Anmol Sandesh News Desk,भोपाल
मध्य प्रदेश में आज (1 जून) से तबादलों का दौर शुरू हो गया है। राज्य सरकार की नई तबादला नीति के तहत 15 जून तक सभी विभाग स्वैच्छिक और प्रशासनिक आधार पर अधिकारियों एवं कर्मचारियों के स्थानांतरण कर सकेंगे। इसके साथ ही पुलिस मुख्यालय (PHQ) के निर्देश के बाद जिलों में आरक्षक से लेकर उप निरीक्षक (SI) स्तर तक के तबादले भी शुरू हो गए हैं।मोहन सरकार की कैबिनेट ने 20 मई को तबादला नीति को मंजूरी दी थी। इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने 22 मई को वर्ष 2026 की स्थानांतरण नीति जारी की। विभागों को नौ दिन के भीतर तैयारी पूरी कर स्थानांतरण संबंधी आदेश जारी करने के निर्देश दिए गए थे।

विभागवार तबादलों की सीमा तय
नई नीति के अनुसार विभागों में कर्मचारियों की संख्या के आधार पर तबादलों की सीमा निर्धारित की गई है।
- 200 तक कर्मचारी वाले विभागों में अधिकतम 20% तबादले
- 200 से 1000 कर्मचारी वाले विभागों में 15% तबादले
- 1000 से 2000 कर्मचारी वाले विभागों में 10% तबादले
- 2001 से अधिक कर्मचारी वाले विभागों में 5% तबादले
तीन साल पूरे होने पर हो सकेगा तबादला
प्रथम और द्वितीय श्रेणी के कार्यपालिक अधिकारियों को एक जिले में तीन वर्ष पूरे होने पर जिले से बाहर स्थानांतरित किया जा सकेगा। तृतीय श्रेणी कर्मचारियों का भी एक ही स्थान पर तीन वर्ष या उससे अधिक समय पूरा होने पर तबादला किया जा सकेगा।हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि तीन वर्ष की अवधि अनिवार्य शर्त नहीं होगी। यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी निर्धारित लक्ष्य पूरे नहीं कर पाया है, तो उसका तबादला तय अवधि से पहले भी किया जा सकेगा।

इन मामलों को तबादला नीति से बाहर रखा गया
सरकार ने पति-पत्नी को एक ही स्थान पर पदस्थ करने और गंभीर बीमारी के मामलों में किए जाने वाले स्थानांतरण को सामान्य तबादला नीति से अलग रखा है। ऐसे मामलों पर विशेष परिस्थितियों के आधार पर निर्णय लिया जाएगा।
महिलाओं और रिटायरमेंट के करीब कर्मचारियों को राहत
नई नीति में महिलाओं को विशेष राहत दी गई है। अविवाहित, विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिला कर्मचारियों को गृह जिले में पदस्थ करने का प्रावधान किया गया है।इसके अलावा जिन कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति में एक वर्ष या उससे कम समय बचा है, उनका सामान्य परिस्थितियों में तबादला नहीं किया जाएगा।
कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों को छूट
मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों को दो कार्यकाल यानी चार वर्ष तक स्थानांतरण से छूट दी जाएगी। वहीं वित्तीय अनियमितता, गबन या सरकारी धन के दुरुपयोग के मामलों में प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों को तत्काल संबंधित पदों से हटाने का प्रावधान भी रखा गया है।

सभी आदेश होंगे ऑनलाइन
सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी स्थानांतरण आदेश ऑनलाइन जारी किए जाएंगे। 15 जून के बाद जारी होने वाले आदेश अमान्य माने जाएंगे। प्रत्येक आदेश में कर्मचारी का ट्रेजरी एम्पलाई कोड दर्ज करना अनिवार्य होगा।स्थानांतरण के बाद पुराने पदस्थापना स्थल से वेतन आहरण स्वतः बंद होगा। इसके बावजूद वेतन निकाले जाने की स्थिति में इसे वित्तीय अनियमितता माना जाएगा।
जांच और आपराधिक मामलों वाले अधिकारियों पर रोक
जिन अधिकारियों या कर्मचारियों के खिलाफ नैतिक पतन से जुड़े आपराधिक मामले या विभागीय जांच लंबित हैं, उन्हें कार्यपालिक पदों पर पदस्थ नहीं किया जाएगा। सरकार ने ऐसे मामलों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।प्रदेश में तबादला प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही विभिन्न विभागों में आवेदन और प्रशासनिक तैयारियां तेज हो गई हैं। आगामी 15 जून तक हजारों अधिकारियों और कर्मचारियों के स्थानांतरण आदेश जारी होने की संभावना है।
