Anmol Sandesh News Desk, नई दिल्ली।
देशभर में आज 7 नवंबर 2026 को छोटी दिवाली का पावन पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाने वाला यह त्योहार नरक चतुर्दशी और रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है। दीपावली से ठीक एक दिन पहले आने वाले इस पर्व का हिंदू धर्म में विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है।
छोटी दिवाली के दिन घरों में दीपक जलाने, साफ-सफाई करने, भगवान की पूजा-अर्चना करने और बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव मनाने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान हनुमान की आराधना करने से भय, संकट और नकारात्मकता से मुक्ति मिलती है। भक्त बजरंगबली से सुख-समृद्धि, बल, बुद्धि और जीवन में खुशहाली की कामना करते हैं।
मान्यता है कि हनुमान जी अपने भक्तों के संकट दूर करते हैं और उन्हें साहस, शक्ति तथा आत्मविश्वास प्रदान करते हैं। यही वजह है कि छोटी दिवाली पर कई स्थानों पर विशेष रूप से हनुमान जी की पूजा और हनुमान चालीसा का पाठ किया जाता है।
छोटी दिवाली को नरक चतुर्दशी क्यों कहते हैं?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नरक चतुर्दशी का संबंध भगवान श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर नामक राक्षस के वध से जुड़ा है। पौराणिक कथा के मुताबिक, नरकासुर ने अपनी शक्ति के अहंकार में अनेक लोगों को बंदी बना लिया था और देवताओं तथा ऋषियों को परेशान कर रखा था।
इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध कर लोगों को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई। इसी विजय की स्मृति में नरक चतुर्दशी मनाने की परंपरा प्रचलित हुई। यह पर्व बुराई पर अच्छाई और अंधकार पर प्रकाश की जीत का प्रतीक माना जाता है।
छोटी दिवाली पर हनुमान जी की पूजा क्यों की जाती है?
छोटी दिवाली पर भगवान हनुमान की पूजा को लेकर कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। मान्यता है कि जब भगवान श्रीराम 14 वर्षों का वनवास पूरा करके माता सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे थे, तब हनुमान जी की निस्वार्थ सेवा, समर्पण और भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें विशेष आशीर्वाद दिया था।
धार्मिक परंपराओं में यह भी मान्यता है कि दीपावली से पहले हनुमान जी की आराधना करने से घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव दूर होता है।
कुछ क्षेत्रों में छोटी दिवाली के दिन हनुमान जी के जन्मोत्सव से जुड़ी विशेष पूजा-अर्चना भी की जाती है। हालांकि, हनुमान जयंती की तिथि अलग-अलग क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार मनाई जाती है।
हनुमान जी को संकटमोचन कहा जाता है। भक्तों का विश्वास है कि उनकी सच्चे मन से की गई आराधना से जीवन की कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति मिलती है।
छोटी दिवाली पर कैसे करें हनुमान जी की पूजा?
छोटी दिवाली के दिन भक्त सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं और पूजा स्थल को साफ करते हैं। इसके बाद भगवान हनुमान की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाकर विधि-विधान से पूजा की जाती है।
हनुमान जी की पूजा के दौरान इन बातों का विशेष ध्यान रखा जाता है:
- दीपक जलाएं: पूजा स्थल पर घी या तिल के तेल का दीपक जलाएं।
- सिंदूर और चोला अर्पित करें: परंपरा के अनुसार बजरंगबली को सिंदूर अर्पित करें।
- लाल फूल चढ़ाएं: श्रद्धापूर्वक लाल फूल और प्रसाद अर्पित करें।
- हनुमान चालीसा का पाठ करें: हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ करना शुभ माना जाता है।
- मंत्र जाप करें: ‘ॐ हनुमते नमः’ मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें।
- आरती करें: पूजा के अंत में हनुमान जी की आरती करके परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।
पूजा में सबसे महत्वपूर्ण बात श्रद्धा, भक्ति और शुद्ध मन माना जाता है।
हनुमान जी की पूजा करने से मिलते हैं ये विशेष लाभ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, छोटी दिवाली पर बजरंगबली की आराधना करने से भक्तों को कई प्रकार के शुभ फल प्राप्त होते हैं।
- संकटों से मुक्ति: हनुमान जी को संकटमोचन कहा जाता है। उनकी पूजा से जीवन की परेशानियां दूर होने की मान्यता है।
- नकारात्मक विचारों से बचाव: हनुमान चालीसा का पाठ करने से मन में सकारात्मकता और आत्मविश्वास बढ़ता है।
- बल और बुद्धि की प्राप्ति: बजरंगबली को शक्ति, साहस, बुद्धि और विद्या का प्रतीक माना जाता है।
- भय से मुक्ति: हनुमान जी की आराधना से भक्तों को मानसिक मजबूती और निर्भयता का आशीर्वाद मिलने की मान्यता है।
- परिवार में सुख-शांति: श्रद्धापूर्वक पूजा करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहने की कामना की जाती है।
- आध्यात्मिक उन्नति: हनुमान जी की भक्ति व्यक्ति को सेवा, समर्पण, विनम्रता और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।
छोटी दिवाली और रूप चौदस का भी है विशेष महत्व
छोटी दिवाली को कई क्षेत्रों में रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने और शरीर पर उबटन लगाने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसे रूप और सौंदर्य में निखार लाने वाला पर्व माना जाता है।
वहीं नरक चतुर्दशी पर यमराज के निमित्त दीपदान करने की भी परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन शाम को घर के बाहर दीपक जलाने से अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति और परिवार की रक्षा का आशीर्वाद मिलता है।
छोटी दिवाली का संदेश: अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ें
छोटी दिवाली केवल दीपक जलाने का त्योहार नहीं, बल्कि जीवन से बुराइयों, अहंकार, भय और नकारात्मकता को दूर करने का संदेश भी देती है। भगवान हनुमान का जीवन हमें निस्वार्थ सेवा, सच्ची भक्ति, साहस और समर्पण की प्रेरणा देता है।
इस पावन अवसर पर बजरंगबली की आराधना के साथ अपने जीवन में अच्छे विचारों और सकारात्मकता को अपनाने का संकल्प लें।
