर अनुकंपा नियुक्ति।
- संकट की इस घड़ी में परिवार को राज्य सरकार की ओर से सहयोग।
मुख्यमंत्री के इस फैसले को शोकाकुल परिवार के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। सरकार की ओर से दी गई सहायता और नियुक्ति की घोषणा से परिवार को भविष्य में आर्थिक एवं सामाजिक सुरक्षा मिलने की उम्मीद है।
तीन संदिग्ध हिरासत में, पुलिस कर रही पूछताछ
इस हत्याकांड के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीन संदिग्धों को हिरासत में लिया है। उनसे पूरे घटनाक्रम, ट्रक में भरी अवैध शराब और इस नेटवर्क से जुड़े लोगों के संबंध में पूछताछ की जा रही है।
पुलिस जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि ट्रक किसका था, शराब कहां से लाई जा रही थी और तस्करी के इस नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि ट्रक चालक ने पुलिस अधिकारी को कुचलने की कोशिश किन परिस्थितियों में की।
कांग्रेस नेता राहुल जायसवाल का नाम भी चर्चा में
इस मामले में शराब कारोबार से जुड़े कांग्रेस नेता राहुल जायसवाल का नाम भी सामने आया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, राहुल जायसवाल शराब कॉन्ट्रैक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष और कांग्रेस से जुड़े पदाधिकारी हैं। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से उन्हें खातेगांव विधानसभा का प्रभारी भी नियुक्त किया गया है।
जांच में यह जानकारी सामने आने की बात कही गई है कि टिमरनी स्थित शराब दुकान में राहुल जायसवाल और उनके भाई मनीष जायसवाल की साझेदारी है। हालांकि, केवल कारोबारी संबंध या राजनीतिक पद के आधार पर किसी व्यक्ति की हत्याकांड में संलिप्तता साबित नहीं होती। इस संबंध में पुलिस की जांच और आधिकारिक पुष्टि महत्वपूर्ण होगी।
अवैध शराब तस्करी पर उठे गंभीर सवाल
देवास की इस घटना ने प्रदेश में अवैध शराब के कारोबार और तस्करी के नेटवर्क को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर किस तरह अवैध शराब से भरे ट्रक राज्य के अलग-अलग इलाकों से गुजरते हैं? इस नेटवर्क को किन लोगों का संरक्षण मिलता है? और पुलिस की कार्रवाई के दौरान तस्कर इतने बेखौफ कैसे हो जाते हैं?
